चक्रवाती तूफानों के लिए फॉलो किया जाता है यह नेम गेम सिस्टम, 13 देश करते हैं फैसला

25 Nov, 2020 11:38 IST|सुषमाश्री
क्या है तूफानों का नेम गेम

तूफानों का नेम गेम, हर देश को देने होते हैं 13 नाम

जल्द ही विकराल रूप में दिखेगा चक्रवात 'निवार'

नई दिल्ली: साल 2020 को कोरोना महामारी (Coronavirus) के अलावा इन चार चक्रवाती ​तूफानों (Cyclones) के लिए भी हमेशा याद किया जाएगा। ‘अम्फान’ (Amphan) , ‘निसर्ग’ (Nisarg) , ‘गति’ (Gati) और अब ‘निवार’ (Nivar), इसी साल देश ने इन साल तूफानों से हुई तबाही को झेला है। ‘निवार’ पुडुचेरी (Puducherry) के कराईकल से होते हुए आज 25 नवंबर को तमिलनाडु (Tamilnadu) तक पहुंच रहा है।

इसका असर आंध्र प्रदेश के रायलसीमा समेत प्रदेश के दक्षिणी तट पर भी देखने को मिल रहा है। इन इलाकों में तेज बारिश शुरू हो चुकी है, जो कल यानी 26 नवंबर तक जारी रहेगी। दक्षिणी ओडिशा के कई इलाकों में भी तेज बारिश की संभावना से इनकार नहीं किया गया है। उत्तरी भारत के तटीय इलाकों में आने वाले चक्रवातों में से इस साल यानी नए लिस्ट में शामिल होने वाला ​तीसरा चक्रवाती तूफान है ‘निवार’। यह नाम ईरान का सुझाया गया है। इसका अर्थ है (prevention) बचाव।

चक्रवाती तूफान 'निवार' के कुछ ऐसे हैं हालात

एक बुलेटिन में बताया गया कि तूफान, 25 नवंबर की शाम को कराईकल और मामल्लापुरम के बीच तमिलनाडु और पुडुचेरी के तट से टकरा सकता है। इसके साथ ही 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से हवा चलने की आशंका है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की पहले ही हिदायत कर दी गई है।

जल्द ही विकराल रूप में दिखेगा चक्रवात 'निवार'

यह पुडुचेरी से 410 किलोमीटर और यहां से 450 किलोमीटर दूर स्थित है। अगले कुछ घंटे में चक्रवाती तूफान के और विकराल रूप धरने की आशंका है। अगले 12 घंटे में इसके पश्चिम-उत्तर की ओर बढ़ने और इसके बाद उत्तर-पश्चिम की तरफ बढ़ने की प्रबल आशंका है।

अधिकारियों ने बताया कि यहां चेम्बरमबक्कम समेत कई जलाशयों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और निचले स्थानों पर रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगह पर ले जाया जा रहा है। बंगाल की खाड़ी के दक्षिण पश्चिमी हिस्से के ऊपर निर्मित हुआ गहरे दबाव का क्षेत्र पश्चिम-उत्तर की ओर बढ़ा और चक्रवाती तूफान 'निवार' में तब्दील हो गया।

कैसे रखे जाते हैं तूफानों के नाम

भारतीय मौसम विभाग ने हाल में 169 नामों की लिस्ट जारी की है, जो आनेवाले वक्त में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में उठनेवाले तूफानों को दिए जा सकते हैं। तूफानों के नाम रखने की मुख्य वजह है कि इनको लेकर आम लोग और वैज्ञानिक स्पष्ट रह सकें। क्या आप जानते हैं कि इन तूफानों का नामकरण कैसे होता है?

क्या है तूफानों का नेम गेम

साल 2000 में आयोजित विश्व मौसम विज्ञान संगठन World Meteorological Organisation और एशिया व प्रशांत के लिए बनाए गए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग के 27वें अधिवेशन में ही यह तय हो गया था कि किन किन तूफानों के नाम कौन कौन से देश रखेंगे? इस अधिवेशन में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में उठने वाले तूफानों के नाम रखने के लिए बांग्ला देश, भारत, मालद्वीप, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका, थाइलैंड, ईरान, कतर, सउदी अरब, यूएई और यमन देशों से चर्चा की गई थी।

इस तरह शुरू होता है नाम देने का सिलसिला

खबरों की मानें तो भारत ने गति (speed), तेज (speed), मरासु (musical instrument in Tamil), आग (fire) और नीर (water), जैसे नाम नई लिस्ट के लिए दिए थे। इस पैनल में शामिल देशों के नाम alphabetical आर्डर में रखे जाते हें। यही वजह है कि बांग्लादेश Bangladesh से शुरू होकर यह भारत India, ईरान Iran, मालद्वीप Maldives से होते हुए आगे बढ़ता है। इन चक्रवाती तूफानों के नाम column-wise सीक्वेंस में लिए जाते हैं।

हर देश को देने होते हैं 13 नाम

मौसम विभाग ने तूफानों के लिए 169 नाम फाइनल किए हैं। इसमें सभी 13 देशों से 13 नाम शामिल हैं। अम्फान पिछली लिस्ट में भी था, लेकिन तब इसका इस्तेमाल नहीं हुआ था तो इसलिए इसका इस्तेमाल अब किया गया है।

अप्रैल 2020 में अन्य सदस्य देशों द्वारा सुझाए गए अन्य तूफानों के नाम इस प्रकार हैं- बुरेवी Burevi (मालद्वीप Maldives), तख्ती Tauktae (म्यांमार Myanmar), यास Yaas (ओमान Oman), और गुलाब Gulab (पाकिस्तान Pakistan)। ये नाम 13 देशों द्वारा सुझाए गए 169 नामों में से फाइनल किए गए हैं।

अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और उत्तर भारतीय तट इस साल पांच चक्रवाती तूफानों का गवाह बन रहा है। इसके बाद की नई लिस्ट अगले 25 वर्षों के लिए तय कर दी जाएगी।  

कैसे रखे जाते हैं तूफानों के नाम

भारतीय मौसम विभाग ने हाल में 169 नामों की लिस्ट जारी की है, जो आनेवाले वक्त में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में उठनेवाले तूफानों को दिए जा सकते हैं। तूफानों के नाम रखने की मुख्य वजह है कि इनको लेकर आम लोग और वैज्ञानिक स्पष्ट रह सकें। क्या आप जानते हैं कि इन तूफानों का नामकरण कैसे होता है?

जहां से आता है तूफान, वहीं रखते हैं उसका नाम

तूफानों का नाम रखने की जिम्मेदारी उस क्षेत्र के मौसम विभाग की ही होती है, जहां से तूफान शुरू होता है। दुनिया में 6 रीजनल स्पेशलाइज्ड मेट्रोलॉजिकल सेंटर हैं। इसमें से भारत का मौसम विभाग (IMD) एक है। बंगाल की खाड़ी, अरब सागर में उठनेवाले तूफानों के नाम की जिम्मेदारी भारत की ही है।

अटलांटिक क्षेत्र में तूफानों के नामकरण की शुरुआत 1953 की एक संधि से हुई। हालांकि, हिंद महासागर क्षेत्र के आठ देशों ने भारत की पहल पर इन तूफानों के नामकरण की व्यवस्था 2004 में शुरू की। इन आठ देशों में बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, थाईलैंड और श्रीलंका शामिल हैं। 2018 में इसमें ईरान, कतर, सउदी अरब, यूएई और यमन को भी जोड़ा गया।

ये रहे कुछ चर्चित तूफानों के नाम

काफी चर्चा में रहे तूफान हेलेन का नाम बांग्लादेश ने, नानुक का म्यांमार ने, हुदहुद का ओमान ने, निलोफर और वरदा का पाकिस्तान ने, मेकुनु का मालदीव ने और हाल में बंगाल की खाड़ी से चले तूफान 'तितली' का नाम पाकिस्तान द्वारा दिया गया था।

तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी में निवार के मद्देनजर आपदा मोचन बल (NDRF) के करीब 1200 बचावकर्मियों को तैनात किया गया है। अन्य 800 को तैयार रखा गया है। एनडीआरएफ प्रमुख एस एन प्रधान ने कहा कि वे अत्यधिक तीव्रता वाले एवं सबसे भीषण चक्रवाती तूफान के लिए तैयार हैं। यह तूफान पश्चिम बंगाल से दक्षिणी तटरेखा की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, हम इस पर करीब से नजर रख रहे हैं और प्रभावित राज्यों से समन्वय स्थापित कर रहे हैं।

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