तेलंगाना के शहरी इलाकों में बेरोजगारी दर बहुत अधिक, जानें अलग अलग राज्यों का हाल

20 Oct, 2020 14:58 IST|विजय कुमार
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तेलंगाना में राष्ट्रीय औसत से अधिक बेरोजगारी

जानिए देश में बेरोजगारी को लेकर आंकड़े क्या कहते हैं?

हैदराबाद: कोरोना काल में युवा सबसे अधिक बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। बीते साल की दूसरी तिमाही में शहरी इलाकों में बेरोजगारी दर नीचे आई थी। स्टैटिस्टिकल डिपार्टमेंट की ओर बेरोजगारी दर पर जाड़ी किये आंकड़े चौंकाने वाले हैं। जिसमें साफ पता चलता है कि शहरी इलाकों में युवा कोरोना संक्रमण और इससे उपजी बंदी से अधिक परेशान हैं। 

तेलंगाना में क्या है हाल?

तेलंगाना में जून 2020 में राष्ट्रीय औसत से अधिक बेरोजगारी थी। हालांकि हाल के कुछ महीनों में हालात में सुधार हुए हैं। कोरोना संक्रमण के बाद बंदी और उससे उपजी स्थिति के बाद तेलंगाना में बेरोजगारी का आलम बढ़ा है। राज्य में विभिन्न संस्थाओं ने सरकार से इस बारे में ध्यान देने की गुजारिश की है। सेंटर फर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनोमी के आंकड़ों के मुताबिक तेलंगाना में अभी भी बेरोजगारी का दर 15.5 फीसदी है, जो राष्ट्रीय औसत 11 फीसदी से काफी अधिक है। तेलंगाना के हालात की बात करें तो आज भी कई नौकरीपेशा लोग आधी सैलरी पर काम कर रहे हैं। जो बेरोजगारी डाटा में शुमार तक नहीं किये जाते हैं। इसके अलावा नए रोजगार के मौकों का तेलंगाना में घोर अभाव देखने को मिल रहा है। 

राष्ट्रीय आंकड़ों पर गौर करें तो जुलाई-सितंबर 2019 में बेरोजगारी की दर 8.4 फीसदी थी। वहीं, जून तिमाही में ये दर 8.9 फीसदी थी। पीरियडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के आंकड़ों के मुताबिक ही सांख्यिकी मंत्रालय ने इस बाबत जानकारी दी। 

इन राज्यों के शहरी इलाके में है ज्यादा बेरोजगारी
15 से 29 साल तक के लोगों को सबसे अधिक बेरोजगारी की मार झेलनी पड़ रही है। इनमें 21 फीसदी युवा काम नहीं होने का दंश झेल रहे हैं। केरल, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और तेलंगाना के शहरी इलाकों में बेरोजगारी दर बहुत अधिक बताई गई है। पिछले साल की दूसरी तिमाही में ये दर करीब 9.4 फीसदी तक आंकी गई। आपको बता दें साल 2019 में जनवरी से लेकर सितंबर तक की तीन तिमाही में शहरी बेरोजगारी की दर में कमी थी। 

बेरोजगारी की परिभाषा क्या है?

अगर कोई भी शख्स किसी भी हफ्ते में एक घंटा भी काम नहीं करता है तो उसको बेरोजगार माना जाता है। भारत के शहरों में महिलाओं में बेरोजगारी दर अधिक है। पुरुषों की बेरोजगारी दर करीब 8 फीसदी आंकी गई जबकि महिलाओं की 9.7 फीसदी दर्ज की गई।

सर्वे में क्या निकलकर आया सामने 

करीब 1.76 लाख लोगों से बातचीत के सर्वे के आधार पर ही आंकलन किया गया। सितंबर में समाप्त तिमाही में सर्वे करने के लिए 44,471 परिवारों से राय ली गई। अप्रैल-जून 2019 की अवधि में सर्वे करने के लिए सैंपल साइज 1.80 लाख लोगों का रखा गया था। इनमें 45,288 परिवारों की राय ली गई। कामकाज में श्रम भागीदारी 36.2 फ़ीसदी से बढ़कर 36.8 फ़ीसदी हुई है जो अच्छा संकेत है। वर्कर पॉपुलेशन रेश्यो भी जून तिमाही के 32.9 फ़ीसदी से बढ़कर 33.7 प्रतिशत हो गई है। 

  • राज्यों के हिसाब से बेरोजगारी दर
  • हरियाणा में बेरोजगारी दर 19.7 फीसदी 
  • हिमाचल प्रदेश में ये दर 12 फीसदी
  • उत्‍तराखंड में 22.3 फीसदी
  • त्रिपुरा में 17.4 फीसदी
  • गोवा में 15.4 फीसदी 
  • जम्‍मू-कश्‍मीर में 16.2 फीसदी 

कुल मिलाकर कहें तो हरियाणा जैसे राज्यों में बेरोजगारी का आलम अपेक्षाकृत कम है। बनिस्पत बाकी महानगरों वाले राज्यों में हाल आज भी बुरा है। वहीं पश्चिम बंगाल में भी रोजगार को लेकर दिक्कत कम है। पश्चिम बंगाल में बेरोजगारी दर 9.3 फीसदी है, पंजाब में 9.6 फीसदी। सितंबर 2020 में राष्‍ट्रीय बेरोजगारी दर (National Rate) 6.67 फीसदी आंका गया। अप्रैल 2020 की 23.52 फीसदी और मई 2020 की 21.3 फीसदी से काफी नीचे आ चुकी है। मतलब ये है कि अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होने के बाद लोगों ने फिर से काम धंधा शुरू कर दिया है। 
 

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