रामलला के टेंट में पहुंचने का आंखों देखा हाल, मुख्य पुजारी ने बताई उस दिन की कहानी

1 Aug, 2020 14:55 IST|विनय कुमार तिवारी
राम मंदिर के मुख्य पुजारी।

रामलला की पूजा से पहले अध्यपाक की नौकरी करते थे सत्येंद्र दास

28 रामलला की पूजा कर रहे हैं सत्येंद्र दास

अयोध्या : पांच अगस्त को राम मंदिर भूमिपूजन होना है। इसे लेकर राम मंदिर के पुजारी सत्येंद्र दास काफी खुश है। उनका कहना है कि मै 28 साल से रामलला की पूजा कर रहा हूं। अब जाकर  मेरी पूजा सफल हुई है। उनका कहना है कि अब मेरी उम्र 80 साल की हो चुकी है और ट्रस्ट भी बन चुका है क्या पता आगे मंदिर की पूजा का काम किसी और को मिले लेकिन अगर मौका मिलेगा तो पूरी जिंदगी रामलला की सेवा करते हुए गुजारना चाहता हूं।

कौन हैं महंत सत्येंद्र दास
वर्तमान में भगवान रामलला की पूजा कर रहे सत्येंद्र दास मूलत : संतकबीर नगर के रहने वाले हैं। उनके एक भाई और एक बहन थी। हालांकि अब उनके परिवार में केवल उनके भाई ही है। बहन की मृत्यु हो चुकी है। एक अखबार को दिए इंटरव्यू के दौरान सत्येंद्र दास नें बताया कि बचपन से ही अयोध्या से नाता जुड़ा हुआ रहा है। सत्येंद्र दास के पिता उन्हें अक्सर अयोध्या लेकर आया करते थे। इसके बाद साल 1958 को  सत्येंद्र दास अपनी पढ़ाई के लिए अयोध्या आ गए।

 इसके बाद उन्होंने संस्कृत विद्यालय से आचार्य 1975 में पास किया। 1976 में फिर अयोध्या के संस्कृत महाविद्यालय में व्याकरण विभाग में सहायक अध्यापक की नौकरी मिल गई। उस समय 75 रुपए सैलरी थी। पढाई के दौरान ही बाद सत्येंद्र दास ने सन्यासी बनने का फैसला कर लिया था। जैसे ही इस बात की जानकारी उनके पिता को हुई तो वे काफी  खुश हुए थे उनका एक बेटा भगवान की सेवा करेगा इसके बाद सत्येंद्र अयोध्या चले आए। हांलांकि वे कोई मौका प्रयोजन के दौरान अपने घर जाते रहते हैं। 

कैसे मिला रामलला की सेवा का मौका
सत्येंद्र दास ने बताया कि उन्हें पहली बार साल 1992 में राम लला की सेवा का मौका मिला। इससे पहले राम लला के पुजारी लालदास थे। उन्होंने बताया कि रामलला कि सेवा से पहले मैं   मेरा संपर्क तत्कालीन भाजपा सांसद विनय कटियार विहिप के नेताओं उनका काफी गहरा संबंध था।  सबने मेरे नाम का निर्णय किया। इस बात की सहमती तत्कालीन विहिप अध्यक्ष अशोक सिंघल भी दे चुके थे। इसके बाद इस बात की सूचना जिला प्रशासन को दी गई। तब जाकर एक मार्च को 1192 को मुझे राम लला की सेवा का मौका मिला। प्रशासन की ओर से नियुक्ति मिलने के बाद   मुझे अधिकार दिया गया कि मैं अपने 4 सहायक पुजारी भी रख सकता हूं। तब मैंने 4 सहायक पुजारियों को रखा।

उन्होंने बताया कि शुरुआत में तो मुझे मदिर की पूजा के लिए 100 रुपए मिला करते थे। इसके बाद धीरे धीरे सैलरी बढ़ती चली गई। जब मैं अध्यापक के पद से रिटायर हुआ तो मुझे अब 13 हजार रुपए बतौर पारिश्रमिक मिलते है। बाकी अन्य पुजारियों को अभी भी केवल 8 हजार रुपए ही मिलते हैं। 

विवादित ढांचा गिरने के दौरान रामलला को बचाने में जुटे महंत सत्येंद्र दास
 सत्येंद्र दास ने मीडिया को बताया कि  जब विवादित ढांचे को गिराया जा रहा था उस वक्त मैं भी वहां मौजूद था। जब यह पूरा वाकया हुआ तो यही कोई दोपहर के 10-से 11 का वक्त रहा होगा। लाउड स्पीकर से नेताओं ने कहा पुजारी जी रामलला को भोग लगा दें और पर्दा बंद कर दें। मैंने भोग लगाकर पर्दा लगा दिया। उसके बाद नारे लगने लगे। सारे नवयुवक काफी खुश  थे। वे बैरिकेडिंग तोड़ कर विवादित ढांचे पर पहुंच गए और तोड़ना शुरू कर दिया। इस बीच वे रामलला की मूर्ति को उठाकर दूसरे जगह ले गए। इससे मूर्ति को कोई भी क्षति नहीं पहुंची।

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