Vaccine Update : देश में कोरोना वैक्सीन को लेकर अच्छे संकेत, हैदराबाद की होगी बड़ी भूमिका

16 Sep, 2020 10:00 IST|संजय कुमार बिरादर
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हैदराबाद व पुणे की कंपनियां कर रहीं तैयारी 

बायोटेक और कैडिला हेल्थकेयर का दूसरे चरण

भारत में तीन वैक्सीन का ट्रायल : ICMR

हैदराबाद : कोरोना महामारी की वैक्सीन को लेकर दुनियाभर के लोगों की नजरें हैदराबाद और पुणे शहर में स्थित दो कंपनियों पर टिकी हैं जो वैक्सीनविकसित करने और उसके उत्पादन की तैयारी में लगी हुई हैं। गौरतलब है कि दुनियाभर में 60 फीसदी से ज्यादा वैक्सीन की आपूर्ति भारत करता है। मुख्य रूप से हैदराबाद और पुणे की दो कंपनियां कुल निर्यात में 75 फीसदी से अधिक योगदान देती हैं।

निजामों के शहर के रूप में मशहूर हैदराबाद अब दुनिया का वैक्सीन कैपिटल के रूप में अपनी पहचान बनाने लगा है। उसी तरह, महाराष्ट्र की सांस्कृतिक कैपिटल और कई औद्योगिक इकाइयों वाले पुणे भी वैक्सीन तैयार करने के मामले में काफी आगे हैं। भारत बॉयोटेक, शांता बॉयोटेक्स और पुणे की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया कोरोना काल में वैक्सीन तैयार करने के मामले में सबसे आगे है।

दुनियाभर में 180 वैक्सीन की तैयारी

विश्व के प्रमुख शोधकर्ताओं के मुताबिक दुनियाभर में 180 से ज्यादा कोरोना वैक्सीन विकसिन तैयार किए जा रहे हैं और इनमें करीब 25 वैक्सीन टेस्ट के अंतिम ट्रायल यानी उनका मनुष्यों पर पड़ने वाले असर का आकलन का काम जारी है। दुनियभार में विभिन्न गंभीर बीमारियों से जुड़ी 60 फीसदी वैक्सीनों की आपूर्ति करने में सक्षम भारतीय दवा कंपनियों के पास तकनीक के साथ-साथ आधुनिक मशीनें भी उपलब्ध हैं। यही वजह है कि कोरोना वैक्सीन को विकसित करने में जुटे कई देशों के शोधकर्ता और संस्थान उनके कमर्शियल प्रोडक्शन के लिए भारतीय मुख्य रूपसे हैदराबाद व पुणे की कंपनियों से संपर्क कर रहे हैं।

हैदराबाद व पुणे की कंपनियां कर रहीं तैयारी 

कोरोना महामारी से मुक्ति पाने के लिए वैक्सीन चाहे कोई भी विकसित करें, लेकिन इस बात से नकारा नहीं जा सकता कि उनका कमर्शियल प्रोडक्शन भारत में नहीं होगा। इसी को देखते हुए हैदराबाद और पुणे की कंपनियां अपनी तकनीक और उत्पादन क्षमता को आवश्यकता के अनुरूप बढ़ाने के काम में जुट गई हैं। सैनोफी की वैक्सीन का थार्ड ट्रायल चल रहा है और वर्ष 2021 की शुरूआत उसके सभी चरण के ट्रायल पूरे होने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि इस वैक्सीन का कमर्शियल प्रोडक्शन हैदराबाद स्थित शांता बॉयोटेक्निक्स में होगा। अमेरिकी कंपनी नोवावैक्स सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के साथ मिलकर कोरोना वैक्सीन का 200 करोड़ खुराक तैयार करने जा रही है। 

सैनोफी ने कुछ ही साल पहले शांता बॉयोटेक्निक्स को टेकओवर किया था। यही नहीं, हैदराबाद की ई-लिमिटेड का अमेरिका के टेक्सास के बॉयलोर कॉलेज ऑफ मेडिसिन और जॉनसन एंड जॉनसन के साथ वैक्सीन प्रोडक्शन के लिए डील हुआ है। यही नहीं, इंडिया इम्यूनोलॉजिकल लिमिटेड करीब दो करोड़ वैक्सीन उत्पादन करने की क्षमता रखती है।  वह ऑर्डर के आधार पर वैक्सीन निर्माण के लिए तैयार है। बताया जाता है कि कंपनी की रूसी वैक्सीन स्पूतनिक-5 के व्यावसायिक उत्पादन के लिए बातचीत भी चल रही है। अरविंदो फार्मा नामक कंपनी भी कोरोना वैक्सीन के निर्माण में शामिल हो गई। उसने अनुसंधान से जुड़ी एक अमेरिकी कंपनी से करार किया है और मार्च 2021 तक वैक्सीन उत्पादन क्षमता से लैस होने का दावा करती है।

भारत में तीन वैक्सीन का ट्रायल : ICMR

इस बीच, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने मंगलवार को कहा कि भारत में कोरोना के खिलाफ तीन वैक्सीन का ट्रायल किया जा रहा है और इसमें से एक को जल्द ही मंजूरी मिलने के बाद तीसरे चरण का ट्रायल शुरू हो जाएगा।

स्वास्थ्य मंत्रालय की ब्रीफिंग के दौरान आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव ने कहा- कैडिला हेल्थकेयर और भारत बोयोटेक की तरफ से तैयार की जा रही कोविड-19 ने ट्रायल का पहला चरण पूरा कर लिया है जबकि मंजूरी मिलने के बाद सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) तीसरे चरण का ट्रायल शुरू करेगी। भार्गव ने आगे कहा कि पुणे की दवा निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट की तरफ से 14 जगहों पर फेज-3 के दौरान 1500 वालेंटियर्स पर दवा का ट्रायल किया जाएगा।

आईसीएमआर की तरफ से यह बयान ऐसे वक्त पर आया है जब एक दिन पहले सीरम इंस्टीट्यूट की तरफ से यह कहा गया कि हर किसी के लिए 2024 से पहले वैक्सीन उपलब्ध नहीं हो पाएगी। फाइनेंशियल टाइम्स से सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला ने कहा था- इस धरती पर हर किसी को वैक्सीन मिलने में चार से पांच साल लग जाएंगे।

बायोटेक और कैडिला हेल्थकेयर का दूसरे चरण

इससे पहले, दिन में स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने लोकसभा में बताया था किया बायोटेक और कैडिला हेल्थकेयर का दूसरे चरण का ट्रायल जारी है। उन्होंने यह भी बताया कि रूस की तरफ से तैयार की गई वैक्सीन पर भी सहयोग को लेकर चर्चा जारी है।हालांकि, औपचारिक स्टडीज की शुरुआत नहीं की गई है।

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और आईसीएमआर की कोरोना वैक्सीन को तैयार करने में साझेदारी पर बोलते हुए चौबे ने कहा- पहली वैक्सीन ChAdOx1-S ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका की तरफ से विकसित गैर-प्रतिकृति वायरल वेक्टर वैक्सीन (non-replicating viral vector vaccine) है। आईसीएमआर की तरफ से 2/3 चरण का ट्रायल 14 क्लिनिकल ट्रायल साइट पर चल रहा है। आईसीएमआर- नेशनल इंस्टीट्यट ऑफ रिसर्च इन ट्यूबरक्यूलोसिस, चेन्नई इसकी अगुवाई कर रहा है।

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