क्या आपको पता है टीपू सुल्तान की लाइफ से जुड़ी ये खास 7 बातें ?

19 Nov, 2020 21:47 IST|Sakshi
टीपू सुल्तान।

20 नवंबर को अठारहवीं सदी के मुस्लिम शासक टीपू सुल्तान ( Tipu Sultan) की बर्थएनिवर्सरी है।  उन का जन्म 20 नवम्बर, 1750 को हुआ। 20 नवंबर 1750 को कर्नाटक (Karnataka) के देवनहल्ली में जन्मे टीपू सुल्तान को भारतीय इतिहास के प्रमुख व्यक्तित्वों में शुमार किया जाता है। 7 दिसंबर 1782 को अपने पिता हैदर अली की मौत के बाद वह मैसूर का शासक बने। कहा जाता है की टीपू ने बहुत ही कम उम्र में युद्ध की सभी कलाएं सीख ली थीं और वो बहुत ही कम उम्र में सभी युद्ध कलाओ में निपुण हो गए थे। पहलीबार उन्होंने 18 वर्ष की उम्र में अंग्रेज़ों के विरुद्ध युद्ध लड़ा और जीत गए। अपने पिता हैदर अली के बाद वो 1782 में मैसूर की गद्दी पर बैठे थे। 

 - टीपू को दुनिया का पहला ‘मिसाइल मैन’ कहा जाता है। लंदन के साइंस म्‍यूजियम में इनके रॉकेट आज भी रखे हुऐ हैं। इनकी मृत्‍यु 4 मई सन् 1799 को मैसूर की राजधानी श्रीरंगपट्टनम में युद्ध करते हुए थी।

- सबसे ख़ास बात जो टीपू सुल्तान के बारे में है वो ये इनकी तलवार पर रत्नजड़ित बाघ बना हुआ था। इनकी मौत के बाद ये तलवार, इनके शव के पास पड़ी मिली थी। बाढ़ में उनकी यह तलवार 2003 में 21 करोड में नीलाम हुई थी जिसे विजय माल्या ने खरीदा था। इस तलवार का वजन 7 किलो 400 ग्राम है।

- एक शासक के रूप में अपनी सूझबूझ और साहस के कारण वह लगातार सुर्खियों में रहे। अंग्रेजों से युद्ध करते हुए 4 मई 1799 को श्रीरंगपत्तन में उनकी मौत हो गई, लेकिन ‘मैसूर के शेर' के रूप में उनकी छवि जनमन में हमेशा के लिए दर्ज हो गई।

उनके जीवन की खास बातें जो आप जानना चाहते हैं
► टीपू सुल्तान ब्रिटिशकाल में सबसे शक्तिशाली शासक माने जाते थे। जब उनका निधन हुआ उस वक्त ब्रिटेन में जश्न मनाया गया। इसके लिए लेखक नाटककार और पेंटर्स ने इस जश्न को मनाने के लिए अनोखा तरीका अपनाया। मशहूर ब्रिटिश नावेल 'मूनस्टोन' में जिस तरह की लूट का जिक्र किया गया है कुछ ऐसा ही मंजर टीपू सुल्तान के मरने के बाद श्रीरंगपट्टनम में देखने को मिला। 

►टीपू एक ऐसे भारतीय शासक थे जिसने अंग्रेजों के खतरे को समझा और उन्हें भारत से बाहर करने के लिए चार युद्ध लड़े। उस नजरिए से देखें तो ये कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि टीपू  सुल्तान को देश का पहला स्वतंत्रता सेनानी कहा जा सकता है।  

► टीपू सुल्तान को पश्चिमी विज्ञान और टेक्नोलॉजी के मुरीद थे और उन्होंने फ्रांस से गन मेकर्स, इंजीनियर्स, घड़ी बनाने वाले सहित कई अन्य एक्सपर्ट को मैसूर बुलाया था। उसके बाद उन्होंने मेक इन मैसूर के नाम से पीतल के तोप और हथियार बनाने का कारखानों की स्थापना करवाई थी। 

►टीपू सुल्तान अपनी ताकत शेर के अंदाज में पेश करना पसंद करते थे। यही वजह है कि उनके सिंहासन उनके कपड़े, सिक्के, तलवार और उनके सैनिकों के कपड़े पर शेर की छाप होती थी।

►टीपू ने ख्वाबनामा नाम की एक किताब लिखा जिसमें उन्होंने अपने सपनों को दर्शाया है। जिसमें वे अपने लड़ाई के परिणामों के बारे में संकेत और चित्र खोजते नजर आते हैं।

 ►टीपू सुल्तान बाहरी आदमी नहीं थे। वे मिट्टी के बेटे थे और उनके परिवार की तीसरी पीढ़ी का जन्म दक्षिण भारत में हुआ था।

►टीपू सुल्तान के मुख्यमंत्री 'पुरनैय्या' एक हिंदू थे, उनकी सभा में काफी मुख्य अधिकारी हिंदू धर्म के ही थे।

► टीपू ने कई हिंदू मंदिरों को संरक्षण दिया था। श्रीरंगपट्टन्नम में स्थित 'श्रीरंगनाथ का मंदिर' उनमें से एक है। 'श्रृंगेरी मठ' भी उनके संरक्षण में ही था जिसके स्वामी को उन्होंने 'जगद्गुरु' कहा।

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