आखिर क्यों कांग्रेस में उठने लगे हैं बगावत के सुर, पार्टी से ज्यादा अपने भविष्य की चिंता तो नहीं..!

23 Nov, 2020 13:13 IST|सुषमाश्री
गुलाम नबी आजाद

दिसंबर में है कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष का चुनाव

चुनावी रेस में निचले पायदान पर कांग्रेस

सिब्बल ने हाईकमान पर साधा था निशाना

नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी (Congress Party) के अंदर एक बार फिर से घमासान मचा हुआ है। कपिल सिब्बल (Kapil Sibbal) के बाद अब पार्टी के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा (RajyaSabha) में पार्टी के लीडर गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) ने कांग्रेस पार्टी और उसके नेतृत्व पर फाइव स्टार कल्चर (Five Star Culture) में रहने का आरोप लगाते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं पर निशाना साधा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि अगर हम जमीन से नहीं जुड़ेंगे तो कभी भी चुनाव नहीं जीतेंगे। इस तरह धीरे-धीरे कांग्रेस पार्टी हाशिए पर चली जाएगी। एक दिन ऐसा भी हो सकता है कि पार्टी पूरी तरह से खत्म ही हो जाए।

बता दें कि गुलाम नबी आजाद ने इतना ही नहीं कहा, बल्कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को इशारों-इशारों में 'नया लड़का' तक कह डाला है। गुलाम नबी आजाद ने कहा कि पार्टी का ढांचा पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है और पार्टी का कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क भी टूट चुका है। ऐसे में कांग्रेस पार्टी से किसी भी प्रदेश के चुनाव में जीत की उम्मीद लगाना अब बिल्कुल व्यर्थ है।

दिसंबर में है कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष का चुनाव

गौरतलब है कि दिसंबर के महीने में कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष का संभावित चुनाव होना है। अगस्त के पहले भी पार्टी अध्यक्ष के पद को लेकर कई बार विवाद खड़ा हो चुका है। कांग्रेसी नेताओं ने चिट्ठी लिखने के साथ-साथ कई बार मीडिया और सोशल मीडिया में अपने बयान जारी करके पार्टी के नेताओं की किरकिरी भी कराई है। ऐसे में एक बार फिर गुलाम नबी आजाद जैसे नेता का आवाज उठाना कहीं न कहीं यह साफ कर देता है कि पार्टी के अंदर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

चुनावी रेस में निचले पायदान पर कांग्रेस

गुलाम नबी आजाद ने साफ तौर पर कहा कि कांग्रेस पार्टी चुनावी रेस में सबसे निचले पायदान पर खड़ी है। कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं का कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क टूट चुका है। ब्लॉक स्तर के लोगों के साथ जिलास्तरीय लोगों का शायद आज कोई कनेक्शन नहीं रह गया है। ज्यादातर नेता फाइव स्टार होटल के स्टाइल में लड़ने और लड़ाने का काम करते हैं। ऐसा नहीं हो सकता कि हमें जमीनी हकीकत समझ नहीं आएगी और उनके हिसाब से आगे की चुनावी रणनीति नहीं बनाई जा सकेगी। लेकिन पार्टी में जमीनी स्तर पर काम करने वाले रह ही नहीं गए हैं। यही वजह है कि पार्टी इतने बुरे दौर से गुजर रही है। आज भी अगर पार्टी के नेता जमीनी स्तर पर काम करना शुरू कर दें तो कांग्रेस पार्टी अपना पुराना खोया हुआ जनाधार और गौरव फिर से हासिल कर सकती है।

बता दें कि पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस की राज्य, जिला और ब्लॉक इकाइयों में सभी पदों के लिए चुनाव कराने की वकालत की ​है। उन्होंने कहा, ''हमें पीसीसी, डीसीसी और बीसीसी को निर्वाचित करना चाहिए और इस संबंध में पार्टी के लिए एक कार्यक्रम बहुत जरूरी है। आजाद ने कहा कि वह कांग्रेस के अन्य नेताओं के साथ पार्टी के हित में इन मुद्दों को उठा रहे है। उन्होंने आगे कहा,''हम सुधारवादी हैं, विद्रोही नहीं। हम नेतृत्व के खिलाफ नहीं हैं। हम तो सुधारों का प्रस्ताव देकर नेतृत्व के हाथ मजबूत कर रहे हैं।''

सिब्बल ने हाईकमान पर साधा था निशाना

आपको बता दें कि इसके पहले कपिल सिब्बल ने भी कांग्रेस हाईकमान पर निशाना साधा था। साथ ही यह भी कहा था कि राहुल गांधी खुद भी यह कह चुके हैं कि वह कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष नहीं बनना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष नेहरू-गांधी परिवार से नहीं होना चाहिए। फिर पार्टी जान-बूझकर क्यों इसी ढर्रे पर चल रही है? एक राष्ट्रीय स्तर की पार्टी बिना अध्यक्ष के कैसे काम कर सकती है? उन्होंने यह भी कहा कि 10 साल ऐसे ही गुजर जाने के बावजूद आज भी पार्टी नेताओं को इसकी चिंता नहीं है।

कहना गलत न होगा कि कांग्रेस पार्टी के कई दिग्गज नेता पार्टी समेत अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर परेशान हैं। तभी तो वह कभी राहुल गांधी के बहाने तो कभी पार्टी के भविष्य के बहाने, अपनी अपनी बातें उठाते रहते हैं। पार्टी के कई नेताओं का तो यह भी मानना है कि पार्टी के अंदर कई ऐसे नेता हैं, जो जानबूझकर राहुल गांधी और सोनिया गांधी को ही आगे करके अपनी राजनीतिक कुर्सी सेट करना चाहते हैं, चाहे पार्टी गर्त में ही क्यों न चली जाए! एक एक कर कई नेता इस मामले में अपनी आवाज भी उठा रहे हैं। कपिल सिब्बल के बाद अब गुलाम नबी आजाद ने भी जिस तरह की बयानबाजी की है, उससे साफ लग रहा है कि आने वाले दिनों में पार्टी की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं।

नेताओं को सताने लगी है भविष्य की चिंता

कांग्रेस पार्टी के ऐसे ही कई नेताओं को अब अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है। दरअसल, मौजूदा हालात में वे न तो लोकसभा चुनाव लड़कर जीत सकते हैं और न ही उन्हें राज्यसभा में जाने का मौका मिलता दिख रहा है। ऐसी स्थिति में उन्हें अपने भविष्य की चिंता नहीं होगी तो फिर कब होगी? स्पष्ट है कि आने वाले कुछ दिनों में कांग्रेस पार्टी के ऐसे नेता अपना राजनीतिक अस्तित्व भी खोने लगेंगे। यही वजह है कि इन नेताओं को अपने राजनीतिक भविष्य की चिंता सताने लगी है। यही वजह है कि धीरे धीरे करके कांग्रेस के नेतृत्व और उसके भविष्य को लेकर वे अपनी चिंता जताने लगे हैं।

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