राम मंदिर भूमि पूजन के लिए क्यों बेहद खास है 32 सेकेंड, जानिए मुहूर्त से जुड़ी ये बातें

5 Aug, 2020 09:48 IST|अनूप कुमार मिश्रा
राम मंदिर का मॉडल

मुख्य पूजा दोपहर 12.44 और 12.45 बजे के बीच होगी

32-सेकंड के दौरान 'अभिजीत मुहूर्त' में होगी पूजा

पीएम मोदी ज्योतिषों द्वारा तय किए गए मुहूर्त में रखेंगे चांदी की ईंट

अयोध्या : राम नगरी अयोध्या में मंदिर के भूमि पूजन में अब थोड़ा ही वक्त रह गया है। कुछ ही देर में पीए नरेंद्र मोदी अयोध्या के लिए उड़ान भरेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छोटी सी छोटी व्यवस्थाओं का खुद जायजा लिया है। तैयारियों में कोई कमी न रह जाए इसके लिए पूरा सरकारी अमला दिन-रात मेहनत में जुटा रहा। हालांकि कुछ लोगों ने भूमि पूजन के मुहूर्त पर सवाल जरूर उठाया है। आइए जानते हैं राम मंदिर निर्माण के लिए होने वाले भूमि पूजन का समय कितना शुभ है और आज क्या-क्या संयोग बन रहे हैं। 

राम मंदिर के लिए भूमि पूजन दोपहर 12.30 बजे शुरू होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिला पूजन, भूमि पूजन और कर्म शिला पूजन करेंगे। मुख्य पूजा दोपहर 12.44 और 12.45 बजे के बीच 32-सेकंड के दौरान 'अभिजीत मुहूर्त' में आयोजित की जाएगी। माना जाता है कि इसी मुहूर्त में भगवान राम का जन्म हुआ था।

आज का शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 54 मिनट तक है। विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 42 मिनट से 03 बजकर 35 मिनट तक है। इसके बाद निशिथ काल मध्‍यरात्रि 12 बजकर 06 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक है। अमृत काल सुबह 09 बजकर 25 मिनट से 11 बजकर 04 मिनट तक है। गोधूलि मुहूर्त शाम 06 बजकर 57 मिनट से 07 बजकर 21 मिनट तक है। 

सिर्फ 32 सेकेंड का है शुभ मुहूर्त

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ज्योतिषों द्वारा तय किए गए मुहूर्त में भूमि पूजन करेंगे। यह मुहूर्त सिर्फ 32 सेंकेड का है जो दोपहर 12 बजकर 44 मिनट आठ सेकेंड से लेकर 12 बजकर 44 मिनट 40 सेकेंड के बीच है। बताया गया कि षोडश वरदानुसार 15 वरद में ग्रह स्थितियों का संचरण शुभ और अनुकूलता प्रदान करने वाला है।

तीन दिवसीय अनुष्ठान का आज होगा समापन

इस बीच सोमवार से आरम्भ हुए अनुष्ठान के प्रथम दिन गो-पूजन, प्रायश्चित अनुष्ठान, सहस्त्र मोदक से गणपति हवन, पंचांग पूजन, वेदिका पूजन, सर्वतोभद्र पूजन, ब्राह्मण वरण के अलावा अथर्व शीर्ष के मंत्रों से सहस्त्र आहुतियां दी गई। इस पूजन के मुख्य आचार्य काशी के जयप्रकाश उपाध्याय थे। इसके अलावा अरुण दीक्षित व चद्रभानु शर्मा समेत काशी-कांची, अयोध्या व दिल्ली के 21 वैदिक आचार्य शामिल थे।

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