वैक्सीन की आस में नहीं जा रहा ऑक्सीजन की कमी पर ध्यान, हर रोज बढ़ रही सिलेंडरों की डिमांड

30 Oct, 2020 17:43 IST|संजय कुमार बिरादर
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प्रति दिन इतने मट्रिक टन ऑक्सीजन का उत्पादन

देशभर में ऑक्सीजन सिलेंडरों की किल्लत

जरूरतों के मुताबिक नहीं हो रहा उत्पादन 

देश में कुल 2,65,046 वेंटिलेटर सपोर्टेड बेड्स 

नई दिल्ली : देश में कोरोना वायरस का कहर बदस्तूर जारी है। कोरोना मरीजों से जहां देशभर के कई कार्पोरेट सहित सभी सरकारी अस्पताल खचाखच भरने लगे हैं, वहीं उपलब्ध सुविधाओं व संसाधनों के जरिए रोगियों का इलाज करने में जुटे स्वास्थ्य कर्मचारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आन पड़ी है।

देशभर के सभी सरकारी अस्पतालों को ऑक्सीजन सिलेंडरों की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। देश में सरकारों का पूरा ध्यान केवल कोरोना वैक्सीन पर है, लेकिन वैक्सीन बनने तक कोरोना रोगियों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे ऑक्सीजन के उत्पादन और आपूर्ति के मामले में उदासीन रुख देखने को मिल रहा है।

ये बात सभी जानते हैं कि कोरोना वायरस की वजह से सांस नहीं ले पाने से परेशान रोगियों को वेंटिलेटर के जरिए ऑक्सीजन पहुंचाने की जरूरत होती है। देश में कोरोना मरीजों की संख्या 80 लाख से अधिक हो गई है और उनमें कुछ लाख लोगों को ऑक्सीजन वाले वेंटिलेटरों की जरूरत पड़ रही है। इन सिलेंडरों की कमी की कई वजह सकती हैं, क्योंकि देश में जबसे कोरोना का कहर शुरू हुआ है तब से ऑक्सीजन सिलेंडरों की कालाबाजारी बढ़ गई है।

प्रति दिन इतने मट्रिक टन ऑक्सीजन का उत्पादन 

आमतौर पर चिकित्सा जरूरतों के साथ ग्लास, स्टील उद्योगों के लिए भी ऑक्सीजन की जरूरत होती है। ऑल इंडिया इंडस्ट्रियल गैसेज मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के राजीव गुप्ता के मुताबिक ग्लास और स्टील उद्योगों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडरों की आपूर्ति रोक कर उनका इस्तेमाल केवल चिकित्सा जरूरतों के लिए किया जा रहा है। इसके  बावजूद सितंबर के महीने में देशभर के अस्पतालों में प्रति दिन कुल 3 हजार मट्रिक टन ऑक्सीजन की किल्लत दर्ज हुई। केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक कोरोना वायरस के भारत में दस्तक देने से पहले तक देश में प्रति दिन 6,400 मट्रिक टन ऑक्सीजन का उत्पादन होता था, जिसमें चिकित्सा जरूरतों के लिए एक हजार मट्रिक टन से अधिक ऑक्सीजन की जरूरत नहीं थी।

देशभर में ऑक्सीजन सिलेंडरों की किल्लत

पंजाब में ऑक्सीजन तैयार करने वाली कंपनी हाईटेक इंडस्ट्रीज के प्रमुख आरएस सचदेव का कहना है कि कुल ऑक्सीजन उत्पादन के 70 से 80 फीसदी का इस्तेमाल ग्लास और स्टील उद्योगों द्वारा किया जाता है। ऐसे में चिकित्सा जरूरतों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडरों की आपूर्ति करने पर उद्योगों को नुकसान झेलना पड़ रहा है।

एक-दो सिलेंडरों की किल्लत पैदा होने पर समझौता किया जा सकता है, लेकिन हजारों सिलेंडरों की किल्लत से होने वाले नुकसान को झेलना मुश्किल है। इसके बावजूद हमारी प्राथमिकता चिकित्सा जरूरतों को दूर करना है। उन्होंने कहा कि कोविड के कारण चिकित्सा जरूरों के लिए ऑक्सीजन का उत्पादन बढ़ाया जाएगा। हालांकि उन्होंने कितना बढ़ाएंगे, इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी।

जरूरतों के मुताबिक नहीं हो रहा उत्पादन 

केरल स्थित मनोरमा गैसेज के प्रमुख एंथोनी जोसेफ के मुताबिक देशभर में चिकित्सा जरूरतों के लिए ऑक्सीजन की किल्लत पैदा हुई है। उन्होंने कहा कि देश में मौजूदा जरूरतों के मुताबिक हमारा उत्पादन नहीं हो पा रहा है। हालात बिगड़ जाने तक केंद्र सरकार की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने के विपक्षी दलों के आरोप को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग ने केंद्र व राज्य सरकारों के अधीन चलने वाले अस्पतालों के लिए एक लाख मट्रिक टन लिक्विड ऑक्सीजन के उत्पादन हेतु  14 अक्टूबर 2020 को सरकारी उपक्रम एचएएल (हिन्दुस्तान लॉटेक्स लिमिटेड), लाइव केयर के जरिए बिडिंग आमंत्रित किया है, लेकिन ये कोई नहीं जानता कि बिडिंग कब तय होंगे और अतिरिक्त उत्पादन कब शुरू होगा।

5 फीसदी मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत

ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया के मुताबिक देश में दर्ज हो रहे कुल कोरोना मामलों में 15 फीसदी लोगों को अस्पताल में चिकित्सा सेवाओं की जरूरत पड़ती है और उनमें 5 फीसदी मामलों में ऑक्सीजन वेंटिलेटर के जरिए आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की आवश्यकता होती है। 

यही वजह है कि कोरोना के कारण चिकित्सा जरूरतों के लिए ऑक्सीजन का इस्तेमाल पहले के मुकाबले 8 गुणा बढ़ा है। इसका दूसरा कारण लॉकडाउन के बाद से ऑक्सीजन उद्योगों के निरंतर काम करने के कारण देशभर में कुछ उद्योगों का ब्रेकडाउन हो जाना है। वार्षिक मेंटेनेन्स के तहत सालाना कुछ दिनों के लिए इन उद्योगों को बंद रखा जाता है। 

देश में कुल 2,65,046 वेंटिलेटर सपोर्टेड बेड्स

देश के सभी सरकारी अस्पतालों में गत अप्रैल तक 57,924 बेड्स को ऑक्सीजन सपोर्ट की सुविधा थी, जो अक्टूबर तक बढ़कर 2,65,046 हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 1 सितंबर 2020 तक देशभर में 43,033 लोग ऑक्सीजन थेरेपी ले रहे थे, जबकि 1 अक्टूबर तक उनकी संख्या बढ़कर 75,098 हो गई है। ऑक्सीजन की जरूरतों में इस कदर इजाफा होना स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।

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