IPL 2020: चेन्नई सुपर किंग्स के शर्मनाक प्रदर्शन की 3 बड़ी वजह

24 Oct, 2020 00:33 IST|Sakshi

शारजाह :  इंडियन प्रीमियर लीग  के 13वें सीजन में चेन्नई सुपर किंग्स का प्रदर्शन काफी ज्यादा निराशाजनक रहा। सीएसके की टीम IPL के इस सीजन में अब तक 11 मैच खेले  हैं इनमें से उसे  सिर्फ 3 ही मैचों में जीत मिल पाई है। इन तीनो मैचों में जीत के साथ प्वाइंट टेबल में में अंतिम पायदान पर है। चेन्नई सुपर किंग्स का प्लेऑफ में जगह बना पाना काफी मुश्किल नजर आ रहा और कोई चमत्कार ही टीम को अंतिम 4 तक पहुंचा सकता है।

चेन्नई सुपर किंग्स IPL इतिहास की इकलौती ऐसी टीम रही है, जोकि हर बार प्लेऑफ में पहुंची है। हालांकि यह पहला मौका नजर आ रहा है, जब टीम अंतिम 4 में नहीं पहुंच पाएगी। टूर्नामेंट की शुरुआत उन्होंने जीत के साथ की थी, लेकिन उसके बाद टीम को लगातार कई मैचों में हार का सामना कर पड़ा।

रैना और भज्जी का रिप्लेसमेंट ना लेना
IPL के 13वें सीजन की शुरुआत से पहले ही चेन्नई सुपर किंग्स को दो बड़े झटके लगे और टीम के दो मुख्य खिलाड़ी सुरेश रैना और हरभजन सिंह ने टूर्नामेंट से अपना नाम वापस ले लिया था। चेन्नई सुपर किंग्स की सफलता में खासकर पिछले दो सीजन में इन दोनों खिलाड़ियों का अहम योगदान रहा है और इनके नहीं रहने से टीम को जरूर झटका लगा। हालांकि सीएसके के पास मौका था कि वो इन खिलाड़ियों का रिप्लेसमेंट ले पाए, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और कही न कहीं उसका नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।

सीनियर्स का लचर प्रदर्शन
चेन्नई सुपर किंग्स में हार में दूसरी बड़ी वजह यह है कि  ज्यादातर खिलाड़ी 30 साल से ऊपर के खिलाड़ी हैं । हालांकि टीम को अगर युवा खिलाड़ी होते हैं, तो शायद टीम बेहतर प्रदर्शन कर पाती। शेन वॉटसन, अंबाती रायडू, एमएस धोनी, केदार जाधव, पीयूष चावला यह ऐसे खिलाड़ी रहे जिन्हें प्लेइंग इलेवन में लगातार मौके मिले, लेकिन प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा। इसके अलावा टीम ने जिन युवा प्लेयर्स को मौका दिया वो भी इसका फायदा उठाने में कामयाब नहीं हुए। इसी वजह से धोनी को वापस सीनियर प्लेयर्स के पास ही वापस जाना पड़ा।

इस सीजन में टीम के लिए बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे धोनी
सीएसके की सबसे बड़ी ताकत कप्तान माही हैं। धोनी अपनी कप्तानी में चेन्नई सुपरकिंग्स को तीन बार खिताब जिता चुके हैं। तीनों बार धोनी का बल्ला जमकर बोला है। लेकिन इस साल धोनी का प्रदर्शन बल्ले के साथ तो खराब रहा ही है और इसका असर उनकी कप्तानी में भी देखने को मिला। इस साल खेले गए 11 मैचो में  सिंह धोनी ने 25.71 की औसत और 122.44 के स्ट्राइक रेट से 180 रन बनाए। इस बीच उनके बल्ले से कोई अर्धशतक नहीं निकला। धोनी की बैटिंग में मैच प्रैक्टिस की कमी दिखाई दी और अगर वो अच्छा करते, तो निश्चित ही सीएसके की स्थिति काफी बेहतर हो सकती थी।

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