इन शहरों में बिगड़ रहे हालात, कोरोना की दूसरी लहर के संकेत से चौकन्ना प्रशासन

21 Nov, 2020 14:56 IST|सुषमाश्री
लॉकडाउन और कर्फ्यू से संबंधित अपडेट्स

क्यों सता रहा है कोरोना की दूसरी लहर का डर?

उत्‍तर भारत में बढ़ रहे हैं कोरोना के ऐक्टिव मामले

ज्‍यादा केसेज वाले राज्‍यों में टीमें भेजेगा केंद्र

नई दिल्ली: देश में एक बार फिर कोरोना (Coronavirus) ने लोगों को डराना शुरू कर दिया है। बेशक बीच में कुछ दिनों तक हालात कुछ सामान्य से लगे। लेकिन एक बार फिर कोरोना के मामलों में लगातार होता इजाफा हमें भयभीत कर रहा है।

47 दिन बाद गुरुवार को देश में रिकवरी से नए मामलों की संख्या बढ़ी।  कोरोना के कुल 46,185 मामले सामने आए। वहीं, 45,246 मरीज ठीक हुए जबकि 583 कोरोना संक्रमितों की मौत हो गई। अब सवाल उठता है कि क्या वाकई देश में कोरोना की दूसरी लहर ने दस्तक दे दी है।

बेशक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन (Harsh Vardhan) समेत नई दिल्ली स्थित एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने यह मानने से इनकार कर दिया हो कि कोरोना के बढ़ते मामलों को देखकर यह कहना सही नहीं कि यह कोरोना का दूसरा फेज आ चुका है, बावजूद इसके हम सभी के लिए यह मान पाना कठिन हो रहा है कि इसे कोरोना का दूसरा मामला न माना जाए।

जून में आए WHO की चीफ साइंटिस्ट सौम्या स्वामीनाथन के बयान को याद करें तो उन्होंने कहा था कि कोरोना की दूसरी लहर आ सकती है क्योंकि वायरस अब भी कम्युनिटी में मौजूद है। अब सवाल यह उठता है कि क्या हम इसे कोरोना की दूसरी लहर मानें या न मानें?

गौरतलब है कि महामारी में दूसरी लहर आ रही है या नहीं, इसका पता इससे लगाया जाता है कि पहले केस तेजी से बढ़े, फिर कम होने लगे, लेकिन फिर तेजी से मामले बढ़ने लगे। 16 सितंबर को कोरोना का पीक आने के बाद इसके नए मामलों में गिरावट आने लगी थी। 16 नवंबर को देश में एक दिन में सबसे कम 28,555 नए मामले सामने आए थे। लेकिन उसके बाद से मामले फिर बढ़ने लगे हैं।

क्यों सता रहा है कोरोना की दूसरी लहर का डर?

विशेषज्ञों की मानें तो देश में कोरोना की दूसरी लहर का खतरा बढ़ गया है। मामलों में कई दिनों की गिरावट के बाद नए मामले फिर तेजी से बढ़ने लगे हैं। नए मामले बढ़ने का मतलब एक्टिव केस बढ़ना और रिकवरी रेट का घटना है।

देश में 16 सितंबर को पीक आया था। उस दिन अब तक के सबसे ज्यादा 97 हजार 860 नए मामले सामने आए थे। लेकिन, उसके बाद मामले कम होने लगे थे। पीक आने के बाद 16 नवंबर को सबसे कम 28 हजार 555 मामले आए थे। लेकिन, 19 नवंबर को 46 हजार 185 संक्रमित सामने आए। इसके अलावा कई राज्यों में हालात फिर से बिगड़ने लगे हैं। दिल्ली के अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान, केरल, हरियाणा जैसे राज्यों में भी दूसरी लहर का खतरा बढ़ रहा है।

उत्‍तर भारत में बढ़ रहे हैं कोरोना के ऐक्टिव मामले

नवंबर के महीने में जहां देश के बाकी हिस्‍सों में कोविड के ऐक्टिव केस घटे हैं, उत्‍तर भारत में इसका उल्‍टा ट्रेंड देखने को मिला है। दिल्‍ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, चंडीगढ़, राजस्‍थान और मध्‍य प्रदेश में ऐक्टिव मामलों में बढ़त देखने को मिली है। इसके मुकाबले, महाराष्‍ट्र, कर्नाटक, केरल, पश्चिम बंगाल में ऐक्टिव केसेज घटे।

शुक्रवार को 48 दिन बाद पहली बार भारत में कोविड-19 के ऐक्टिव केसेज में इजाफा हुआ। इससे पहले 48 दिन तक लगातार ऐक्टिव केसेज में गिरावट दर्ज की गई थी। यह एक संकेत है कि देश में त्‍योहारों के बाद कोरोना संक्रमण में बढ़त देखने को मिल रही है।

अभी और बढ़ सकते हैं मामले

विशेषज्ञों के अनुसार, उत्‍तर भारत में ठंड की शुरुआत के साथ मामले और बढ़ सकते हैं। दिल्‍ली, गुजरात, हरियाणा, मध्‍य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, छत्‍तीसगढ़ और राजस्‍थान में केसेज बढ़ रहे हैं। कई अनुमानों के अनुसार अगर लापरवाही बरती गई तो कोविड मामले तेजी से बढ़ सकते हैं। एक नैशनल कोविड-19 सुपर मॉडल कमिटी का अनुमान था कि अगर त्‍योहारों के मौसम में सावधानी नहीं बरती जाती तो भारत में डेली 26 लाख केसेज तक आ सकते हैं।

ज्‍यादा केसेज वाले राज्‍यों में टीमें भेजेगा केंद्र

दिवाली बीत चुकी है और छठ जारी है। ऐसे में केंद्र ने राज्‍यों से टेस्टिंग में ढिलाई न बरतने को कहा है। हरियाणा, राजस्‍थान, गुजरात और मणिपुर में केंद्र की ओर से टीमें पहले ही भेजी जा चुकी हैं। इसके अलावा उन राज्‍यों में भी टीमें भेजी जा सकती हैं जहां कोविड के मामले बढ़ रहे हैं।

दिल्‍ली में डोर-टू-डोर सर्वे की तैयारी

राजधानी में कोविड मामलों में इजाफे को देखते हुए डोर-टू-डोर अभियान चलाने की तैयारी है। इसके जरिए कंटेनमेंट जोन्‍स और घनी आबादी वाले इलाकों में शुक्रवार से कोविड-19 के लक्षणों वाले लोगों की पहचान और टेस्‍ट किए जाएंगे। यह सर्वे 5 दिन में पूरा होगा और इसके जरिए कंटेनमेंट जोन्‍स, घनी आबादी वाले इलाकों और वायरस ट्रांसमिशन के पहचाने जा चुके क्‍लस्‍टर्स के 57 लाख लोग कवर होंगे।

देश के कई इलाकों में कर्फ्यू

दिल्‍ली में नाइट कर्फ्यू

दिल्‍ली में शुक्रवार को 7,546 नए मामले सामने आए और 98 मौतें हुईं, यह भारत में सबसे ज्‍यादा है। राजधानी के अस्‍पतालों में बेड्स की कमी भी चिंता की वजह बनी हुई है। दूसरी तरफ, केंद्र सरकार ने एक्‍सपर्ट्स और कानूनी एजेंसियों से राय मांगी है कि दिल्‍ली में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए नाइट कर्फ्यू लगाया जाए या नहीं। दिल्‍ली में पहले ही शादियों में मेहमानों की संख्‍या 200 से घटाकर 50 कर दी गई है। इसके अलावा मास्‍क न पहनने पर जुर्माना बढ़ाकर 500 से 2,000 रुपये कर दिया गया है। हालांकि दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लॉकडाउन लगाने की संभावना से इनकार किया है।

गुजरात में नाइट कर्फ्यू

गुजरात में पूरी तरह नाइट कर्फ्यू को अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट में भी लागू कर दिया गया है। राजस्‍थान के 33 जिलों में धारा 144 लगा दी गई है। महाराष्‍ट्र सरकार भी दिल्‍ली से आने-जाने वाली फ्लाइट्स और ट्रेनों की लिमिट तय करने पर विचार कर रही है। उत्‍तर प्रदेश के स्‍वास्‍थ्‍य विभाग ने शुक्रवार को कोविड की दूसरी वेव का अलर्ट जारी किया। लोगों को सलाह दी गई है कि वे घरों से बाहर निकलने से परहेज करें।

मध्‍य प्रदेश के पांच जिलों में नाइट लॉकडाउन रहेगा। गुजरात में पूरी तरह नाइट कर्फ्यू को अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट में भी लागू कर दिया गया है। राजस्‍थान के 33 जिलों में धारा 144 लगा दी गई है। महाराष्‍ट्र सरकार भी दिल्‍ली से आने-जाने वाली फ्लाइट्स और ट्रेनों की लिमिट तय करने पर विचार कर रही है। उत्‍तर प्रदेश के स्‍वास्‍थ्‍य विभाग ने शुक्रवार को कोविड की दूसरी वेव का अलर्ट जारी किया। लोगों को सलाह दी गई है कि वे घरों से बाहर निकलने से परहेज करें।

कोरोना महामारी के चलते कुछ राज्‍यों को मजबूरन प्रतिबंध लगाने पड़ रहे हैं। शुक्रवार को हरियाणा और राजस्‍थान में डेली केसेज अबतक के सबसे ऊंचे स्‍तर पर पहुंच गए। मध्‍य और उत्‍तर भारत के कई राज्‍यों में मामले बढ़े हैं जिसके चलते पूरी तरह लॉकडाउन तो नहीं, लेकिन कहीं-कहीं पाबंदियां फिर से लगाई गई हैं। हरियाणा में 30 नवंबर तक स्‍कूल बंद कर दिए गए हैं।

हरियाणा में ​स्कूल रहेंगे बंद

हरियाणा में स्कूल बंद, MP-गुजरात के शहरों में नाइट कर्फ्यू, कोरोना की दूसरी लहर को लेकर अब अलर्ट पर यूपी
कोरोना महामारी के चलते कुछ राज्‍यों को मजबूरन प्रतिबंध लगाने पड़ रहे हैं। शुक्रवार को हरियाणा और राजस्‍थान में डेली केसेज अबतक के सबसे ऊंचे स्‍तर पर पहुंच गए। मध्‍य और उत्‍तर भारत के कई राज्‍यों में मामले बढ़े हैं जिसके चलते पूरी तरह लॉकडाउन तो नहीं, लेकिन कहीं-कहीं पाबंदियां फिर से लगाई गई हैं। हरियाणा में 30 नवंबर तक स्‍कूल बंद कर दिए गए हैं।

तेलंगाना में कोरोना संक्रमण के 894 नए मामले

तेलंगाना में शनिवार को कोरोना संक्रमण के 894 नए मामले सामने आए हैं, जिससे प्रदेश में संक्रमितों की कुल संख्या 2.61 लाख से अधिक हो गयी है। इसके साथ ही संक्रमण के कारण सूबे में चार और लोगों की मौत के साथ ही मरने वालों का आंकड़ा 1,423 हो गया है। सरकार ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी।

प्रदेश में 39,448 लोगों का उपचार चल रहा है। इसमें कहा गया है कि प्रदेश में अब तक 50.50 लाख नमूनों की जांच की जा चुकी है। इसके अनुसार राज्य में मृत्यु दर 0.54 प्रतिशत है जबकि राष्ट्रीय दर 1.5 प्रतिशत है। बुलेटिन में कहा गया है कि तेलंगाना में ठीक होने की दर 94.67 प्रतिशत है।

दूसरी लहर से बचने के लिए क्या कर रही हैं सरकारें?

केंद्र सरकार ने हेल्थ एक्सपर्ट की टीमें बनाई हैं, जो हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और मणिपुर में जाकर वहां के हालातों की निगरानी करेगी। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को कोरोना को काबू करने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है।

कोविड मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए हरियाणा, राजस्‍थान, मध्‍य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्‍यों ने कुछ पाबंदियां फिर से लगाई हैं। मध्‍य और उत्‍तर भारत के कई राज्‍यों में अलर्ट जारी की गई है।

मध्य प्रदेशः जिन जिलों में पॉजिटिविटी रेट 5% से ज्यादा है, वहां रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक नाइट कर्फ्यू रहेगा।

राजस्थानः 21 नवंबर से सभी जिलों में धारा-144 लागू होगी, यानी संबंधित इलाके में पांच या उससे अधिक लोग नहीं जुट सकेंगे। इसका सख्ती से पालन कराने के निर्देश जारी किए गए हैं।

दिल्लीः मास्क न लगाने वाले लोगों पर फाइन 500 रुपये से बढ़ाकर बिल्कुल चार गुना यानी 2000 रुपये कर दिया गया है।हॉटस्पॉट इलाकों में पाबंदी भी लगा दी गई है।

गुजरातः सबसे बड़े शहर अहमदाबाद में 20 नवंबर की रात 9 बजे से 23 नवंबर की सुबह 6 बजे तक कर्फ्यू लगाया गया है।

हरियाणाः स्कूल खुलने से 300 से ज्यादा बच्चे संक्रमित। अब 30 नवंबर तक बंद ही रहेंगे। रोज 30 हजार टेस्ट होंगे।

कोरोना के मामले बढ़ने के कारण

1. फेस्टिव सीजनः अक्टूबर में नवरात्रि और नवंबर में दिवाली की वजह से बाजारों में भीड़ बढ़ी। इससे संक्रमण फैल गया। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का कहना है कि दिवाली के दौरान बाजारों में लोगों की लापरवाही सामने आई। खरीदारी करते समय न तो लोगों ने मास्क लगाया और न ही जरूरी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया।

2. सर्दीः वैज्ञानिक पहले ही इस बात की चिंता जता चुके थे कि सर्दियों के मौसम में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ सकते हैं। नीति आयोग की एक रिपोर्ट में भी यही जिक्र था कि सर्दियों में कोरोना खतरनाक हो सकता है। ऐसा हुआ भी। नवंबर से देश में सर्दियां शुरू हो गई हैं और इसी महीने से कोरोना के मामले फिर बढ़ने लगे हैं।

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