कृषि विधेयक 2020 : दोगुनी होगी आय या बर्बाद होंगे किसान, समझिए हर छोटी-बड़ी बात

18 Sep, 2020 20:48 IST|अनूप कुमार मिश्रा
खेती करते किसान (फाइल फोटो)

कृषि सुधार विधेयक पर मचा है बवाल

लोकसभा में गुरुवार को पास हो चुका है कृषि सुधार विधेयक

विरोध में विपक्ष समेत भाजपा के सहयोगी दल, हरसिमरत कौर ने दिया इस्तीफा

नई दिल्ली : देश में कृषि सुधार विधेयक को लेकर हंगामा बरपा हुआ है। विधेयक पारित होने से नाराज केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है, तो दूसरी तरफ विपक्ष सरकार को किसान विरोधी बताकर सड़क पर उतरने को तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि विधेयक को किसानों का रक्षा कवच बताते हुए विरोध करने वालों को बिचौलियों का साथ देने वाला बताया। आइए जानते हैं आखिर कृषि सुधार विधेयक में ऐसा क्या है, जिसकी वजह से सड़क से लेकर संसद तक हंगामा मचा हुआ है।

लोकसभा में गुरुवार को कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक, कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक पारित कर दिया। आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक पहले ही पारित हो चुका है। तीनों विधेयकों को अब राज्यसभा में रखा जाएगा और ऊपरी सदन में पारित होने के बाद ये कानून बन जाएंगे। 

क्या है दोनों कृषि विधेयक में खास

केंद्र सरकार ने विधेयक को लेकर फैलाए जा रहे सारे भ्रम को गलत बताया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि किसानों को इन विधेयकों के माध्यम से अपनी मर्जी से फसल बेचने की आजादी मिलेगी। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को बरकरार रखा जाएगा और राज्यों के अधिनियम के अंतर्गत संचालित मंडियां भी राज्य सरकारों के अनुसार चलती रहेगी। कृषि सुधार से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए नए-नए अवसर मिलेंगे, जिससे उनका मुनाफा बढ़ेगा। 

क्या है सरकार का पक्ष

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देश के किसानों को आश्वस्त किया कि लोकसभा से पारित कृषि सुधार संबंधी विधेयक उनके लिए रक्षा कवच का काम करेंगे और नए प्रावधान लागू होने के कारण वे अपनी फसल को देश के किसी भी बाजार में अपनी मनचाही कीमत पर बेच सकेंगे। प्रधानमंत्री ने विपक्षी पार्टियों, खासकर कांग्रेस पर, आरोप लगाया कि वह इन विधेयकों का विरोध कर किसानों को भ्रमित करने का प्रयास कर रही हैं और बिचौलियों के साथ किसानों की कमाई को बीच में लूटने वालों का साथ दे रही हैं। 

पीएम मोदी ने कहा, ‘‘विश्वकर्मा जयंती के दिन लोकसभा में ऐतिहासिक कृषि सुधार विधेयक पारित किए गए हैं। किसान और ग्राहक के बीच जो बिचौलिए होते हैं, जो किसानों की कमाई का बड़ा हिस्सा खुद ले लेते हैं, उनसे बचाने के लिए ये विधेयक लाए जाने बहुत आवश्यक थे। ये विधेयक किसानों के लिए रक्षा कवच बनकर आए हैं।'' उन्होंने कहा कि जो लोग दशकों तक सत्ता में रहे हैं और देश पर राज किया है, वे लोग किसानों को इस विषय पर भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं ओर उनसे झूठ बोल रहे हैं। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र की सरकार किसानों को एमएसपी के माध्यम से उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकारी खरीद भी पहले की तरह जारी रहेगी, कोई भी व्यक्ति अपना उत्पाद दुनिया में कहीं भी बेच सकता है। जहां चाहे वहां बेच सकता है। मोदी ने कहा कि किसानों के लिए जितना राजग शासन में पिछले छह वर्षों में किया गया है, उतना पहले कभी नहीं किया गया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं आज देश के किसानों को बड़ी नम्रता पूर्वक अपनी बात बताना चाहता हूं। 

विधेयक के विरोध की क्या है वजह

कृषि सुधार विधेयक का सबसे ज्यादा विरोध पंजाब और हरियाणा में देखने को मिल रहा है। किसान और व्यापारियों को इससे एपीएमसी मंडियां खत्म होने की आशंका है। बढ़ते दबाव के कारण ही केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने इस्तीफा दे दिया है। कांग्रेस समेत सभी प्रमुख राजनीतिक दल विधेयक का विरोध कर रहे हैं। 

पंजाब में भाजपा के सबसे पुराने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) ने विधेयकों को किसान विरोधी करार दिया है। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए विधेयकों के खिलाफ पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के आवास के ठीक बाहर बादल गांव में किसान प्रदर्शन कर रहे हैं। शिरोमणि अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर बादल ने कहा कि पार्टी सरकार और भाजपा को समर्थन देना जारी रखेगी, लेकिन किसान विरोधी नीतियों का विरोध करेगी।

मंडियों के खत्म होने का डर

कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक 2020 में कहा गया है कि किसान अब एपीएमसी मंडियों के बाहर किसी को भी अपनी उपज बेच सकता है, जिस पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, जबकि एपीएमसी मंडियों में कृषि उत्पादों की खरीद पर विभिन्न राज्यों में अलग-अलग मंडी शुल्क व अन्य उपकर हैं।

पंजाब में यह शुल्क करीब 4.5 फीसदी है। लिहाजा, आढ़तियों और मंडी के कारोबारियों को डर है कि जब मंडी के बाहर बिना शुल्क का कारोबार होगा तो कोई मंडी आना नहीं चाहेगा। वहीं, पंजाब और हरियाणा में एमएसपी पर गेहूं और धान की सरकारी खरीद की जाती है। किसानों को डर है नये कानून के बाद एमएसपी पर खरीद नहीं होगी क्योंकि विधेयक में इस संबंध में कोई व्याख्या नहीं है कि मंडी के बाहर जो खरीद होगी वह एमएसपी से नीचे के भाव पर नहीं होगी।

पंजाब में सत्ताधारी कांग्रेस पहले से ही विधेयक का विरोध कर रही है। किसानों, आढ़तियों और कारोबारियों की आशंका को लेकर कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा ने कहते हैं कि, जब मंडी के बाहर बिना शुल्क का कारोबार होगा तो फिर मंडी में कोई शुल्क देना क्यों चाहेगा। उन्होंने बताया कि पंजाब और हरियाणा में बासमती निर्यातकों और कॉटन स्पिनिंग और जिनिंग मिल एसोसिएशनों ने मंडी शुल्क समाप्त करने की मांग की है।

पंजाब और हरियाणा में विरोध होने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि पंजाब और हरियाणा में एपीएमसी मंडियों का अच्छा इन्फ्रास्ट्रक्च र है और एमएसपी पर गेहूं और धान की ज्यादा खरीद होती है। शर्मा ने बताया कि पंजाब में मंडियों और खरीद केंद्रों की संख्या करीब 1,840 हैं और ऐसी मंडी व्यवस्था दूसरी जगह नहीं है।

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