जानिए किसे मिलेगा अमृत और किसके लिए 'शिव' को पीना पड़ रहा है विष, MP में नई उठापटक शुरू

1 Jul, 2020 20:14 IST|Sakshi

भोपाल : सत्ता कांटों का ताज होता है, फूलों का नहीं... कहावत अक्सर हमें सुनने को मिल जाता है। लेकिन इन दिनों इसे बेहद करीब से महसूस भी कर रहे हैं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान। दरअसल, कमलनाथ सरकार गिराने और अपनी सरकार बनाने के सौ से ज्यादा दिन गुजर जाने के बाद आखिरकार शिवराज सिंह ने मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारी कर ली है। शिवराज सरकार में गुरुवार को मंत्रिमंडल विस्तार होना लगभग तय है, हालांकि इसके लिए बकौल शिवराज सिंह चौहान, उन्होंने बाबा भोलेनाथ की तरह ही विष पी लिया है।

असल में, मंत्रिमंडल विस्तार की घोषणा करने के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक ऐसी बात कह गए, जिसने मध्यप्रदेश की राजनीति में चर्चा का माहौल गर्म कर दिया है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान सीएम शिवराज ने खुद की तुलना भगवान शिव से की और मंत्रिमंडल विस्तार में आ रही दिक्कतों की तुलना खुद के विष पीने से कर गए।

सुखद नहीं रहा 100 दिन का सफर
जब एक पत्रकार ने उनसे पूछा कि अमृत किसको मिलेगा और विष किसे? तो इस पर सीएम शिवराज ने कहा कि मंथन से अमृत ही निकलता है, विष तो शिव पी जाते हैं। इसके बाद शिवराज सिंह चौहान ने साफ कर दिया कि गुरुवार को मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल शपथ ले लेगा। चौहान का यह बयान यह साफ कर रहा है कि इस बार पिछले 100 दिनों का उनका सफर सुखद नहीं रहा और न आगे रहने वाला है।

मंत्रिमंडल विस्तार में सिंधिया को खुश करने की चुनौती
यह तो सभी जानते हैं कि ज्योतिरादित्य सिंधिया की वजह से मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिरी और शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर से मुख्यमंत्री बने। ऐसे में स्वभाविक है कि सिंधिया मंत्रिमंडल में अपने समर्थकों के लिए काफी कुछ चाहते होंगे। सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर 16 पूर्व विधायक और 6 पूर्व मंत्री बीजेपी में आए हैं। जो छह लोग कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे, उन्हें शिवराज सरकार में भी ओहदा चाहिए होगा। इसके अलावा 16 और पूर्व विधायक भी कांग्रेस से बगावत करने के एवज में मंत्री पद की चाहत पाले हुए बैठे होंगे।

बीजेपी के लिए आसान नहीं यह डगर
सिंधिया समर्थकों में से तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत कैबिनेट में पहले से ही शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार बीजेपी ने 6 लोगों के अलावा बिसाहूलाल सिंह, एंदल सिंह कंसाना और हरदीप सिंह डंग को मंत्री पद का आश्वासन दिया था। वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया कैंप के ही इमरती देवी, प्रद्युमन सिंह तोमर, प्रभुराम चौधरी और महेंद्र सिंह सिसौदिया का भी मंत्री बनना तय माना जा रहा है।

कांग्रेसी नेता शिवराज की हालत पर ले रहे चुटकी
कांग्रेसी नेता कहते हैं कि सिंधिया को खुश करना इतना आसान काम नहीं है। पूर्व मंत्री सज्जन कुमार ने कहा कि सिंधिया कोई ऐसे वैसे नेता नहीं हैं कि जिन्हें किसी बात के लिए मना लिया जाए। ज्योतिरादित्य सिंधिया को संतुष्ट करना आसान काम नहीं है, यह इस बार न केवल शिवराज सिंह चौहान बल्कि पूरी बीजेपी को पता चल जाएगा।

नरोत्तम मिश्रा चाहते हैं शिवराज की जगह
सूत्र बताते हैं कि कमलनाथ की सरकार गिराने में अहम रोल निभाने वाले नरोत्तम मिश्रा तो मुख्यमंत्री की कुर्सी पर ही बैठने की लालसा रखे हुए हैं। हालांकि दिल्ली हाईकमान ने फिलहाल उनकी इच्छा दबा दी है। उम्मीद की जा रही है कि नरोत्तम मिश्रा को संतुष्ट करने के लिए उपमुख्यमंत्री का पद दिया जा रहा है। इसके अलावा नरोत्तम मिश्रा भी मंत्रिमंडल में अपने समर्थक विधायकों को जगह दिलाना चाहते हैं।

सिंधिया और नरोत्तम को खुश करना टेढ़ी खीर
भोपाल के राजनीतिक गलियारे में चर्चा है कि सिंधिया और नरोत्तम को खुश करने के फेर में शिवराज सिंह चौहान अपनी पसंद के नेता को भी मंत्री पद नहीं दे पा रहे हैं। शायद इसी बात को जाहिर करने के लिए सीएम शिवराज ने पत्रकार से कहा कि समुद्र मंथन से निकला विष तो खुद शिव पीते हैं और अमृत लोगों में बंटता है।

शिवराज के बयान पर कमलनाथ का तंज
जिनकी कुर्सी छीनकर फिलहाल उस पर सीएम शिवराज ने कब्जा किया हुआ है, उन पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शिवराज के विष वाले बयान पर तंज कसते हुए ​ट्वीट किया है, मंथन इतना लंबा हो गया कि अमृत तो निकला नहीं, सिर्फ़ विष ही विष निकला है। मंथन से निकले विष को तो अब रोज़ ही पीना पड़ेगा, क्योंकि अब तो कल से रोज़ मंथन करना पड़ेगा। अमृत के लिए तो अब तरसना ही तरसना पड़ेगा। इस विष का परिणाम तो अब हर हाल में भोगना पड़ेगा।'

भाजपा नए चेहरों पर दांव लगाने के मूड में
वहीं, खबर यह भी है कि मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान सरकार के मंत्रिमंडल के दूसरे विस्तार के क्रम में भाजपा नए चेहरों को तरजीह देने का मन बना चुकी है। पार्टी के इसी प्रयास पर कुछ पुराने और अनुभवी नेता ऐतराज भी दर्ज करा रहे हैं। राज्य में सत्ता बदलाव हुए लगभग तीन माह का वक्त गुजर गया है। इस दौरान भाजपा संतुलित, स्थायी और नए चेहरों को शामिल करने की कोशिश में लगी रही। मंत्रिमंडल विस्तार में हुई देरी का कारण इसे भी माना जा रहा है। सूत्रों के मु​ताबिक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की दिल्ली में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से कई दौर की चर्चा हो चुकी है और नामों पर भी विचार लगभग पूरा हो चुका है।

बीजेपी नए चेहरों को देना चाहती है मौका
गौरतलब है कि कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को राज्यसभा भेजा जा चुका है, वहीं उनके साथ कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आने वाले तत्कालीन विधायकों में से अधिकांश को मंत्री बनाने पर पहले से ही सहमति बन चुकी है। दो मंत्रियों को पहले ही विस्तार में जगह मिल चुकी है और नौ से 10 और ऐसे सदस्य मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले हैं, जो सिंधिया के साथ भाजपा में आए थे। वहीं, दूसरी ओर भाजपा को 15 नामों का चयन करना है। पार्टी की कोशिश है कि इन 15 नामों में आधे लगभग सात से आठ पुराने और अनुभवी चेहरे हों तो इतने ही नए चेहरों को जगह दी जाए। इस स्थिति में कई अनुभवियों के नाम कटने की संभावना बनी हुई है, जिन लोगों के नाम कटने वाले हैं, वह पार्टी पर परोक्ष रूप से दबाव बनाने में लगे हैं।

मध्य प्रदेश में भाजपा की सियासत पर गौर करें तो एक बात साफ होती है कि पार्टी अब युवा वर्ग को आगे करने का मन बना चुकी है। पहले प्रदेश अध्यक्ष की कमान विष्णु दत्त शर्मा को सौंपी गई। उसके बाद शर्मा ने राज्य में जितने भी जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की है, उनमें अधिकांश युवा और नए चेहरे हैं। अब पार्टी सरकार में भी नए चेहरों को जगह देना चाहती है। राजनीतिक विश्लेषक अरविंद मिश्रा का मानना है कि भाजपा प्रदेश संगठन के साथ सरकार के स्वरूप में बदलाव लाना चाहती है। यह उसकी आगामी रणनीति का हिस्सा भी है।

पार्टी में उपजे असंतोष पर काबू पाना भी मुश्किल
अगर पार्टी इस पर अमल करती है तो इससे वरिष्ठ नेताओं के मंत्री बनने में अड़चन आएगी। ऐसा होने पर पार्टी में असंतोष की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। अब देखना यह है कि पार्टी अपने स्वरूप को बदलने के साथ-साथ इस असंतोष को किस तरह से काबू में रखती है। भाजपा सूत्रों का दावा है कि मंत्रिमंडल का गुरुवार को विस्तार हो सकता है। प्रभारी राज्यपाल आनंदी बेन पटेल भी बुधवार को आकर गुरुवार तक रुकने वाली हैं। पहले उनके बुधवार को ही लौटने की चर्चाएं थीं। जिन नेताओं के नामों को लेकर संशय बना हुआ है, वे लगातार संगठन के सामने अपनी बात रख रहे हैं।

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