कोरोना संक्रमितों का इन कंडीशन्स में होम आइसोलेशन से बेहतर है अस्पताल जाना

3 Aug, 2020 15:05 IST|संजय कुमार बिरादर
कॉंसेप्ट इमेज (सौजन्य सोशल मीडिया)

फैमिली का हेल्दी होना जरूरी 

फैमिली में कोई हार्ट पेशेंट न हो

परिवार में गर्भवती महिला का होना

गुर्दे की समस्या होने पर

पिछले कुछ समय से कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है और लोग बड़ी संख्या में इसकी चपेट में आने लगे हैं। यदि आप कोविड-19 के लक्षण महसूस कर रहे हैं और अस्पताल गए बगैर होम आइसोलेशन में रहकर अपना इलाज कराना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले अपने परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य को लेकर सावधान रहना होगा और इन चार स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

कुछ विशेष परिस्थितियों में आपका होम आइसोलेशन की बजाय अस्पताल जाना बेहतर होगा। भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइंस के मुताबिक कोरोना वायरस के माइल्ड और मध्यम लक्षण होने की स्थिति में आप अस्पताल न जाकर अपने घर पर ही अपने स्वास्थ्य का ध्यान रख सकते हैं। हल्के लक्षण वाले अधिकांश लोग स्वास्थ्य मंत्रालय के गाइडलाइंस का पालन कर कोविड-19 से ठीक भी हुए हैं।

भारत में कोरोना वायरस का पीक टाइम होने के कारण संक्रमण और तेजी होने का खतरा है। ऐसे में अगर आप कोरोना के हल्के और मध्यम लक्षण महसूस कर रहे हैं तो आपको होम आइसोलेशन में इलाज का फैसला करने से पहले आपके लिए अपने परिवार के अन्य सदस्यों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखना जरूरी है।

फैमिली का हेल्दी होना जरूरी 
कोरोना संक्रमित के होम आइसोलेशन में रहने के लिए उसके परिवार का स्वस्थ‍ होना बेहद जरूरी है। कोरोना संक्रमित की जांच के साथ-साथ परिवार के सभी सदस्यों का टेस्ट आनिवार्य है। यदि परिवार का कोई सदस्य सामान्य बीमारी से भी ग्रसित है तो मरीज को होम आइसोलेट नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि घर के सदस्‍यों में कोरोनावायरस का संक्रमण बाहर की तुलना में ज्‍यादा तेजी से फैलता है। 

इन चार स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों में आपका घर पर ठीक होने का फैसला करने की बजाए अस्पताल जाना बेहतर होगा।

1.फैमिली में न हो कोई हार्ट पेशेंट

आपके परिवार में अगर किसी को हार्ट की समस्या का सामना करना पड़ा है, तो आपका होम आइसोलेशन में जाने का निर्णय लेना गलत हो सकता है। यह ऐसी मेडिकल कंडीशन है जो इम्यूनिटी पर बहुत ज्यादा असर डालती है और कभी भी इमर्जेंसी की स्थिति बन सकती है।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्च में यह खुलासा हुआ है कि हार्ट की समस्या होने पर कोरोना वायरस के ज्यादा घातक होने का खतरा है। कोविड-19 संक्रमित होने पर जिन रोगियों की मृत्यु हुई, उनमें सबसे 10.5 फीसदी रोगी पहले से हार्ट पेशेंट थे। ऐसे में अपने बुजुर्ग माता-पिता को किसी तरह की रिस्क में डालना ठीक नहीं होगा।

2. निमोनिया भी है डेंजर
कोरोनावायरस सबसे ज्यादा लंग्स पर असर डालता है। यदि आपके परिवार में कोई व्यक्ति पहले से निमोनिया या लंग्स से जुड़ी किसी अन्य समस्या का शिकार है तो आपको उनकी सेहत के लिए होम आइसोलेशन का फैसला नहीं लेना चाहिए।

एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक ज्यादातर लोगों को बाहर की बजाए घर में कोरोना वायरस से संक्रमित होने का ज्यादा खतरा होता है। इसकी वजह साफ है कि घर में सोशल डिस्टेंसिंग सबसे मुश्किल होती है। यही नहीं, क्वारंटीन और होम आइसोलेशन के बावजूद घर के पर्यावरण को कीटाणुमुक्त करना मुश्किल है। ऐसी स्थिति में आपका होम आइसोलेशन की बजाए अस्पताल जाकर इलाज करवाना बेहतर होगा।

3. परिवार में गर्भवती महिला का होना

सबसे पहले आपको इस तरफ ध्यान देना होगा, क्योंकि यहां एक नहीं दो व्यक्तियों के जीवन से जुड़ा मामला है। यदि आपके परिवार में कोई महिला गर्भवती है और आपको होम आइसोलेशन की बजाय अस्पताल जाकर इलाज करवाना चाहिए। 

यही नहीं, गर्भावस्था में इम्यूनिटी बहुत कमजोर हो जाती है। ऐसे में गर्भवती महिलाएं वायरस के हल्के और मध्यम लक्षण से भी संक्रमित हो जाएं। इस स्थिति में इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए बहुत ज्यादा गर्म तासीर वाली चीजें भी नहीं दी जा सकतीं।

4.  गुर्दे की समस्या होने पर

अगर आपकी उम्र 45 से ज्या‍दा है और आप किडनी पेशेंट हैं तब आपको हल्के लक्षण होने पर अस्पताल जाना चाहिए। हाल के एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि कोरोना वायरस फेफड़ों को ही नहीं बल्कि किडनी को भी संक्रमित करता है। जांच में यह बात भी सामने आई है कि कोरोना संक्रमितों में 25 से 50 फीसदी लोगों में कोरोना उनकी किडनी को प्रभावित करता है।

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