पीवी नरसिम्हा राव की बेटी सुरभि वाणीदेवी पर इसलिए KCR ने खेला है दांव, बड़ी रणनीति का हिस्सा

22 Feb, 2021 18:00 IST|संजय कुमार बिरादर
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हैदराबाद : तेलंगाना राष्ट्र समिति के प्रमुख व तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने हैदराबाद-रंगारेड्डी-महबूबनगर ग्रैजुएट्स एमएलसी चुनाव के लिए पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की बेटी सुरभि वाणीदेवी को पार्टी की उम्मीदवार घोषित कर सभी को चौंका दिया था। यह केसीआर की दूरगामी चुनावी रणनीति का हिस्सा है। इसके पीछे कई कारण गिनाए जा सकते हैं।

दरअसल, केसीआर द्वारा हैदराबाद-रंगारेड्डी-महबूबनगर ग्रैजुएट्स एमएलसी चुनाव के लिए पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव की बेटी को टीआरएस की उम्मीदवार बनाए जाने के पीछे कई खास वजहें बताई जा रही हैं, जिन पर लोग चर्चा कर रहे हैं। 

पहला कारण

पिछले कुछ वर्षों से तेलंगाना में कांग्रेस पार्टी की स्थिति दिनों-दिन बदतर बनती जा रही है और पार्टी के कई नेता अन्य राजनीतिक दलों का दामन थाम रहे हैं। कांग्रेस के ज्यादातर नेता भारतीय जनता पार्टी की तरफ रुख कर रहे हैं। सीएम केसीआर ने तेलंगाना में टीआरएस का विकल्प बनने की जुगत में जुटी भाजपा की ओर जा रहे कांग्रेस के वोट बैंक को अपनी तरफ मोड़ने के लिए ये पैंतरा चला है। 

दूसरा कारण

यही नहीं, केसीआर ने पिछले साल पूरे राज्य में पीवी शतजयंती मनाने का ऐलान किया था। केसीआर पहले से कहते रहे हैं कि कांग्रेस पार्टी ने पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के साथ अच्छा सलूक नहीं किया। तेलंगाना के लाल को जो महत्व व सम्मान राष्ट्रीय स्तर पर मिलना चाहिए था वह नहीं मिला। वह पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव को भारत रत्न देने की मांग कर चुके हैं। इसके लिए बाकायदा तेलंगाना विधानसभा से सितंबर 2020 में प्रस्ताव पास करके मोदी सरकार को भेजा था।  

तीसरा कारण

टीआरएस प्रमुख ने अब पीवी नरसिम्हा राव की बेटी सुरभि वाणीदेवी को एमएलसी चुनाव में पार्टी की उम्मीदवार बनाकर लोगों में ये संकेत भेजना चाहते हैं कि पीवी नरसिम्हा राव की विरासत को आगे बढ़ाने का काम कांग्रेस ने भले नहीं किया है, लेकिन अब टीआरएस उनके काम व परिवार को आगे बढ़ाने का काम करेगी और उनको सम्मान दिलाने की कोशिश करेगी। ये कहना भी गलत नहीं होगा कि केसीआर पीवी नरसिम्हा राव के समुदाय के वोटों को टीआरएस की तरफ खींचना चाहते हैं। यह उनकी बड़ी चुनावी रणनीति का हिस्सा है।

चौथा कारण

टीआरएस के सत्ता में आने के बाद से शिक्षित युवाओं के लिए रोजगार के अवसर मुहैया नहीं कराने और बेरोजगारी भत्ता नहीं दिए जाने को लेकर युवाओं में व्याप्त नाराजगी को देखते हुए केसीआर ने ये सोचकर सुरभि वाणीदेवी को उम्मीदवार बनाया है कि ऐसे करने से पार्टी को सहानुभूति मिलेगी, क्योंकि शिक्षित युवाओं के लिए रोजगार के अवसर नहीं दिए जाने से सरकार के प्रति खासे नाराज चल रहे हैं। 

पांचवां कारण

हैदराबाद-रंगारेड्डी और महबूबनगर में टीआरएस की स्थिति उतनी मजबूत नहीं है और ये बात हाल के जीएचएमसी चुनाव के नतीजों से साफ हो चुकी है। ऐसे में एमएलसी चुनाव में टीआरएस की जीत नामुमकिन लगते देखकर ही केसीआर ने सुरभि वाणीदेवी को अपना उम्मीदवार बनाया है ताकि लोगों को ये बता सके कि उन्होंने पीवी नरसिम्हा राव की बेटी को एमएलसी चुनाव में पार्टी की उम्मीदवार बनाया था। हालांकि हैदराबाद-रंगारेड्डी-महबूबनगर ग्रैजुएट्स एमएलसी चुनाव उतना आसान नहीं हैं, क्योंकि इस बार इन तीनों जिलों में टीआरएस को भाजपा टक्कर देने की स्थिति में नजर आ रही है। यही नहीं, टीआरएस की नीतियों से नाराज चल रहे युवाओं के इस बार भाजपा की तरफ जाने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में टीआरएस के लिए ये चुनाव जीतना उतना आसान नहीं है जितना वह सोच रही है।

छठवां कारण

केसीआर के सुरभि वाणीदेवी को पार्टी की उम्मीदवार बनाने के पीछे एक और खास वजह हो सकती है। हैदराबाद-रंगारेड्डी-महबूबनगर ग्रैजुएट्स एमएलसी चुनाव में भाजपा उम्मीदवरा रामचंद्र राव को कड़ा टक्कर देने के उद्देश्य से केसीआर ने सुरभि वाणीदेवी को उम्मीदवार बनाया है। गौरतलब है कि यहां दोनों पार्टियों के उम्मीदवार सवर्ण होंगे। केसीआर का ये भी मानना हो सकता है कि पीवी नरसिम्हा राव की बेटी सुरभि वाणीदेवी को पार्टी की उम्मीदवार बनाने से सरकार का विरोध कर रहे युवाओं को उनसे कोई सवाल पूछने का मौका ही नहीं मिलेगा।

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