'नेशनल पॉल्यूशन कंट्रोल डे' पर जानें, प्रदूषण किस तरह कर रहा हम पर 'कंट्रोल'

2 Dec, 2020 13:03 IST|सुषमाश्री
नेशनल पॉल्यूशन कंट्रोल डे

वायु प्रदूषण का जीवन पर असर

प्रदूषण को लेकर जागरुकता जरूरी

आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में भी हुआ गैस कांड

नई दिल्ली: हर साल 2 दिसंबर का दिन राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस (National Pollution Control Day 2020) के तौर पर मनाया जाता है। 2 दिसंबर 1984 की आधी रात को हुए भोपाल गैस त्रासदी ने कुल 3787 लोगों की जान ले ली थी। इसके बाद कितनी ही जिंदगियां इस कांड के बाद से आज भी प्रभावित हैं। आज भी वहां लोग पूर्णत: स्वस्थ नहीं हैं।

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के इस गैस कांड के निशान आज भी वहां देखे जा सकते हैं। वहां के हालात देखकर ही भारत सरकार ने यह महसूस किया कि लोगों में प्रदूषण को लेकर जागरुकता फैलाना कितना अनिवार्य है। इसके बाद से ही इस दिन को प्रदूषण के प्रति लोगों में जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से नेशनल पॉल्यूशन कंट्रोल डे के तौर पर मनाया जाने लगा।

वायु प्रदूषण का जीवन पर असर

अगर हम कहें कि यह दिन भोपाल गैस त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों के सम्मान में हर साल मनाया जाता है, तो अतिश्योक्ति न होगी। हर साल इस दिन देश भर में कई आयोजन किए जाते हैं, जिसमें प्रदूषण का जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में क्या प्रभाव होता है, इसे लेकर लोगों को जागरुक करने की कोशिश की जाती है।

प्रदूषण को लेकर जागरुकता जरूरी

इसका मुख्य उद्देश्य औद्योगिक आपदा प्रबंधन और उसके नियंत्रण को लेकर लोगों में जागरुकता फैलाना है। इस दिन देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। साथ ही, लोगों को यह भी बताया जाता है कि आधुनिकीकरण के साथ-साथ प्रदूषण पर कंट्रोल कितना जरूरी है।

राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर भयावह

इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य प्रदूषण रोकने संबंधी प्रयास करना है। कहने की जरूरत नहीं कि प्रदूषण आज देश ही नहीं, दुनिया के लिए बड़ी समस्या बन चुका है। हमारे यहां राजधानी दिल्ली के हालात प्रदूषण के स्तर को लेकर सबसे बदहाल माने जाते हैं। आए दिन बढ़ते प्रदूषण स्तर की वजह से खबरों की सुर्खियों में बना रहता है, दिल्ली का प्रदूषण।

आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में भी हुआ गैस कांड

यही नहीं, बीते महीनों में 7 मई 2020 को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में हुए गैस कांड ने भी एक बार फिर प्रदूषण की ओर हमारा ध्यान दिलाया है। ऐसी घटनाएं हमें आगाह करती हैं कि अगर समय रहते हमने इन पर कंट्रोल नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ी को साफ हवा भी मय्यसर नहीं होगी।

वायु प्रदूषण हमें कर रहा ​बीमार

बढ़ते औद्योगिकीकरण की वजह से कारखानों और मिलों से निकलने वाली हानिकारक गैस सांस के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश करके हमें कई गंभीर बीमारियों का शिकार बना रही हैं। हमारे फेफड़े, मस्तिष्क और हृदय, शरीर के तकरीबन सभी अंगों पर वायु प्रदूषण का बुरा असर हो रहा है। इन सभी से बचाव जरूरी है। अगर आज हमने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो वह दिन दूर नहीं जब हालात बद से बदतर होते चले जाएंगे।

7 मिलियन लोेग वायु प्रदूषण के शिकार

नेशनल हेल्थ पोर्टल आफ इंडिया के मुताबिक, ​वैश्विक स्तर पर प्रति वर्ष तकरीबन 7 मिलियन लोग वायु प्रदूषण का शिकार हो रहे हैं। हालात इतने भयावह हैं कि दुनिया भर में प्रति 10 लोगों में से नौ को स्वच्छ वायु मय्यसर नहीं है। प्रदूषण हमारे लिए कितना ज्यादा खतरनाक है, इसका अंदाजा महज इसी से लगाया जा सकता है कि इसने वायुमंडल में मौजूद ओजोन लेयर को भी प्रभावित कर दिया है।

नई पीढ़ी का कैसा होगा भविष्य

हमें यह याद रखना होगा कि जिस रफ्तार से हम आगे बढ़ रहे हैं, उसी रफ्तार से प्रदूषण में भी इज़ाफा कर रहे हैं। अब अगर समय रहते हमने इस पर रोक न लगाई तो हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए हम कैसी दुनिया छोड़कर जाएंगे, यह हम अच्छी तरह से समझ सकते हैं। हालात ऐसे ही रहे तो यहां हर रोज हम एक और भोपाल कांड को अंजाम दे रहे होंगे। अब सोचना हमें है कि नई पीढ़ी के लिए हम कैसा भविष्य चाहते हैं!!!

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