प्लाज्मा थेरेपी के नाम पर गोरखधंधा, रिपोर्ट में जानिए पूरी सच्चाई

20 Oct, 2020 19:09 IST|विजय कुमार
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प्लाज्मा थेरेपी को लेकर शंकाएं अधिक

ICMR ने थेरेपी को लेकर जारी की आशंकाएं

प्लाज्मा डोनर बना रहे मोटी रकम 

हैदराबाद: कोरोना वायरस इलाज के लिए प्लाज्मा थेरेपी को लेकर खूब चर्चा हो रही है। एंटी बॉडी जिनमें विकसित हो चुका है, उनके प्लाज्मा के लिए लोग लाखों रुपए चुकाने के लिए तैयार हैं। हैदराबाद में मनीष के भाई प्रतिष्ठित अस्पताल में कोरोना संक्रमण का इलाज करा रहे हैं। डॉक्टरों ने मनीष को प्लाज्मा डोनर का इंतजाम करने को कहा तो तत्काल साइबराबाद पुलिस कमिश्नरेट के जरिए उन्होंने 2-3 डोनर्स के नंबर हासिल कर लिये। इसमें कोई दो राय नहीं कि प्लाज्मा डोनर मैनेजमेंट में तेलंगाना पुलिस अच्छा काम कर रही है। 

प्लाज्मा डोनेशन के नाम पर दलाली

हैदराबाद शहर में ही प्लाज्मा डोनर 30 हजार रुपए से एक लाख तक चार्ज कर रहे हैं, वो भी खुल्लमखुल्ला। हालांकि कानूनी प्रवाधानों के लिहाज से प्लाज्मा, ब्लड या फिर शरीर के किसी भी ऑर्गेन को बेचा नहीं जा सकता है। हां, डोनेशन को लेकर कोई पाबंदी नहीं है। वहीं जान बचाने के चक्कर में लोग दलाल किस्म के लोगों के संपर्क में आ जाते हैं और लाखों रुपए भी चुकाते हैं। मजे की बात ये कि तेलंगाना पुलिस के कॉल पर ही डोनर संक्रमित परिवार के संपर्क में आता है और पैसे की लेन देन तय होती है। इन मामलों में संक्रमित बीमार के परिजन भी अपना मुंह बंद ही रखते हैं। लिहाजा बिना पुलिस कम्प्लेंट के तेलंगाना पुलिस भी कोई कार्रवाई नहीं कर पाती है। 

क्या है प्लाज्मा थेरेपी?

प्लाज्मा थेरेपी की चर्चा हाल में कोरोना काल में ही शुरू हुआ है। माना जाता है कि कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों के शरीर से लिए गए प्लाज्मा को कोरोना के एक्टिव मरीजों में डाला जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में कोरोना संक्रमित व्यक्ति में एंटीबॉडी विकसित होती है। दावा किया जाता है कि इससे कोरोना संक्रमित मरीज के ठीक होने की गुंजाइश काफी अधिक होती है। भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका, स्पेन, दक्षिण कोरिया, इटली, टर्की और चीन समेत कई देशों में प्लाज्मा थेरेपी को धड़ल्ले से अपनाया जा रहा है। 

प्लाज्मा डोनेशन को लेकर आईसीएमआर की राय 

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने प्लाज्मा थेरेपी को लेकर अहम बात कही है। जिसके मुताबिक प्लाज्मा थेरेपी को नेशनल हेल्थ क्लीनिकल प्रोटोकॉल से हटाने पर विचार चल रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया गया कि कोरोना संक्रमण के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी कारगर नहीं है। बावजूद मरीजों की एक से अधिक बार प्लाज्मा थेरेपी की जाती है। जानकार बताते हैं कि बड़े अस्पतालों को इसमें अच्छी कमाई हो जाती है। साथ ही मरीज के परिजन किसी भी हालत में इलाज में कोई कमी नहीं होने देना चाहते। वहीं सरकारी अस्पतालों में न के बराबर प्लाज्मा थेरेपी अपनाई जा रही है। 

बता दें कि ICMR इससे पहले कई बार प्लाज्मा थेरेपी पर सवाल उठा चुका है. हाल ही में उसने कहा था कि कोरोना के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी की जगह अब एंटीसेरा को विकल्प के रूप में इस्तेमाल में लाया जा सकता है. आईसीएमआर ने दावा किया कि उसने कोरोना के इलाज के लिए जानवरों के रक्त सीरम का इस्तेमाल करते हुए हाइली प्योरिफाइड एंटीसेरा विकसित किया है.

प्लाज्मा थेरेपी की जगह एंटीसेरा का विकल्प बेहतर 

आईसीएमआर के वैज्ञानिकों का दावा है कि प्लाज्मा थेरेपी की जगह जानवरों से मिला ब्लड सीरम कारगर साबित हो रहा है। इनमें खास एंटीजन के खिलाफ एंटीबॉडीज पाए जाते हैं। जो कोरोना के इलाज में सही साबित हो रहा है। 
 

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