भोपाल गैस त्रासदी: आज भी रुला देती है 36 साल पुरानी ये तस्वीरें

2 Dec, 2020 20:16 IST|Sakshi
भोपाल गैस त्रासदी से जुड़ी तस्वीरें

भोपाल: बीतें 36 सालों से हम भोपाल गैस त्रासदी की टीस महसूस कर रहे हैं। हर साल 3 दिसंबर को दर्द और गहरा जाता है। भोपाल गैस त्रासदी को वैश्विक औद्योगिक इतिहास का सबसे बड़ा हादसा माना जाता है। ये दुर्घटना 2 और 3 दिसंबर 1984 की रात को घटी थी। सर्दी के जोर से लोग लिहाफ में दुबके हुए थे। उन्हें पता भी नहीं चला कि मौत का साया मंडराने लगा है। 

शहर के बीचो बीच यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से जहरीली गैस रिसती रही और शहर के बड़े हिस्से को काले साये के तौर पर ढक लिया। गैर सरकारी आंकड़ों के मुताबिक हादसे में करीब 15 हजार लोगों की जानें गई थी। जबकि सरकारी आंकड़े ने महज 5 हजार मौतों को स्वीकार किया था। 

यूनियन कार्बाइड कंपनी से मिथाइल आइसो साइनाइट गैस का रिसाव हुआ था। जिसने करीब 5 लाख लोगों को प्रभावित किया था। उस जमाने में जिन्होंने इस घटना को प्रत्यक्ष देखा था, बताते हैं कि महज एक घंटे के भीतर लाशें गिरनी शुरू हो गई थी। कई लोगों को तो पता भी नहीं चला और वे सोये ही रह गए। सुबह उठे तो बच गए लोगों में चीख पुकार मच गई। 

हर साल की तरह इस बार भी घटना की बरसी मनाई जाएगी। बावजूद घटना को लेकर कई गौर करने वाली बातों को नजरअंदाज किया जाता रहेगा। माना जाता है कि आज भी यूनिय कार्बाइड फैक्ट्री के आस पास के इलाके की हवा और पानी में जहर घुला है। ऐसे में लोगों को कैंसर, किडनी की बीमारियां, ब्लड प्रेशर और मानसिक विकलांगता जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।  

एक बार फिर मध्यप्रदेश की राजधानी में 36 साल पहले हुई भीषण गैस त्रासदी की बरसी गुरुवार को मनाई जाएगी। इस मौके पर प्रार्थना सभा होगी और हादसे का शिकार बने लोगों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। राजधानी के बरकतउल्ला भवन (सेंट्रल लायब्रेरी) भोपाल में तीन दिसंबर को सुबह 10 बजे से प्रार्थना सभा होगी। प्रार्थना सभा में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान शामिल होंगे। इस प्रार्थना सभा में सीमित संख्या में लोग उपस्थित रहेंगे।

प्रार्थना सभा में दिवंगत गैस पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। धर्मगुरुओं द्वारा विभिन्न धर्म ग्रंथों का पाठ किया जाएगा। दिवंगतों की स्मृति में दो मिनट की मौन श्रद्धांजलि भी होगी। श्रद्धांजलि सभा में कोरोना महामारी को दृष्टिगत रखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क, हैंड सेनेटाइजर सहित भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन उपस्थित होने वाले आगंतुकों को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

दो-तीन दिसंबर, 1984 की दरम्यानी रात यूनियन कार्बाइड संयंत्र से जहरीली गैस के रिसाव की त्रासदी को शायद हम कभी नहीं भूल पाएंगे। इस हादसे के जख्म अब भी हरे हैं, बचे लोग बीमारियों की जद में हैं और उनका जिंदगी व मौत के बीच संघर्ष जारी है। अब देखना है कि मौजूदा सरकार मुश्किल में फंसे लोगों को क्या राहत दिला पाती है। 

Load Comments
Hide Comments
More News
आंध्र-प्रदेश
मुख्य समाचार
.