क्या बिहार में 19 लाख रोजगार देने का वादा फिर साबित होगा BJP का जुमला?

18 Nov, 2020 16:29 IST|विजय कुमार

क्या हुआ 19 लाख रोजगार का वादा?

कहीं बीजेपी फिर न कह दे, 'चुनावी जुमला'

नीतीश कुमार की 'चालाकी' पर विशेष रिपोर्ट 

पटना: बिहार विधान सभा चुनावों (Bihar Assembly Elections) में एनडीए (NDA) की तरफ से बीजेपी (BJP) ने 19 लाख युवाओं को रोजगार का चुनावी वादा किया था। अब गठबंधन का कोई नेता इस पर बात करने को तैयार नहीं है। अगर सरकारी नौकरी की बात की जाय तो संभावनाएं सबसे अधिक शिक्षा विभाग में है। जिसे नीतीश कुमार ने अपने खेमे में रख लिया है। ऐसा लगता है कि रोजगार के वादे पर नीतीश कुमार ने बीजेपी के संकल्प से पल्ला झाड़ लिया है। अब कहीं मनमुटाव की वजह से दोबारा बीजेपी और जदयू में अलगाव हुआ, तो रोजगार न दे पाने का पूरा ठीकरा नीतीश कुमार बीजेपी पर फोड़ सकते हैं। 

दरअसल बीजेपी ने विपक्षी महागठबंधन की ओर से तेजस्वी यादव के 10 लाख सरकारी नौकरी देने के वादे के जवाब में 19 लाख रोजगार देने की बात कह दी थी, और तो और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) और तत्कालीन उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने राजद नेता तेजस्वी के 10 लाख सरकारी नौकरी देने के वादे का जमकर मजाक उड़ाया था। नीतीश कुमार ने सार्वजनिक मंच से तेजस्वी को नासमझ बताया और कहा कि बिहार में 10 लाख सरकारी नौकरी देना संभव ही नहीं है। बीजेपी ने मामले में संतुलित होते हुए अपने चुनावी घोषणा पत्र में 19 लाख रोजगार की बात कही है। बीजेपी के संकल्प पत्र में 5 सूत्र,1 लक्ष्य और 11 संकल्प जाहिर किये गए थे। साथ ही विकास के पांच साल का रोडमैप भी जारी किया गया था। 

बीजेपी के वादे के मुताबिक एक साल में तीन लाख शिक्षकों की बहाली होगी। इसके अलावा बिहार को आईटी हब (IT HUB) बनाने की तैयारी है। जिसके जरिए कम से कम 5 लाख रोजगार के मौके पैदा होंगे। महिलाओं की स्वयं सहायता समूहों को सरकार की ओर से 50 हजार करोड़ रुपये की मदद का भी वादा किया गया था। जिसके जरिए 1 करोड़ महिलाओं को रोजगार मिल सकेगा। वादे के मुताबिक सरकार कृषि जनित रोजगार पर ध्यान देगी और इस सेक्टर में कम से कम 10 लाख लोगों को उन्नत रोजगार मिल सकेगा। 

नीतीश कुमार ने चालाकी से लिया काम 

विभाग बंटवारे पर एक नजर डालें तो नीतीश कुमार ने वित्त, आईटी, उद्योग, महिला कल्याण और कृषि मंत्रालय जैसे रोजगार सृजन वाले विभागों की जिम्मेदारी बीजेपी खेमे के मंत्रियों को दी है। जिनकी वादे के मुताबिक वक्त के साथ जवाबदेही भी तय हो सकेगी। इसके अलावा शिक्षक भर्ती की संभावनाओं वाला शिक्षा विभाग नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी के मंत्री को दिया है। देर सबेर बिहार में मास्टरों की भर्ती तो होनी ही है, जिसका पूरा क्रेडिट जेडीयू लेकर जाएगी। बीजेपी खेमे के आईटी विभाग की जिम्मेदारी उपमुख्यमंत्री की महती चुनौती होगी बिहार को आईटी हब बनाने की। साथ ही डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद को वित्त मंत्रालय की कमान संभालते हुए पैसों की इंतजाम भी करना होगा। अगर तारकिशोर प्रसाद रोजगार सृजन में पैसों पर कुंडली मारते हैं तो जेडीयू के लिए बड़ा बहाना मिल जाएगा। तारकिशोर प्रसाद पर ही वाणिज्य मंत्रालय के जरिए राजस्व उगाही की भी बड़ी जिम्मेदारी होगी। कुल मिलाकर कहें तो बिहार में सारे के सारे रोजगार सृजन और प्रबंधन वाले विभाग बीजेपी के खाते में है। 19 लाख रोजगार का वादा भी तो बीजेपी ने ही अपने संकल्प पत्र में किया था। ऐसे में जवाबदेही की बारी आएगी तो बड़े भाई के तौर पर बीजेपी को ही आगे आकर जवाब देना होगा। 

अगर कभी बिहार एनडीए में खटपट होती है तो नीतीश कुमार के लिए दलील होगी कि रोजगार सृजन के नाम पर बीजेपी ने कुछ नहीं किया। जिस तरह बीजेपी ने 15 लाख रुपए अकाउंट में डलवाने की बात कहकर बाद में इसे चुनावी जुमला बता दिया था। उसी तर्ज पर 19 लाख के रोजगार के वादे का हश्र हुआ तो जनता सत्ताधारी दल को मजा जरूर चखाएगी। 

बिहार में बेरोजगारी का आलम 

देश में फिलहाल बेरोजगारी की औसत दर 7 फीसदी है, तो बिहार में ये 10 फीसदी के आंकड़े पर है। इस साल बंदी के दौरान अप्रैल महीने में बिहार में बेरोजगारी ने 46.6 फीसदी के रिकॉर्ड को पार कर लिया था। बिहार में संपन्न हुए हाल के चुनाव में रोजगार को ही सबसे बड़ा मुद्दा माना गया था। नौकरियों के सब्जबाग दिखाए जा रहे थे। अब जमीनी तौर पर काम करने की बारी है। लोगों को डर है कि कहीं नेता ये न कह दें कि 'वो तो चुनावी जुमला था।' 
 

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