तेलंगाना में धरणी पोर्टल शुरू, KCR ने कहा-देश के लिए एक ट्रेंड सेटर बनेगा

29 Oct, 2020 10:10 IST|के. राजन्ना
धरणी पोर्टल का शुभारंभ करते हुए सीएम केसीआर और अन्य

कृषि भूमि पंजीकरण करेगा 'धरणी पोर्टल'

किसानों के लिए ये सेवाएं आज से उपलब्ध

हैदराबाद :  मुख्यमंत्री कल्वकुंटला चंद्रशेखर राव ने गुरुवार दोपहर राज्य सरकार के सबसे महत्वाकांक्षी 'धरणी पोर्टल' का शुभारंभ किया। पोर्टल का उद्देश्य राजस्व सेवाओं को आसानी से और पारदर्शी रूप से प्रदान करना है। धरनी पोर्टल के शुभारंभ से पहले सीएम केसीआर ने विशेष पूजा-अर्चना की।

इस मौके पर मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने कहा है कि राज्य सरकार का प्रतिष्ठित धरणी पोर्टल  भारतवर्ष के लिए एक ट्रेंड सेटर बनेगा। उन्होंने कहा कि लोगों की पूरी जिन्दगी जमीन के इर्द-गिर्द कट जाया करती थी और एक वक्त ऐसा भी था लोगों में जमीन की कोई अहमियत नहीं थी। हालांकि एक पद्धति के तहत मनुष्य के खेती करना सीखने के बाद ही जमीन की कीमत बढ़ी है।  उन्होंने कहा कि पिछली सरकारें राजस्व कानून और भूमि नीति लेकर आए थीं, लेकिन उनमें कुछ कारगर साबित हुए और कुछ का दुष्प्रभाव देखने को मिला। कुछ से लोगों को फायदा मिला, जबकि कुछ से नुकसान भी झेलना पड़ा।

सीएम  ने कहा कि इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए राज्य के किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो इसी उद्देश्य से उनकी सरकार ने  नया राजस्व कानून लाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि एक गलती पर उसका खामियाजा कई पीढ़ियों को भुगतना पड़ता है। इसीलिए किसी भी तरह की अनियमितता को मौका दिए बिना टीआरएस सरकार सख्त फैसले लेते हुए आगे बढ़ रही है।

सीएम ने कहा कि एक समय जमीन केवल उत्पादन का साधन हुआ करती थी। सिंचाई में आए बदलाव की वजह से वह संपत्ति बन गई। किसानों की जमीनों की रक्षा के लिए धरणी पोर्टल बनाया  गया है। एक करोड़ 45 हजार एकड़ जमीनों का रिकॉर्ड्स इस धरणी पोर्टल में उपलब्ध रहेंगे। विदेश में रह रहे लोग भी यहां अपनी जमीनों का रिकार्ड्स इस पोर्टल के जरिए देख सकेंगे।

उन्होंने कहा कि धरणी पोर्टल के बाद अवैध रजिस्ट्रेशन की गुंजाइश नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि गलती करने का अधिकार उन्हें नहीं है, क्योंकि एक गलती होने पर उसका खामियाजा भावी पीढ़ियों को भुगतना पड़ता है। उन्होंने कहा कि लोग अब मी-सेवा, धरणी पोर्टल तथा व्यक्तिगत रूप से राजस्व कार्यालय पहुंच कर अपनी जमीनों का पंजीकरण करवा सकेंगे। 

इससे पूरे तेलंगाना में 570 क्षेत्रों (हैदराबाद जिले को छोड़कर) में किसानों के लिए ये सेवाएं आज से उपलब्ध हो गई हैं। राज्यभर में अब तक जारी किए गए 59.46 लाख खाते और 1.48 करोड़ एकड़ भूमि का पंजीकरण किया जाएगा। उसके बाद लंबित पार्ट बी श्रेणी की जमीनों पर सरकार को फैसला लेना है।

सरकार ने भूमि अधिकार और पास बुक्स एक्ट-2020 (आरओआर) शक्तियों में कटौती करके इसे बनाया है। सालों से चले आ रहे मैनुअल रिकॉर्ड पर भी विराम लगाया दिया है। अब सरकार ने डिजिटल आधारित भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन पर शिकंजा कस दिया है।

कहा जा रहा है कि इसके जरिए तेलंगाना सरकार ने भ्रष्टाचार का अड्‍डा बन चुके राजस्व विभाग में आमूल परिवर्तन करने के संकल्प लिया है। इसी क्रम में आरओआर-1971 के स्थान पर एक नया कानून लेकर आई है। इस कानून के चलते राजस्व विभाग में किसानों का काम काफी आसानी से हो जाएगा। 

इससे पहले आरोप है कि पहाणी (जमीन का रिकॉर्ड व भूलेखों ) की जरूरत हो तो बिना रिश्वत दिये काम नहीं होता था। अब सरकार मानना है कि धरणी पोर्टल से किसी को भी रिश्वत देनी नहीं पड़ेगी। अब कोई भी कहीं पर भूमि संबंधी रिकॉर्ड धरणी पोर्टल में ऑनलाइन में देख सकता है।

सरकार ने ग्रामीण स्तर पर वीआरओ प्रणाली को समाप्त कर दिया। अब आरडीओ केवल नाम मात्र के अधिकारी रह गये हैं। इसके साथ ही राजस्व विभाग में मंडल, जिला और प्रदेश स्तर के विभाग की सक्रिय रहेंगे।

मेड्चल जिले के मूडुचिंतलपल्ली गांव में आयोजित इस शुभारंभ समारोह में सरकार के मुख्य सचिव सोमेश कुमार, जिलाधीश वेंकटेश्वर, मंत्री मल्लारेड्डी, पार्टी के नेता और राजस्व अधिकारी उपस्थित थे।

Load Comments
Hide Comments
More News
आंध्र-प्रदेश
मुख्य समाचार
.