नारायण दत्त तिवारी : एक हार की बदौलत नहीं बन पाए PM, कई और कारनामों से आजीवन रहे चर्चा में

17 Oct, 2020 13:54 IST|अनूप कुमार मिश्रा
पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी (फाइल फोटो)

नारायण दत्त तिवारी का जन्म और मृत्यु 18 अक्टूबर को हुई

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड दोनों राज्यों के रह चुके है मुख्यमंत्री

एनडी तिवारी का व्यक्तिगत जीवन काफी चर्चा में रहा था

नई दिल्ली : चेहरे पर सौम्य मुस्कान, चपरासी तक को नाम से बुलाना और किसी को कभी ना नहीं कहना, इस तरह की तमाम खूबियां नारायण दत्त तिवारी के अंदर थी। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और दो राज्यों के मुख्यमंत्री रह चुके एनडी तिवारी राजनीति के ऐसी शख्सियत थे, जिनसे हर कोई कुछ न कुछ सीखना चाहता था। वह विवादों में भी रहे, लेकिन उनकी खूबियों के आगे उन बातों को किसी ने गौर नहीं किया। 

एनडी तिवारी के साथ एक गजब का संयोग रहा। जिस दिन जन्म हुआ, उसी तारीख को उनकी मृत्यु भी हुई। एनडी तिवारी का जन्म 18 अक्टूबर 1925 को नैनीताल में हुआ था, जो उत्तर प्रदेश का हिस्सा हुआ करता था, जबकि उनका निधन 18 अक्टूबर 2018 को राजधानी दिल्ली में हुआ था। प्रधानमंत्री की कुर्सी छोड़कर एनडी तिवारी सभी प्रमुख पदों पर रहे। वह दो राज्यों उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे। आंध्र प्रदेश के राज्यपाल भी रहे। उनका राजनीतिक जीवन काफी समृद्ध रहा। 

महज 17 साल की उम्र में गए थे जेल

नैनीताल में जन्में नारायण दत्त तिवारी बचपन से ही काफी प्रखर थे। इनके पिता पूर्णानंद तिवारी वन विभाग में अफसर थे। देश में अंग्रेजों के खिलाफ जब असहयोग आंदोलन चल रहा था, तब उन्होंने नौकरी छोड़ दी और आजादी के संघर्ष में शामिल हो गए। पिता के इस कदम का उन पर गहरा असर पड़ा। उन्होंने भी अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। साल 1942 में महज 17 की उम्र में उन्हें जेल में डाल दिया गया। वह नैनीताल जेल में काफी दिनों तक बंद रहे। देश जब आजाद हुआ तो एनडी तिवारी पूरी तरह से राजनीति में आ गए।

कांग्रेस के खिलाफ लड़ा था पहला चुनाव

कांग्रेस पार्टी को पूरा जीवन समर्पित करने वाले नारायण दत्त तिवारी ने अपने राजनीतिक पारी की शुरुआत कांग्रेस के खिलाफ चुनाल लड़कर की थी। 1952 के अपने पहले चुनाव में वह नैनीताल सीट पर प्रजा समाजवादी पार्टी के टिकट पर उतरे थे और विधायक भी बने। 1957 में अपना दूसरा चुनाव जीतकर वह विधानसभा में विपक्ष के नेता बने। साल 1963 में वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे। इसके बाद वह लगातार पार्टी की सेवा करते रहे।

ऐसे नेता जो दो राज्यों के सीएम रहे

एनडी तिवारी के नाम एक बेहद शानदार रिकॉर्ड है। वह ऐसे नेता में शुमार हैं, जो दो राज्यों के मुख्यमंत्री बने। वह तीन बार उत्तर प्रदेश और एक बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे। उत्तर प्रदेश में उनके कार्यकाल 1976 से 1977, 1984 से 1985 और 1988 से 1989 तक रहे। उत्तराखंड में उनका कार्यकाल 2002 से 2007 तक रहा। इसके अलावा वह आंध्र प्रदेश के राज्यपाल भी रहे, उनका कार्यकाल 2007 से 2009 तक रहा। वह राजीव गांधी की सरकार में विदेश और वित्तमंत्री भी रहे थे। 

इस हार की वजह से प्रधानमंत्री नहीं बन पाए थे तिवारी

मीडिया से बात करते हुए एक बार एनडी तिवारी ने अपनी दिल की बात बताई थी। उन्होंने कहा कि अगर वह साल 1991 का चुनाव जीत जाते तो शायद देश के प्रधानमंत्री बन जाते, लेकिन इस बात से ज्यादा उन्हें यह बात खटक रही थी कि पीवी नरसिम्हाराव बिना चुनाव लड़े पीएम बन गए।

दरअसल, राजीव गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस पार्टी को एक सक्षम नेता की जरूरत थी। पुराने नेताओं में एनडी तिवारी और पीवी नरसिम्हाराव का नाम सबसे आगे था। चुनाव हुए तो एनडी तिवारी भाजपा के प्रत्याशी से करीब 11 हजार वोट से हार गए। हार की वजह बताई गई थी अभिनेता दिलीप कुमार। उस चुनाव में एनडी तिवारी ने दिलीप कुमार को चुनाव प्रचार के लिए बुलाया था, लेकिन दिलीप साहब का मुसलमान होना वोटर्स को नागवार गुजरा और एनडी तिवारी चुनाव हार गए।

सेक्स स्कैंडल में फंसने पर छोड़ी थी कुर्सी

राजनीति में अजात शत्रु माने जाने वाले एनडी तिवारी का विवादों से भी गहरा नाता रहा था। जब वह आंध्र प्रदेश के राज्यपाल थे, तब उन पर गंभीर आरोप लगे थे। एक तेलुगु टीवी चैनल ने राजभवन के बिस्तर पर तीन महिलाओं के साथ उनका वीडियो दिखाया, जिसके बाद उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा था। उस वक्त उनकी काफी किरकिरी हुई थी।

89 साल की उम्र में फिर से रचाई थी शादी

एनडी तिवारी का जीवन तमाम उतार-चढ़ाव से गुजरा। उनका व्यक्तिगत जीवन काफी चर्चा में रहा था। उनकी दोबारा शादी 89 साल की उम्र में हुई थी। दरअसल, 1954 में उन्होंने सुशील तिवारी से शादी की थी। इस शादी से कोई संतान नहीं हुई। इस बीच एनडी को 70 के दशक में जनता पार्टी की सरकार के मंत्री प्रो. शेर सिंह राणा की बेटी उज्ज्वला से प्यार हो गया। दोनों साथ में रहने लगे, लेकिन बाद में उन्होंने इस रिश्ते को नकार दिया था। जब 2008 में उनके बेटे रोहित शेखर कोर्ट पहुंच गए, तो कोर्ट ने डीएनए टेस्ट के आधार पर एनडी तिवारी को रोहित शेखर का बायोलॉजिकल फादर घोषित किया।

Load Comments
Hide Comments
More News
आंध्र-प्रदेश
मुख्य समाचार
.