तेलंगाना में बनेगा देश का सबसे लंबा Bypass, पलक झपकते किसी भी कोने से पहुंच सकते हैं हैदराबाद

28 Feb, 2021 14:05 IST|अनूप कुमार मिश्रा
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रीजनल रिंग रोड से होगा फायदा

राज्य के सभी जिले सीधे हैदराबाद से जुड़ेंगे

केंद्रीय मंत्री से क्षेत्रीय रिंग रोड के काम में तेजी लाने की अपील

हैदराबाद : तेलंगाना (Telangana) के सभी जिलों को राजधानी हैदराबाद (Hyderabad) से जोड़ने का प्रयास अब रंग ला रहा है। सब ठीक रहा तो राज्य में भारत के सबसे लंबे बाईपास का काम जल्द शुरू हो जाएगा। इस क्षेत्रीय रिंग रोड (रीजनल रिंग रोड) से न सिर्फ दूर-दराज से हैदराबाद आने वालों की तकलीफ कम होगी, बल्कि रोजगार और व्यापार के अवसर भी बढ़ेंगे।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी ने सोमवार को केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से हैदराबाद के आसपास प्रस्तावित क्षेत्रीय रिंग रोड (आरआरआर) के काम में तेजी लाने का आग्रह किया है। किशन रेड्डी के साथ भाजपा उपाध्यक्ष डीके अरुण और पार्टी के ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष एल लक्ष्मण ने इस संबंध में ज्ञापन सौंपने के लिए नई दिल्ली में गडकरी से मुलाकात की थी।

जी. किशन रेड्डी, जो सिकंदराबाद से सांसद हैं, उन्होंने गडकरी से आरआरआर के लिए दो पीआईयू (परियोजना कार्यान्वयन इकाई) को मंजूरी देने पर विचार करने का आग्रह किया। किशन रेड्डी के अनुसार, गडकरी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया है कि राज्य सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज गति से पूरा होने के साथ ही परियोजना पर काम तेज किया जाएगा।

देश का सबसे लंबा बाईपास होगा

तेलंगाना में प्रस्तावित रीजनल रिंग रोड की लंबाई लगभग 340 किलोमीटर होगी, जो देश का सबसे लंबा बाईपास होगा। इस परियोजना की कुल लागत 16,003 करोड़ रुपये आएगी। यह बाईपास तेलंगाना के सभी जिलों को सीधा राजधानी से जोड़ेगा। क्षेत्रीय रिंग रोड को सांगारेड्डी, नरसापुर, तोपरान, गजवेल, जगदेवपुर, भोंगीर, चौटुप्पल, इब्राहिमपट्नम, चेवेल्ला और शंकरपल्ली से जोड़ते हुए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा।

समय के साथ होगी पैसों की बचत

इस परियोजना से राज्य की बड़ी आबादी को सीधे तौर पर लाभ पहुंचने की उम्मीद है। आरआरआर, यदाद्री जैसे पर्यटक स्थानों को कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। एक बार जब इस परियोजना का निर्माण एक्सेस कंट्रोल एक्सप्रेसवे के रूप में हो जाएगा तो वाणिज्यिक और गैर-वाणिज्यिक वाहनों के लिए यात्रा के समय के साथ ही ईंधन के मामले में भी काफी बचत होगी। 

परियोजना मार्ग के आसपास कई औद्योगिक क्लस्टर, आईटी केंद्र, लॉजिस्टिक पार्क, फार्मा उद्योग, मनोरंजक सुविधाएं आदि स्थापित होने की उम्मीद है, जो तेलंगाना की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा। परियोजना पूरी होने पर इससे जुड़ी अन्य सड़क एवं लिंक मार्गों की स्थिति में भी सुधार होगा, जो यात्रा दूरी और समय को कम करेगा।

दो हिस्सों में होगा तैयार

रीजनल रिंग रोड को दो हिस्सों में तैयार किया जाएगा। पहला 158 किमी का उत्तरी भाग, जिसमें संगारेड्डी, नरसापुर, टूप्रान, गजवेल, यदाद्रि, प्रज्ञापुर, भोंगिर और चौटुप्पल को जोड़ने के लिए 7,560 करोड़ रुपये की लागत आएगी। दूसरा 182 किमी का दक्षिणी भाग होगा, जो चौटुप्पल, इब्राहिमपट्नम को जोड़ने वाले दक्षिणी भाग को कवर करते हुए, कंडुकुर, अमंगल, चेवेल्ला, शंकरपल्ली और संगारेड्डी को जोड़ेगा। इसकी लागत 4,322 करोड़ रुपये और भूमि अधिग्रहण के लिए 1,748 करोड़ रुपये आएगी।

2017 में उठी थी रीजनल रिंग रोड की मांग

मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने 2017 में इस मेगा परियोजना का प्रस्ताव रखा था और राज्य सरकार ने केंद्र को आवश्यक प्रस्ताव भेजकर परियोजना के लिए अनुमति और धन की मांग की थी। मुख्यमंत्री के अलावा, कई मंत्रियों और सांसदों ने लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य केंद्रीय मंत्रियों के साथ इस परियोजना पर चर्चा की थी।

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