कादंबिनी क्लब की 339वीं मासिक गोष्ठी सम्पन्न, वक्ताओं ने दिया यह संदेश

20 Oct, 2020 21:54 IST|के. राजन्ना
कादंबिनी क्लब की गोष्ठी में भाग लेते साहित्यकार

कादंबिनी क्लब का मंच अंतरराष्ट्रीय रचनाकारों से परिचित

देहरादून, कोलकाता, बेंगलुरु और दिल्ली से साहित्यकारों ने भाग लिया 

हैदराबाद : कादंबिनी क्लब हैदराबाद के तत्वाधान में क्लब की 339वीं मासिक गोष्ठी का ऑनलाइन आयोजन संपन्न हुआ। प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी देते हुए डॉ अहिल्या मिश्र क्लब अध्यक्ष एवं मीना मुथा कार्यकारी संयोजिका ने आगे संयुक्त रूप से बताया कि इस अवसर पर गोष्ठी की अध्यक्षता डॉ ऋषभ देव शर्मा ने की। शूभ्रा महंतो द्वारा निराला रचित सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी गई। 

डॉ अहिल्या मिश्र ने स्वागत भाषण में कहा कि परंपरा अनुसार हम अब कुछ समय से कार्यक्रम का आयोजन नहीं कर पा रहे हैं लेकिन इस आभासी तकनीक के माध्यम से गोष्ठी निरंतर प्रतिमाह करने में सफल हो पा रहे हैं। यह संतोष की बात है। आज भी देहरादून, कोलकाता, बेंगलुरु और दिल्ली से साहित्य प्रेमी गोष्ठी में भाग ले रहे हैं। उनका भी ह्रदय से स्वागत करते हैं। 

तत्पश्चात स्वर्गीय भीकमचंद जी पोकरणा के दुखद निधन पर क्लब की ओर से मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। प्रथम सत्र का संचालन करते हुए प्रवीण प्रणव ने कहा कि आज राष्ट्रीय रचनाकार पत्रकार प्रतिभा कटियार (देहरादून), रूसी कवयित्री मारीना त्स्वेतायेवा से हमें परिचित कराएगी। कादंबिनी क्लब का मंच अंतरराष्ट्रीय रचनाकारों से परिचित होने में गौरव की अनुभूति करता है। 

प्रतिभा कटियार ने कहा कि मरीना से गहरी दोस्ती और उनके विशाल संघर्षपूर्ण जीवन को आज सभी के साथ साझा करना चाहूंगी। न मुझे रूसी आती है न उनकी रचनाओं के अधिक अनुवाद ही हुए। बस उनसे मेरा प्रेम ही उन्हें जानने की उत्सुकता को बढ़ाता गया। भाषा को जानना व्यक्ति को जानने के लिए आवश्यक होना ज़रूरी नहीं है। प्रेम करना अलग और रिसर्च करना अलग है। मरीना के साथ उनका प्रेम उन्हें जानने की ओर अग्रसर किया। 

उन्होंने कहा कि मरीना जरूरत से ज्यादा संवेदनशील थीं। विद्वान पिता में लुकाछिपी और शरारत करने वाला पिता कहीं छूट गया था। कम उम्र में कच्चा प्रेम विवाह में तब्दील हुआ। दो बेटियों की मां मरीना ने भूख और विववशता की परिस्थितियों में भी अपनी कलम का साथ नहीं छोड़ा। उनके लिए लिखना ही जीवन था। 

उन्होंने कहा कि आज के रचनाकार के पास काफी सहूलियतें पर मरीना ने विपरीत परिस्थितियों में भी पर्चियों का ढेर लगा दिया। वह हालातों को जीती थीं और शब्दबद्ध तो करती थी। असमय बेटी को खोना जैसी परिस्थिति ने बहुत कुछ अनुभव मरीना को दिए। इस अवसर पर प्रतिभा कटियार ने मरीना के डायरी के कुछ अंश प्रस्तुत किए जिसे सभी ने सराहा। 

डॉक्टर अहिल्या मिश्र ने रशियन रचनाकार का संक्षिप्त समय में विस्तृत परिचय कराने के लिए प्रतिभा कटियार के प्रति आभार प्रकट किया। प्रवीण प्रणव ने कहा कि प्रतिभा जी ने उनकी कविताओं का अनुवाद कर एक कंपलीट पैकेज के रूप में हमें दे दिया है। अब निश्चित ही इसे पढ़ने की उत्सुकता बढ़ गई है। प्रतिभा ने अपनी एक रचना का काव्य पाठ भी किया। 


 

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