कृषि सुधार विधेयकों पर वोटिंग के दौरान राज्यसभा में हंगामा, बिल की कॉपी फाड़ी, माइक तोड़ा

20 Sep, 2020 10:25 IST|Sakshi
राज्यसभा में हंगामा

नई दिल्ली :  विपक्ष से लेकर सरकार में शामिल अकाली दल की ओर से भारी विरोध के बावजूद राज्यसभा में पेश किए गए कृषि सुधार विधेयकों पर जमकर हंगामा हुआ। वोटिंग के समय तो बात इतनी आगे बढ़ गई कि सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। टीएमसी सांसद डेरेक ओब्रायन सहित विपक्ष के कई नेताओं ने बिल की कॉपी फाड़ी तो सभापति चेयर का माइक भी तोड़ डाला।

विधेयकों पर चर्चा के बाद जब कृषि मंत्री जवाब दे रहे थे उस दौरान उपसभापति ने बिल पर वोटिंग तक कार्यवाही बढ़ाए जाने को लेकर सांसदों की राय मांगी। इस दौरान सत्ता पक्ष ने हां में जवाब दिया तो विपक्ष के कई सांसद कार्यवाही टालने की मांग को लेकर हंगामा करने लगे। हंगामे के बीच कृषि मंत्री ने अपनी बात पूरी की और बिल को लेकर आए संशोधन प्रस्ताव पर वोटिंग शुरू हुई। ध्वनिमत से संशोधन प्रस्ताव खारिज होने के बाद मतविभाजन की मांग को लेकर अभूतपूर्व हंगामा हुआ। टीएमसी सांसद डेरेक ओ,ब्रायन सहित कई सांसद चेयर तक पहुंच गए। कुछ सांसदों ने कागज फाड़े तो कुछ ने माइक को तोड़ डाला।

इससे पहले  सरकार ने कृषि संबंधित विधयकों को राज्यसभा में पेश किया। कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, 2020 और  कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक, 2020  राज्यसभा में पेश हो गया है।

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि ये बिल किसानों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले हैं। किसानों को अपनी फसल किसी भी स्थान से किसी भी स्थान पर मनचाही कीमत पर बेचने की स्वतंत्रता होगी। उन्होंने कहा कि बिलों के बारे में कई तरह की धारणाएं बनाई गई हैं। यह बिल एमएसपी से संबंधित नहीं है। प्रधानमंत्री ने भी ने कहा है कि एमएसपी जारी है और आगे भी जारी रहेगी। इन विधयको के माध्यम से किसानों के जीवन में बदलाव आएगा।   

क्या केंद्रीय मंत्री ने एक अफवाह की वजह से इस्तीफा दे दिया: संजय राउत

जब पूरा देश लॉकडाउन में घर में बैठा था तो किसान खेत में काम कर रहा था। इसलिए हम आज अनाज खा रहे हैं। इस बिल के पास होने के बाद इनकम डबल हो जाएगी और किसान आत्महत्या नहीं करेगा और उनके बच्चे भूखे नहीं सोएंगे। अब आप आश्वस्त करते हैं तो यह सरकार की सबसे सफलता होगी। इस बिल को लेकर पूरे देश में विरोध नहीं हो रहा है इस बिल को लेकर जरूर कोई भ्रम है। क्या केंद्रीय मंत्री ने एक अफवाह की वजह से इस्तीफा दे दिया। क्या वो कान के इतने कच्चे थे। अभी तो शुरू नहीं किया आप खत्म करने के लिए कह रहे हैं। खेती धीरे-धीरे कॉरपोरेट के हाथ में जा रही है।

बिल को लेकर राज्यसभा में बीएसपी ने क्या कहा, जानें

सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि किसानों को अपील करने के लिए 30 दिन का समय दिया है और ट्रेडर को अपील करने के लिए 60 दिन का समय दिया है। 

कांग्रेस के सांसद प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस बिल का विरोध करती है। पंजाब और हरियाणा के किसानों का मानना ​​है कि ये बिल उनकी आत्मा पर हमला है। इन विधेयकों पर सहमति किसानों के डेथ वारंट पर हस्ताक्षर करने जैसा है। किसान एपीएमसी और एमएसपी में बदलाव के खिलाफ हैं। 

बिल पर चर्चा के दौरान भाजपा के सांसद भूपेंद्र यादव ने कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले ये बताए कि पिछले 60 साल में किसानों की आय नीचे की ओर क्यों गई। कांग्रेस किसानों की बहुत बात करती है, लेकिन उनके लिए कुछ नहीं करती।  

कृषि बिल पर CPI(M) के सांसद केके रागेश ने कहा कि यह कॉर्पोरेट्स के लिए पैकेज है। उन्होंने कहा कि कृषि राज्य का विषय है और राज्यों से अधिकार छीना जा रहा है। 
 

Load Comments
Hide Comments
More News
आंध्र-प्रदेश
मुख्य समाचार
.