आज से शुरू हो गई सार्वजनिक रूप से मुकदमों की लाइव स्ट्रीमिंग, आप भी देख सकेंगे कोर्ट की सुनवाई

26 Oct, 2020 16:27 IST|सुषमाश्री
सार्वजनिक हुई कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग

1500 अतिरिक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग लाइसेंस

वरिष्ठ अधिवक्ता का कथित वीडियो वायरल

वर्चुअल सुनवाई के दौरान टूटी कोर्ट की मर्यादा

अहमदाबाद: गुजरात हाईकोर्ट ने सोमवार से मुख्‍य न्‍यायाधीश के मुकदमों की सुनवाई को सार्वजनिक करने का फैसला किया है। यूट्यूब पर इनकी लाइव स्‍ट्रीमिंग देखी जा सकेगी।

अपनी तरह के पहले मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने सोमवार से चीफ जस्टिस विक्रम नाथ की कोर्ट की कार्यवाही की इंटरनेट पर लाइव स्‍ट्रीमिंग की शुरुआत कर दी है। हाईकोर्ट ने ऐसा सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के अनुरूप किया है जिसमें कहा गया था कि जनता को वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट की सुनवाई देखने की मंजूरी मिलनी चाहिए।

पृथ्‍वीराज सिंह जाला PIL

हाईकोर्ट की ओर से जारी विज्ञप्ति में निरमा यूनिवर्सिटी के लॉ स्‍टूडेंट पृथ्‍वीराज सिंह जाला की उस पीआईएल का भी उल्‍लेख है, जिसमें कोर्ट की कार्यवाही की लाइव स्‍ट्रीमिंग के लिए सुप्रीम कोर्ट से निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया था। पृथ्‍वीराज सिंह जाला ने अपने इस अनुरोध के आधार पर न्‍याय तक सबकी पहुंच और ओपन कोर्ट के सिद्धांतों का हवाला दिया था।

वर्चुअल सुनवाई

फिलहाल कोरोना काल में सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाई कोर्ट तक वर्चुअल सुनवाई पहले ही चल रही है। इस वर्चुअल सुनवाई के दौरान कई अहम मामलों पर बहस भी हो रही है और फैसले भी सुनाए गए। इसी वर्चुअल सुनवाई को सार्वजनिक करने की मांग काफी समय से उठ रही थी।

गौरतलब है कि 20 अक्टूबर 2020 को कोरोना वायरस (Corona virus) के कारण देशभर में लगे लॉकडाउन (lockdown) की वजह से अदालतों में मुकदमों की सुनवाई में काफी दिक्कतें आई हैं। इसके बाद देश में वर्चुअल (virtual) सुनवाई तेजी से होने लगी।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग लाइसेंस

इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने अदालतों में इस सुविधा को उपलब्ध कराने के लिए 1500 अतिरिक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग लाइसेंस (video conferencing licence) की खरीद की प्रक्रिया शुरू की है। जानकारी के मुताबिक इसमें 9 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

केंद्रीय कानून मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार लॉकडाउन के पहले दिन से सितंबर के अंत तक देशभर में हाईकोर्ट और जिला अदालतों (High Court and district courts) में 26 लाख से अधिक मामलों की वर्चुअल सुनवाई की है। 24 मार्च से 21 सितंबर के बीच में, 25 हाईकोर्ट ने मिलकर 6,88,318 मामले वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुने।

1500 अतिरिक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग लाइसेंस

करीब 19,000 जिला अदालतों ने इस दौरान 19,33,492 मामले वर्चुअल तरीके से सुने। इस तरह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 26,21,810 मामले की सुनवाई हुई। केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट और जिला अदालतों के लिए 1500 अतिरिक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग लाइसेंसों की खरीद की प्रक्रिया शुरू की है। ऐसे लाइसेंस वीडियो कॉन्फ्रेंस के इस्तेमाल के विस्तार और कानूनी प्रक्रिया के लिए आवश्यक है।

वर्चुअल सुनवाई के समय वकीलों को काला कोट, गाउन पहनने की ज़रूरत नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार 21 मई 2020 को वकीलों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए सुनवाई में शामिल होने पर काला कोट या गाउन पहनने की अनिवार्यता से छूट दे दी। कोर्ट द्वारा जारी एक सर्कुलर के अनुसार, टाई या वाइट बैंड लगाकर वर्चुअल कोर्ट में पेश हो सकते हैं। इससे पहले 13 मई को सुप्रीम कोर्ट ने भी वकीलों को ऐसी ही छूट दी थी।

वर्चुअल सुनवाई में वकील गुटखा खाते-पाइप पीते दिखे, सुप्रीम कोर्ट ने फटकारा

नई दिल्ली में 14 अगस्त 2020 को कोर्ट में गुरुवार को हुई वर्चुअल सुनवाई में एक वकील गुटखा चबाते हुए नजर आए थे। वकील के इस कृत्य पर कोर्ट ने उन्हें फटकारा। साथ ही आगे कभी सुनवाई के दौरान ऐसा न करने के निर्देश भी दिए। ऐसे ही एक मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन का भी नाम सामने आ रहा है।

वरिष्ठ अधिवक्ता का कथित वीडियो वायरल

वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान हुक्का गुड़गुड़ाते हुए दिखे थे। ऐसा करते हुए धवन का वीडियो भी वायरल हो गया। धूम्रपान के खतरों को लेकर राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति ने धवन को सलाह भी दे दी थी। उस वायरल वीडियो में धवन एक ऑनलाइन सुनवाई में हुक्के से कश लेते दिख रहे थे। एक ट्विटर यूजर ने राजीव धवन का वह वीडियो शेयर किया था, जिसमें उनके हाथ में हुक्के का पाइप नजर आ रहा है।

इससे पहले भी टूटी मर्यादा

वरिष्ठ वकील राजीव धवन के साथ यह घटना तब हुई, जब राजस्थान हाई कोर्ट की जयपुर बेंच ने कांग्रेस के साथ बसपा के छह विधायकों के विलय को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की थी। कोर्ट की मर्यादा एक बार पहले भी टूटी थी, जब एक वकील अपने लिविंग रूम से टीशर्ट पहन कर दलील दे रहे थे। कोर्ट ने उन्हें भी फटकारते हुए मर्यादा याद दिलाई थी।

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