तेलंगाना में कोरोना मामलों में गिरावट का जानिए असली सच, मरीजों की कई शिकायतें

21 Sep, 2020 16:14 IST|Sakshi
हैदराबाद शहर

तेलंगाना में कम हो रहे हैं कोरोना मामले 

मामलों में कमी को लेकर उठे सवाल

कोरोना मरीजों की कई शिकायतें 

हैदराबाद: तेलंगाना में कोरोनावायरस के मामलों में कमी आई है। राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि पिछले 24 घंटों में 1,302 नए मामले सामने आए। ऐसा सप्ताहांत में कम टेस्ट करने के चलते हुआ। जिस तरह की आपदा से आम लोग गुजर रहे हैं, उसमें ये कहना कि रविवार और शनिवार की छुट्टियों के चलते मामले कम हुए हैं, कहीं न कहीं लोगों के साथ धोखा बताया जा रहा है। आम लोगों का आरोप है कि जिस तरह शनिवार और रविवार सप्ताहांत की छुट्टियों पर अस्पताल खुले रहते हैं और एमरजेंसी सेवा चालू रहती है उसी तर्ज पर कोरोना टेस्टिंग की व्यवस्था भी छुट्टियों के कारण रुकनी नहीं चाहिए। इसके लिए जरूरी हो तो सरकार को और अधिक मेडिकलकर्मियों को बहाल करना चाहिए। 

तेलंगाना में कोरोना वायरस के कुल मामले करीब 1,72,608 हो चुके हैं। पिछले 24 घंटों में इस बीमारी से 9 लोगों की मौत हुई जिसके बाद मरने वालों का आंकड़ा 1,042 हो गया। राज्य में मृत्यु दर 0.60 फीसदी है, जबकि ये आंकड़ा राष्ट्रीय स्तर पर 1.60 फीसदी है।
राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, शनिवार और रविवार को यहां 31,095 नमूनों की जांच की गई, जबकि बाकी दिन 50-60 हजार नमूनों की जांच होती थी। अब तक राज्य में 25,19,315 नमूनों की जांच हो चुकी है।

पिछले 24 घंटों में 2,230 लोग इस बीमारी से उबर चुके हैं, जिसके बाद ठीक होने वाले मरीजों की कुल संख्या 1,41,930 हो गई है। रिकवरी रेट 82.22 फीसदी है, जबकि राष्ट्रीय औसत 79.87 फीसदी है। राज्य में फिलहाल 29,636 एक्टिव मामले हैं जिनमें से 22,990 होम आईसोलेशन में हैं।

क्या कहते हैं कोरोना पीड़ित?

होम आइसोलेशन में रह रहे कुछ मरीजों से साक्षी संवाददाता ने बातचीत की। जिन्होंने साफ तौर पर सरकार की लचर व्यवस्था का हवाला दिया। साथ ही लोगों ने आरोप लगाया कि राज्य में 108 एम्बुलेंस सेवा भी कारगत तौर पर मरीजों की सेवा में नहीं है। अमूमन कोविड पेशेंट के लिए कभी भी एमरजेंसी की स्थिति हो सकती है। जबकि लगातार फोन करने के बावजूद 108 सेवा पर फोन नहीं उठाया जाता। 
मेडिकल सेवाओं के लिए टेलीकॉलिंग से लोग असंतुष्ट 

राज्य में चिकित्सकीय सेवा के लिए सरकार ने कई रिटायर्ड चिकित्सकों को बहाल किया है। जो फोन के जरिए मरीजों को परामर्श देते हैं। कई मरीजों की शिकायत है कि वो सरकारी प्रोटोकॉल वाली दवा तो खा रहे हैं। लेकिन एमरजेंसी  की स्थिति में फोन पर सलाह देने वाले डॉक्टर कुछ कर नहीं पाते हैं। 

एमरजेंसी के लिए गांधी अस्पताल का ही रास्ता

तेलंगाना में जितने भी कोरोना मरीज हैं, उन्हें एमरजेंसी की स्थिति में गांधी अस्पताल की राह ही दिखाई जाती है। जबकि गांधी अस्पताल की कुव्यवस्था की कहानी पहले ही कुख्यात हो चुकी है। अब देखना है कि राज्य सरकार कब तक तेलंगाना में गुणवत्तापूर्ण  चिकित्सकीय व्यवस्था कर पाती है। जबकि कोरोना मरीजों की तादाद दिन ब दिन बढती जा रही है।

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