तेलंगाना के सीमांत क्षेत्रो में हुआ मुर्गों की लड़ाई का आयोजन, करोड़ों रुपये के सट्टे का अनुमान

16 Jan, 2021 20:30 IST|के. लक्ष्मण
कॉन्सेप्ट फोटो

पुलिस से खुद को बचते बचाते गंतव्य स्थान तक पहुंचे शौकीन

एक मुर्गे की लड़ाई के लिए वसूले गये 200 से 500 रुपये

हैदराबाद : तेलंगाना (Telangana) के वरंगल (Warangal) और खम्मम (Khammam) संयुक्त जिलों के साथ हैदराबाद (Hyderabad) के सीमांत क्षेत्रों में पिछले तीन दिनों तक मुर्गों की लड़ाई (Cock Fight) का आयोजन होता रहा। हालांकि सरकार ने मुर्गों की लड़ाई पर पाबंदी लगाई है। इसके बावजूद पुलिस को चकमा देकर चोरी-छुपे मुर्गों की लड़ाई का आयोजन हुआ। सूत्रों के मुताबिक इस बार संक्रांति पर कई शौकिनों ने लगभग सौ करोड़ का सट्टा खेला। 

इस बार संक्रांति पर अनेक कारणों के चलते हैदराबाद के साथ अन्य जिलों से आंध्र प्रदेश जानेवालों की संख्या कम हुई। कोरोना वायरस के संक्रमण, बर्ड फ्लू, मुर्गों की लड़ाई के दौरान उपयोग में लाये जानेवाले चाकू बनाने और बिक्री करनेवाले अड्डों पर पुलिस ने छापे मारे। इससे मुर्गों की लड़ाई में शामिल होने के लिए आंध्र प्रदेश जाने वालों की संख्या 20 फीसदी कम हो गई। 

मुर्गों की लड़ाई के आयोजन पर रोक होने के बावजूद कानून से बचते-बचाते तेलंगाना में मुर्गों की लड़ाई का आयोजन किया गया। संयुक्त वरंगल जिले के वरंगल अर्बन, वरंगल ग्रामीण, भुपालपल्ली, मुलुगु, संयुक्त खम्मम जिले में सीमांत क्षेत्रों भद्राचलम एजेंसी एरिया, दम्मायगुड़ेम, मारायगुड़ेम और हैदराबाद जिले के सीमांत जिलों रंगारेड्डी और मेडचल में अलग-अलग जगहों पर मुर्गों की लड़ाई का आयोजन किया गया। इसेक लिए विशेष व्यवस्था की गई। शौकीनों के पास से पार्किंग के साथ एंट्री फीस भी वसूली गई। इसका आयोजन पब की तरह किया गया। आयोजकों की ओर से शौकीनों के हाथों पर विशेष निशान बनाये गये और मुर्गों की लड़ाई देखने की अनुमति दी गई। कई जगहों पर तो मुर्गों की लड़ाई के आयोजन से यातायात बाधित हुआ। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मुर्गों की लड़ाई का आयोजन किस स्तर तक हुआ। 

चेक पोस्ट के निकट लगाये गये थे पोस्टर्स
पुलिस ने चेक पोस्ट के निकट लगाये गये पोस्टरों को देखते हुए राज्य में मुर्गों की लड़ाई का आयोजन करनेवाले क्षेत्रों की पहचान की। इसे रोकने ले लिए व्यूह बनाया। मार्ग पर तात्कालिक तौर पर चेक पोस्ट बनाये और वाहनों की तलाशी लेते रहे। पुलिस ने बुधवार की सुबह से ही वाहनों की  तलाशी का अभियान शुरू किया था। तलाशी के दौरान मुर्गे, नकदी बरामद कर कई आरोपियों को हिरासत में लिया। कुछ शौकीनों को जब पता चला कि तात्कालिक चेक पोस्ट पर वाहनों की तलाशियां ली जा रही है तो उस क्षेत्र को छोड़ अन्य क्षेत्रों से होते हुए अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचे। शौकिनों के पास आयोजक ने एक मुर्गे की लड़ाई के लिए 200 से 500 रुपये वसूले। पुलिस से बचते-बचाते शौकिनों को मुर्गों
की लड़ाई वाले स्थान तक पहुंचाया। वे चेक पोस्ट प्वाइंट से पहले कुछ दूरी पर खड़े रहकर वाहनों के नंबरों की पहचान करते और उन्हें चेक पोस्ट पर तलाशी की जानकारी देते हुए उनके पास से नकदी और मुर्गे ले लेते। इसे फिर अपने तौर-तरीके से गंतव्य स्थान तक पहुंचाते। कुल मिला कर मुर्गों की लड़ाई का आयोजन का धूंद शौकिनों में छाई रही। 

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छत्तीसगढ़ के मारायगुड़ेम के निकट मुर्गों की लड़ाई की जगह के पास कार पार्किंग 
आपको बता दें कि पुलिस ने मुर्गों लड़ाई पर रोक लगाने के उद्देश्य से दुम्मुगुड़ेम क्षेत्र के पेद्दा बंडीरेपु गांव में तलाशी अभियान चलाया और 13 लोगों को हिरासत लिया। साइबराबाद पुलिस आयुक्तालय क्षेत्र के मियापुर में पुलिस ने 4 लोगों को पकड़ा। 

मुर्गों की लड़ाई के आयोजन पर रोक होने के बावजूद आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के सीमांत क्षेत्रों में मुर्गों की लड़ाई का जश्न होता रहा। भद्राचलम एजेंसी क्षेत्र के दुम्मुगुड़ेम मंडल, सीमावर्ती क्षेत्र छत्तीसगढ़ के मारायगुड़ेम में खुले आम मुर्गों की लड़ाई का आयोजन किया गया। भद्राचलम और आसपास के क्षेत्रों में मुख्य सूत्रधार के सहयोग से मुर्गों की लड़ाई का आयोजन होता रहा। दुम्मुगुड़ेम मंडल के कुछ ग्रामों में पुलिस की नजर बचाकर मुर्गों की लड़ाई का आयोजन किया गया। आयोजकों ने जुआ, तीन पत्ते, गुंड्राटा और बोम्मा बोरुसु खेल का आयोजन भी किया। इस सट्टे में कई शौकिनों ने हजारों रुपये गंवाये। खाली जेब से घर लौटे। 

आश्वारावपेट, दम्मापेट, मुलकलपल्ली मंडल के आनुकुनी, आंध्र प्रदेश के ओलुगुमिल्ली, चिंतलापुड़ी, कुकुनुरु, वेलेरुपा़डु मंडलों के सीमांत क्षेत्रों को पार कर अन्य क्षेत्रों में मुर्गों की लड़ाई का आयोजन किया गया। हैदराबाद के एक मुर्गों की लड़ाई देखने और सट्टा लगाने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि मुर्गों की लड़ाई चाहे किसी भी स्तर की हो, इसके आयोजन का लक्ष्य पैसा ही होता है। कोई खुशी के लिए सट्टा लगाते है। उसने कहा कि हर रोज की भागदौड़ की जिंदगी इस बार कोरोना वायरस से प्रभावित हुई। पूरा साल कोरोना संक्रमण में ही गुजर गया। इससे इस बार अवसर नहीं मिला तो वह अपने परिवार के साथ भुपालपल्ली गया। इससे पहले उसने पुराना शहर के बराकास में मुर्गे खरीदे। पुलिस की नजर
से छुपते-छुपाते स्थानीय कुछ युवकों ने मुर्गों को ले जाने में सहयोग दिया। 

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