देश को दहला देने वाले वो 7 सबसे चर्चित गैंगरेप केस, किसी को हुई फांसी तो किसी का हुआ एनकांउटर

25 Nov, 2020 21:47 IST|विनय कुमार तिवारी
डिजाइन फोटो।

नई दिल्ली : गैंगरेप और हत्या की घटनाएं भारत सहित दुनिया भर में आए दिन होती रहती हैं। इन्हीं में से एक घटना हैदराबाद गैंगरेप एंड मर्डर भी है। इस घटना को  27 नवंबर को एक साल हो जाएंगे।  हालांकि देश में लगातार बच्चियों के प्रति हैवानियत बरकरार है। आज जानिए, उन बर्बर घटनाओं को जिनके खिलाफ देश उठ खड़ा हुआ।

प्रतीकात्मक फोटो

अजमेर रेप केस
साल 1992 के अप्रैल महीने में  अजमेर  रेप कांड देश के  सबसे बड़े मामलों में से एक था। इस केस में सौ से ज्यादा कम उम्र की स्कूली छात्राओं के साथ रेप हुआ था। इस जघन्य वारदात का खुलासा संतोष गुप्ता ने किया था। इस रेप कांड के खुलासे के वक्त  उस दौर में  भले इंटरनेट नहीं था लेकिन इस रेप की ख़बरें लोगों के बीच आग की तरह फैली थी। इस केस में शुरूआत में 8 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। हालांकि जांच जैसे जैसे आगे बढ़ी तो इसमें आरोपियों की संख्या भी बढ़ती चली गई। केस में कुल 18 आरोपी थे। ज्यादातर आरोपी मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह के थे। हालांकि  ज्यादातर आरोपी काफी प्रभावशाली और अमीर लोग थे।

क्या हुआ केस में
केस को 28 साल हो चुके है पर यह केस अभी कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसा नहीं है कि आरोपियों को सजा नहीं दी गई।  सेशन कोर्ट ने साल 1998 में 8 आरोपितों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी। हालांकि इसके 3 सालों बाद साल 2001 में राजस्थान हाईकोर्ट ने इनमें से 4 को बरी कर दिया। इसके अलावा 2003 में सुप्रीम कोर्ट ने मोइजुल्लाह उर्फ पट्टन, इशरत अली, अनवर चिश्ती और शमशुद्दीन उर्फ मैराडोना की सजा ही कम कर डाली। इन सबको महज 10 साल की जेल हुई।  इनमें से 6 के ख़िलाफ़ अभी भी मामला चल रहा है।  एक आरोपी जिसका नाम अलमास महाराज फरार है। सीबीआई ने इसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस तक जारी कर रखी है। मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह का एक शख्स जिसका नामसलीम और सुहैल ही केवल जेल में है। 

आठ साल बाद निर्भया के दोषियों को उनके अंजाम तक पहुंचाया गया।

निर्भया केस
16 दिसम्बर, 2012 को दिल्ली में पैरा मेडिकल छात्रा के साथ 6 लोगों ने गैंगरेप किया। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। सड़क से लेकर संसद तक बवाल मचा। 13 दिन बाद गंभीर अंदरूनी चोटों के चलते निर्भया की मौत हो गई। इस केस में एक आरोपी रामसिंह ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। सबसे बर्बर आरोपी नाबालिग था। तीन साल बाद सुधार केन्द्र से छोड़ दिया गया। चार आरोपियों को 20 मार्च 2020 को फांसी दे दी गई।

घटना के दो कानून बने
इस घटना के एक साल बाद  2013 में क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट ऑर्डिनेंस आया। दुष्कर्मियों के लिए फांसी का प्रावधान हुआ। 2015 में जुवेनाइल जस्टिस बिल पास हुआ। 16 साल या उससे अधिक उम्र के किशोर को जघन्य अपराध पर एक वयस्क की तरह केस चलाने का कानून बना।

इसी सुनसान पड़ी मिल में फोटो जर्नलिस्ट के साथ हैवानियत की गई थी। ( फाइल फोटो)

2013 मुंबई गैंगरेप केस
यह घटना अगस्त 2013 की है। वारदात की शिकार एक 22 साल फोटो जर्नलिस्ट हुई थी। विक्टिम मुंबई के एक इग्लिशन न्यूज पेपर के लिए काम करती थी। दरअसल 22 अगस्त को एक फोटो जर्नलिस्ट अपने सहकमर्मी के साथ एक असाइमेंट के सिलसिले में सुनसान पड़ी शक्ति मिल पहुंची। यह मिल मुंबई के महालक्ष्मी इलाके में है। जैसे ही दोनों मिल के दाखिल हुए, इसी दौरान उनकी मुलाकात कुछ लोगों से हुई। उन्होंने खुद को पुलिस वाला बताते हुए उन्हें फोटो खींचने से रोक दिया। उन लोगों से फोटो जर्नलिस्ट और उसके साथी मिल के अंदर ले गए। यह कहकर कि उन्हें अगर फोटो लेना है तो परमिशन लेना होगा। वहां पर कुछ और लोग मौजूद थे। इससे पहले कि दोनों कुछ समझ पाते उससे पहले फोटो जर्नलिस्ट के दोस्त पर उन लोगों ने धावा बोल दिया गया। दोनों जख्मी हो गए। इस दौरान लड़की के दोस्त को रस्सियों से बांध दिया गया और पांच लोगों ने लड़की का गैंगरेप किया। दोनों की बमुश्किल से जान बच पाई। इसके बाद दोनों किसी तरह हॉस्पिटल पहुंचे। डॉक्टरों ने मामले को देखते ही फौरन पुलिस को इत्तेला की। खबर फैलते ही हर कोई अवाक रह गया था।

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क्या हुआ 
मुंबई की सेशन कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने पांच में से तीन को फांसी, एक को उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी। उन्हें भारतीय दंड संहिता की नई धारा 376 ई के तहत  मौत की सजा सुनाई थी। जो कि देश में पहली बार किसी को दिया गया।

सीसीटीवी के जरिए इस केस में आरोपियों की पहचान की गई थी।

रानाघाट का मामला
पश्चिम बंगाल के रानाघाट में कॉन्वेंट स्कूल की 71 साल की नन को घसीटते हुए एक कमरे में ले गए जहां उसके साथ गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया था। घटना 14 मार्च 2015 को हुई थी। बलात्कार करने के बाद बलात्कारी और उसके साथियों ने विदेशी चॉकलेट, केक और पेस्ट्रीज खाए थे। ये बात पुलिस ने घटना के कुछ दिन बाद जांच के बाद बताई थी। हालांकि पुलिस ने ये बात मीडिया को नाम ना छापने की शर्त पर बताई थी। खाने-पीने की ये चीजें स्कूल की एक सिस्टर अपने विदेशी दौरे से लेकर आई थीं। पुलिस ने इस मामले में कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

क्या हुआ इस केस में
निचली अदालत ने साल 2017 में रानाघाट के एक 71 साल नन का रेप करने के लिए एक व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जबकि पांच अन्य को 10 साल की कैद की सजा सुनाई। 

कोर्ट ने इस केस में 6 दोषियों को सजा सुनाई। इनमें 3 पुलिसवाले भी है।

कठुआ गैंगरेप केस
10 जनवरी 2018 को जम्मू के कठुआ में 8 साल की बच्ची को किडनैप करने के बाद एक मंदिर में गैंगरेप किया गया। इसके तीन दिन बाद 13 जनवरी को बच्ची की हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में कुल 6 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया। इसके बाद केस को पंजाब ट्रांसफर कर दिया गया।  वारदात के एक साल बीत जाने के बाद पंजाब की एक स्पेशल कोर्ट इस मामले में 10 जून 2019 को 6 लोगों को दोषी करार दिया।इसमें तीन पुलिस कर्मी भी शामिल थे। गैर पुलिस कर्मियों को उम्र कैद और पुलिस कर्मियों को 5-5 साल की सजा दी गई।

क्या बदला 
इस घटनाकांड के बाद  आईपीसी की धारा-376 एबी के तहत अगर 12 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ रेप किया तो दोषी को कम से कम 20 साल सजा और फांसी तक की सजा हो सकती है। गैंगेरप के मामले में भी उम्रकैद और फांसी का प्रावधान किया गया है।

उन्नाव रेप विक्टिम अब इस दुनिया में नहीं लेकिन उसके दोषी  कुलदीप सेंगर को कोर्ट ने अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा दी है।  (डिजाइन फोटो)

उन्नाव रेप केस
उन्नाव में कुलदीप सेंगर और उसके साथियों ने 2017 में नाबालिग लड़की को अगवा कर गैंगरेप किया था। घटना के करीब एक साल बाद इस मामले में  पहले आरोप-पत्र केंद्रीय जांच ब्यूरो ने 11 जुलाई 2018 को कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ दायर किया था। दूसरा आरोप पत्र 13 जुलाई 2018 को कुलदीप सिंह सेंगर और उनके भाई, तीन पुलिसकर्मियों और पाँच अन्य लोगों पर बलात्कार पीड़ित लड़की के पिता को दोषी बताने के लिए दायर किया गया। 

दरअसल घटना के बाद से ही विक्टिम लगातार थाने के चक्कर लगा रही थी लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई।  8 अप्रैल 2018 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास के सामने बलात्कार पीड़ित लड़की ने प्रदर्शन किया। उसके पिता की कुछ ही समय बाद न्यायिक हिरासत में मौत हो गई। इन घटनाओं के कारण नेशनल मीडिया में इस मामले की व्यापक रूप से रिपोर्टिंग शुरू हुई। 28 जुलाई 2019 को एक ट्रक की टक्कर में बलात्कार पीड़िता गंभीर रूप से घायल हुई और परिवार के दो सदस्यों की मौत हो गई थी। इसके बाद सात दिसंबर को विक्टिम की भी सफदरजंग हॉस्पिटल में मौत हो गई।  खबरों के अनुसार परिवार को धमकी दी गई थी। उन्होंने मदद के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भी लिखा था। 31 जुलाई 2019 को सुप्रीम कोर्ट और मुख्य न्यायाधीश ने मामले को स्वीकार कर लिया।

20 दिसंबर 2019 को कोर्ट ने सुनाई थी सजा
सामूहिक दुष्कर्म के 2 साल पुराने मामले में दोषी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर (53) को दिल्ली के कोर्ट ने 20 दिसंबर को उम्रकैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने कहा कि उसे मृत्यु तक जेल में रखा जाए। सेंगर पर 25 लाख रु. जुर्माना भी लगाया गया था।

हैदराबाद गैंगरेप केस
नवंबर 2019 को हैदराबाद के नजदीक 26 साल की वेटरिनरी डॉक्टर की गैंगरेप के बाद जलाकर हत्या कर दी गई। दो दिन बाद 28 नवंबर को उसकी जली हुई लाश मिली।

हिरासत से भाग रहे सारे आरोपी पुलिस एनकांउटर में मारे गए।

चारों आरोपियों का एनकांउटर
इस केस को लेकर जनता में बेहद गुस्सा था। इसी बीच, चारों आरोपियों ने पुलिस की गिरफ्त से भागने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस ने इन चारों को एनकाउंटर में मार गिराया। एनकाउंटर की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी गठित की है। जिसकी जांच चल रही है।

घटना के बाद आंध्र प्रदेश सरकार ने दिशा एक्ट
विधानसभा द्वारा आंध्र प्रदेश दिशा बिल 2019 (एपी क्रिमनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट 2019) पास। इसके तहत 21 दिन के अंदर दुष्कर्म और गैंगरेप के मामलों का ट्रायल पूरा करना होगा। आरोपियों को फांसी की सजा तक देने का प्रावधान। इस एक्ट के तहत ट्रायल 2 माह में पूरा करना होगा। मंजूरी के लिए बिल राष्ट्रपति को भेजा।
 

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