Article 370 : क्या है 'गुपकार', जिसके सहारे मोदी सरकार से भिड़ने को तैयार हुए जम्मू-कश्मीर के नेता

18 Oct, 2020 11:57 IST|अनूप कुमार मिश्रा
डिजाइन इमेज

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 खत्म हुए पूरे हुए एक साल

गुपकार गठबंधन के तहत 6 दलों ने बनाई थी रणनीति

बीते एक साथ से गठबंधन के ज्यादातर नेता थे नजरबंद

नई दिल्ली : जम्मू-कश्मीर के विशेष राज्य का दर्जा (अनुच्छेद 370) खत्म हुए अब एक साल से अधिक हो चुके हैं। हालात सामान्य हैं और लोगों ने भी इसे स्वीकार कर लिया है। बावजूद इसके बीते कुछ दिनों में घाटी में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। महबूबा मुफ्ती के हिरासत से छूटते ही आर्टिकल 370 की बहाली की मांग पर लेकर चर्चा तेज हो गई है। इन सबके बीच बार-बार गुपकार समझौते का जिक्र किया जा रहा है। गुपकार समझौते के जरिए जम्मू एवं कश्मीर के विशेष राज्य का दर्जा दिलाने की जंग को आगे बढ़ाने का फैसला किया गया है।

केंद्र सरकार के ऊपर जम्मू-कश्मीर के विभिन्न दलों के नेता दबाव बना रहे हैं। आर्टिकल 370 को खत्म किए जाने के बाद से ही ज्यादातर नेता या तो हिरासत में ले लिए गए थे या फिर नजरबंद थे। एक साल बाद फिर से गुपकार गठबंधन के तहत उन समझौतों के साथ फिर से राज्य को विशेष दर्जा की मांग दिलाने की मुहीम आगे बढ़ाई जा रही है।

गुपकार गठबंधन है क्या

जम्मू-कश्मीर में फिर से आर्टिकल 370 लागू करने और पुरानी स्थिति बहाल करने के लिए गुपकार समझौता हुआ था। इसके अंतर्गत अगस्त 2019 में 6 प्रमुख पार्टियों ने मिलकर एक गठबंधन बनाया, जिसे गुपकार गठबंधन कहा गया। इन सभी दलों को मालूम था कि अकेले-अकेले मांग उठाना ज्यादा असरदार नहीं होगा और केंद्र की मोदी सरकार इस पर विचार नहीं करेगी, इसलिए सभी 6 पार्टियों ने आपसी मतभेद भुलाकर एक साथ आने का फैसला किया, जिसे गुपकार गठबंधन कहा गया।

कौन-कौन सी पार्टियां हैं शामिल

गुपकार गठबंधन में जम्मू एवं कश्मीर की 6 प्रमुख पार्टियां शामिल हैं। गठबंधन में शामिल नेशनल कांफ्रेंस , पीडीपी, सीपीआई(एम), पीपल्स कांफ्रेंस (पीसी), जेकेपीएम और एएनसी पार्टियां हैं। जानकारों का मानना है कि गुपकार गठबंधन को कांग्रेस का भी पर्दे के पीछे से समर्थन प्राप्त है। हालांकि कोई बड़ा नेता अब तक गठबंधन की मीटिंग में शामिल नहीं हुआ, लेकिन किसी भी फैसले पर पूर्ण सहमति जरूर हो सकती है।

गुपकार ही क्यों रखा गया नाम

नेशनल कांफ्रेंस पार्टी के प्रमुख और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला इस गठबंधन के प्रणेयता कहे जा सकते हैं। उन्होंने ही इस तरह के गठबंधन बनाए जाने की बात कही थी, जिस पर अन्य दलों ने सहमति जताई थी। फारुख अब्दुल्ला श्रीनगर के गुपकार इलाके में रहते हैं। जब गठबंधन की बात हुई तो सभी दलों ने मीटिंग का स्थान पूछा। आपसी बातचीत में तय हुआ कि फारुख अब्दुल्ला के घर पर ही पहली मीटिंग रखी जाए। इस तरह तय हुआ कि श्रीनगर के गुपकार स्थित आवास पर यह मीटिंग होगी, इसलिए इसको गुपकार मीटिंग कहा गया और फिर गठबंधन को गुपकार नाम दिया गया।

गठबंधन की क्या-क्या है मांग

गुपकार घोषणा' में कहा गया था, ‘‘अनुच्छेद 35ए और अनुच्छेद 370 में संशोधन या इन्हें खत्म करना, असंवैधानिक सीमांकन या राज्य का बंटवारा जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख के लोगों के खिलाफ आक्रामकता होगी।'' राज्य की पुरानी स्थिति बहाल करना और विशेष दर्जा दिलाना इस गठबंधन का मुख्य लक्ष्य है।

गठबंधन के एक दिन बाद ही खत्म हो गया था विशेष दर्जा

गुपकार गठबंधन के तहत सभी 6 दलों ने 4 अगस्त 2019 को पहली मीटिंग की थी और 5 अगस्त को केंद्र सरकार ने राज्यसभा में विशेष दर्जा खत्म करने का बिल पेश कर दिया, जिसे लोकसभा से पहले ही मंजूरी मिल चुकी थी, राष्ट्रपति ने भी बिना देर करे अपनी मंजूरी दे दी। इस तरह गुपकार गठबंधन की पहली मीटिंग के ठीक एक दिन बाद ही जम्मू और कश्मीर से आर्टिकल 370 खत्म कर दिया गया था।

Load Comments
Hide Comments
More News
आंध्र-प्रदेश
मुख्य समाचार
.