मिल्खा सिंह के नाम पर रखा गया कॉलोनी का नाम, सम्मान देने की पहल

1 Jul, 2020 20:10 IST|Sakshi
मिल्खा सिंह कॉलोनी

सिकंदराबाद में है मिल्खा सिंह के नाम की कॉलोनी

यहां मिल्खा सिंह ने अपने जीवन के सुनहरे दिन गुजारे थे 

मिल्खा सिंह ने कहा कि उनकी सफलता की कहानी यहीं से शुरू हुई थी 

हैदराबाद: सिकंदराबाद छावनी क्षेत्र में ईएमई सेंटर के शांत वातावरण में मिल्खा सिंह कॉलोनी के अस्तित्व के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। महान एथलीट मिल्खा सिंह के नाम पर किया गया है इस कॉलोनी का नामकरण। इस जगह का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि यहीं मिल्खा सिंह ने कई दिन गुजारे थे और उनकी महानता के चैप्टर यहीं लिखे गए थे। 

यहां वह हर सुबह अपने बैरक से दौड़ लगाते जो छावनी क्षेत्र में है। चंडीगढ़ के फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह कहते हैं कि ,“ मुझे बहुत खुशी है कि इन्होंने मेरे नाम पर एक कॉलोनी का नाम रखा है।"

भावुक होते हुए, 90 वर्षीय मिल्खा सिंह कहते हैं कि उनके मन में सिकंदराबाद और हैदराबाद की बहुत अच्छी यादें बसी हैं। उन्होंने कहा कि "जब मैं ईएमई सेंटर में भर्ती हुआ था तब मैं 1952 से 1960 तक सिकंदराबाद में ही था।" मिल्खा सिंह ने कहा कि सिकंदराबाद कैंटोनमेंट में बिताए दिनों ने उनकी मदद की और यहीं रहकर वे  एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने में सफल हुए। 

उन्होंने कहा, कि “वहां रहकर ही मैंने कड़ी मेहनत की  और एक एथलीट के रूप में विकसित हुआ। इसकी नींव वहीं रखी गई थी। मुझे अभी भी ईएमई सेंटर याद है। ईएमई सेंटर के पास एक पहाड़ी (अम्मुगुड़ा पहाड) थी जहाँ एक मस्जिद थी। मैं सेना की टुकड़ी के साथ अपनी पीठ पर पत्थर से भरा बैग लेकर पहाड़ी पर चढ़ता था। यह मूल रूप से मेरी सहनशक्ति, शक्ति और मांसपेशियों में सुधार करने के लिए था ।”

मिल्खा सिंह ने खुलासा किया कि वह एक ट्रेन के साथ दौड़ते थे, जो मीटर गेज पर बोलारम और अम्मुगुडा के बीच चलती थी। “एक विशेष ट्रेन के लोको पायलट मुझे बहुत प्रोत्साहित करते थे और चिल्लाते थे सिंह चले आओ .. सिंह चले आओ। यह एक प्रेरणा थी और मैं अधिक दूरी तक दौड़ सकता था। इस तरह, इसने मुझे अपनी गति और धीरज को सुधारने में मदद की।

जब मैं क्रॉस कंट्री कर रहा था तो मैं जंगल के इलाकों में घूमता था और इसलिए मुझे पूरा ईएमई सेंटर याद था। मैं गर्व से कहूंगा कि मेरी सफलता का पूरा श्रेय सेना, ईएमई और सिकंदराबाद छावनी को जाना चाहिए।

शायद, मैं सेना में शामिल नहीं हुआ होता तो इतनी मेहनत नहीं करता। अगर आज मुझे मिल्खा सिंह के नाम से जाना जाता है या मैंने देश का गौरव बढ़ाया है, तो यह सेना और ईएमई केंद्र के कारण ही हो पाया है। मैं इन यादों को कभी नहीं भूल सकता, ”उन्होंने कहा,“ मैं बोलारम में कपड़े और अन्य घरेलू सामान खरीदता था। ”

मिल्खा सिंह इस बात से खुश हैं कि ईएमई सेंटर में उनके नाम पर एक स्टेडियम का नाम रखा गया है। “मुझे ईएमई सेंटर में मिल्खा सिंह स्टेडियम में आने की खुशी है, जहां मैंने 1952-53 में प्रशिक्षण लिया था, जिसका मैंने कुछ साल पहले उद्घाटन किया था। मैं सिकंदराबाद को नहीं भूल सकता। ”

मिल्खा के बेटे जीवन मिल्खा सिंह, एक गोल्फर है, जब इस कॉलोनी के बारे में उन्हें बताया गया, तो उन्होंने कहा: “बहुत बढ़िया। राष्ट्र के लिए उन्होंने जो किया है, मुझे उस पर बहुत गर्व है। ”

इसे भी पढ़ें : 

अभी एक दिन में हो पा रहे हैं केवल 5 हजार कोरोना टेस्ट, मंत्री जी कर रहे हैं सबकी टेस्टिंग का दावा

तेलंगाना : अगस्त के दूसरे सप्ताह में हो सकती है एमसेट के साथ अन्य प्रवेश परीक्षाएं​

Load Comments
Hide Comments
More News
आंध्र-प्रदेश
मुख्य समाचार
.