रोहित वेमुला ने आज ही के दिन की थी खुदकुशी, जिगरी दोस्त रामजी ने इस तरह किया याद

17 Jan, 2021 17:57 IST|विजय कुमार
रामजी और रोहित वेमुला

हैदराबाद: प्रतिष्ठित युनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद (University of Hyderabad) में ठीक पांच साल पहले आज ही के दिन 17 जनवरी 2016 को पीएचडी छात्र रोहित वेमुला (Rohith Vemula) ने खुदकुशी कर ली थी। 26 वर्षीय दलित छात्र रोहित वेमुला की मौत से पूरा देश आंदोलित हुआ था। आत्महत्या से पहले रोहित वेमुला ने अपना सुसाइड नोट भी छोड़ा था जो बेहद मार्मिक है। रोहित के लिखे अंतिम पत्र का लब्बोलुआब ये था कि उन्हें सात महीनों से फेलोशिप की रकम नहीं मिली थी। इस चलते वे आर्थिक के साथ ही मानसिक दबाव में भी जी रहे थे। हालांकि रोहित ने अपने पत्र में बचपन में अकेलेपन का दंश भोगने की भी बात कही थी। उनकी अंतिम चिट्ठी में लिखी निजी बातों को गौण किया गया और बाकी चीजों पर जातिवाद को लेकर लंबी बहस शुरू हो गई। इस आत्महत्या को शैक्षणिक संस्थानों में जातिवाद का रंग दिया गया। वेमुला के परिवार ने भी सरकार के खिलाफ लंबा संघर्ष किया। साथ ही इस दौरान रोहित वेमुला के जिगरी दोस्त रामजी का खूब जिक्र हुआ।   

वेमुला ने अपने सुसाइड नोट में अपने जिगरी दोस्त रामजी का जिक्र किया था। वेमुला ने लिखा था कि उनके फेलोशिप के बकाये पैसे मिलने पर रामजी को चालीस हजार रुपए लौटा दिये जाएं, जिसे उन्होंने कर्ज के तौर पर लिया था। जाहिर है रोहित वेमुला और रामजी गहरे दोस्त हुआ करते थे। लिहाजा चिंतागदा रामजी को लगातार मीडिया के तमाम सवालों का सामना करना पड़ा था। रामजी 2016 में हैदराबाद यूनिवर्सिटी के अंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (ASA) के अध्यक्ष थे। जिसकी स्थापना सन् 1993 में की गई थी। वेमुला ने अपने सुसाइड नोट में लिखा था, “मुझे रामजी को 40 हजार लौटाने हैं। उन्होंने कभी वापस नहीं मांगे। लेकिन कृपया ये उन्हें जरूर लौटा दें...”

वेमुला का शव देख रामजी हुए थे भाव-शून्य

रामजी अपने जिगरी दोस्त रोहित वेमुला तो याद करते हुए बताते हैं कि जब उन्होंने डेड बॉडी देखी तो वे पूरी तरह भावशून्य हो गए। रामजी बताते हैं कि रोहित वेमुला ने हैदराबाद यूनिवर्सिटी के हॉस्टल से निकाले जाने के कारण ही जान दे दी। 3 जनवरी, 2016 को, पांच दलित छात्र नेताओं- दोंता प्रशांत, शेषैया चेमुडुगुंटा, सनकन्ना वेलपुला, विजय कुमार पेदापुडी और रोहित वेमुला को कथित तौर पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) के दबाव में हैदराबाद यूनिवर्सिटी के हॉस्टल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। दरअसल इन छात्रों का भारतीय जनता पार्टी से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कुछ नेताओं के साथ कथित तकरार को लेकर उन्हें दंडित करने की बात कही गई। फिर रोहित की आत्महत्या ने तो पूरे मामले को सियासी रंग दे दिया। हालांकि वेमुला ने अपने सुसाइड नोट में कहीं भी हॉस्टल से निकाले जाने का जिक्र नहीं किया, साथ ही ABVP छात्रों के साथ किसी तरह के तकरार का भी उल्लेख नहीं किया था। 

रोहित वेमुला के दोस्त रामजी 

रामजी अपने निकटतम दोस्त रोहित वेमुला के बारे में बताते हैं कि आखिरी दिनों में रोहित बेहद उदास नजर आते थे। उन्होंने अपने दोस्तों से खुद को अलग कर लिया था। रामजी के मुताबिक रोहित और उनकी दोस्ती तीन सालों तक चली। रोहित अक्सर रामजी से विभिन्न मसलों पर सलाह लेने आया करते थे। रामजी ने रोहित वेमुला को भाई जैसा बताया। दोनों ही कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के छात्र संगठन स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के सदस्य थे लिहाजा दोनों के बीच वैचारिक साम्यता थी। हालांकि साल 2014 में ही दोनों ने कम्युनिस्ट पार्टी छोड़कर ASA की स्थापना कर ली थी।  

दलित छात्रों का वाम और दक्षिणपंथियों के खिलाफ संघर्ष 

रामजी और रोहित वेमुला ने बाकी साथियों के साथ मिलकर अंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के बैनर तले हाशिए पर पड़े छात्रों को एकजुट करने की मुहिम चलाई। इनकी मेहनत के चलते ही ASA के नेतृत्व वाला पैनल 2014 में युनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव जीत गया। इस जीत से युनिवर्सिटी में पढ़ने वाले दलित छात्रों में खुशी की लहर थी। 

हालांकि दक्षिणपंथी और वामपंथी दोनों से मुकाबला करते हुए अंबेडकरवादी छात्रों को कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा था। रामजी के मुताबिक वेमुला अक्सर एबीवीपी छात्र नेताओं के द्वारा परेशान करने की बातें उठाया करते थे। कैंपस में झगड़ा करना और सोशल मीडिया पर बदनाम करने की कोशिश करने जैसी तकरार हुआ करती थी। 

रामजी बताते हैं कि केंद्र में 2014 में बीजेपी की सरकार बनने के बाद ABVP छात्रों की गुस्ताखियां और बढ़ गई। 2015 में एबीवीपी नेताओं ने वेमुला और चार अन्य ASA नेताओं पर मारपीट का आरोप लगाया था। घटना की लंबे समय तक चली प्रशासनिक जांच के बाद, पांचों को हॉस्टल से बाहर करने का फरमान सुना दिया गया। साथ ही इनके कैंपस में सार्वजनिक जगहों पर इकट्ठा होने पर भी पाबंदी लगा दी गई। साथ ही छात्र संघ चुनावों में हिस्सा लेने पर भी रोक लगा दी गई। ASA ने इसे दलितों के सामाजिक बहिष्कार के तौर पर लिया। 

वेमुला और बाकी साथियों ने 14 दिनों तक दिया था धरना 

युनिवर्सिटी में हो रही कथित नाइंसाफी के खिलाफ रोहित वेमुला और उनके बाकी साथियों ने कड़ाके की ठंड में 14 दिनों तक खुले में कैंपस में ही डेरा जमाए रखा। रामजी बताते हैं कि आत्महत्या से एक दिन पहले वेमुला बिना किसी को बताये चुपचाप धरना स्थल से चले गए थे। रामजी को अफसोस है कि अगर वे रोहित की तत्काल खोजबीन करते तो शायद उनकी जान बच जाती। इसको लेकर रामजी आज भी अपराध बोध से भर जाते हैं। 

वेमुला की मौत के बाद रामजी कई महीनों तक सदमें में रहे। शुरुआती दौर में तो मीडिया ने उनका पीछा किया, फिर तमाम मंचों से उनके लिए समर्थन की बातें कही जाती रहीं। रामजी इन चीजों से तंग आ चुके थे। उन्होंने काफी वक्त तक खुद को सार्वजनिक जीवन से काट लिया। सिर्फ खास दोस्तों से ही मिला करते थे। इसके बाद उन्होंने पढ़ाई पर ध्यान लगाया और साल 2017 में अपनी थीसिस पूरी कर ली। अगले ही साल 2018 में उन्हें पीएचडी की उपाधि भी मिल गई। 
 

Load Comments
Hide Comments
More News
आंध्र-प्रदेश
मुख्य समाचार
.