आडवाणी, जोशी और कल्याण सिंह नहीं होंगे राम-मंदिर भूमि पूजन में शामिल, जानें क्यों?

3 Aug, 2020 18:12 IST|Sakshi

अयोध्या राम-मंदिर भूमि पूजन में नहीं बुलाया

आडवाणी, जोशी और कल्याण को नहीं मिला न्यौता

तीनों अयोध्या आंदोलन के शीर्ष नेता

नई दिल्ली: अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन में एल के आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और कल्याण सिंह शामिल नहीं होंगे। पांच अगस्त को अयोध्या में भूमि पूजन होना है जिसके लिए 48 घंटे से भी कम समय बाकी है। भूमि पूजन के लिए करीब 200 लोगों को न्यौता भेजा गया है। इस लिस्ट में वरिष्ठ भाजपा नेता और राम मंदिर आंदोलन के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का नाम नहीं है। 

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय के मुताबिक भूमि पूजन कार्यक्रम में भारत ही नहीं बल्कि विदेशों के भी संतों को न्यौता भेजा गया है। भारत के करीब तमाम हिस्सों से संत महात्मा इस आयोजन में जुटेंगे। संत महात्माओं की कुल संख्या करीब 175 होगी। इसमें पद्मश्री पा चुके फैजाबाद के मोहम्मद यूनुस जैसे मुसलमान भी शामिल होंगे। कुल मिलाकर धर्म निरपेक्षता का भी खयाल रखा गया है। 

आडवाणी और कल्याण सिंह को क्यों नहीं बुलाया?

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय ने दलील दी कि कुछ अहम नेता 90 साल की उम्र के पार है। लिहाजा उनके स्वास्थ्य का खयाल करते हुए न्यौता नहीं भेजा गया है। हालांकि राय के मुताबिक शीर्ष सम्मानित नेताओं से व्यक्तिगत तौर पर फोन करके इस बारे में खेज जाहिर किया गया है। चंपत राय ने पत्रकारों से ही सवाल किया कि आखिर 90 साल के व्यक्ति कैसे आ पाएंगे। आडवाणी जी कैसे पाएंगे। चंपत राय ने कहा कि मैंने कल्याण सिंह से कहा कि आपकी उम्र बहुत अधिक है लिहाजा कोरोना का खयाल करते हुए कार्यक्रम में शरीक न हों।  

आडवाणी के लिए राम मंदिर शिलान्यास भावुक पल होगा

राम जन्म भूमि आंदोलन का शंखनाद करने वाले नेताओं में लालकृष्ण आडवाणी का नाम सबसे पहले आता है। संघर्ष के तीस साल बाद आज जब उपलब्धि का दिन होगा तब आडवाणी जी मौके पर मौजूद नहीं होंगे। कभी नरेंद्र मोदी आडवाणी जी की रथयात्रा में सारथी की भूमिका में थे। आज आडवाणी जी हाशिये पर हैं और नरेंद्र मोदी खुद कृष्ण की भूमिका में।

माना जाता है कि नरेंद्र मोदी ने अयोध्या आंदोलन और पूरे विवाद पर बहुत कम बयान दिया है। हालांकि नेपथ्य में उनका रोल काफी अहम माना जाता है। मोदी के लिए कहा जाता है कि उन्होंने अयोध्या मसले पर फल की चिंता किये बगैर पसीना बहाया। अब फल मिला है तो सब लोग मोदी की वाह वाही में जुटे हैं। समय का पहिया ऐसा घूमा कि आडवाणी लम्बी उम्र के पड़ाव पर हाशिये में पहुंच गए। 

कहीं आडवाणी, जोशी कल्याण सरीखे नेताओं का अपमान तो नहीं? 

राम मंदिर भूमि पूजन में आंदोलन के तीनों शीर्ष नेताओं का न पहुंचना आने वाले समय में राजनीति का सबब भी बन सकता है। मुरली मनोहर जोशी भी साये की तरह इस आंदोलन से जुड़े रहे। कल्याण सिंह ने तो अपनी कुर्सी भी गंवाई साथ ही तत्कालीन राज भी खोया था। तीनों नेताओं के भूमि पूजन में शरीक न होने को लेकर विपक्षी पार्टियां भी चुटकी ले रही है।

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