आखिर क्यों मजबूर हैं युवा वोटर्स, क्यों चुनते हैं दो-तीन गुना अधिक उम्र वाले प्रतिनिधि, जानिए...

20 Sep, 2020 22:18 IST|सुषमाश्री
युवा वोटर्स की मजबूरी

युवा मतदाताओं की संख्या तीन करोड़ से ज्यादा

अन्य युवाओं को नहीं मिल पाता टिकट

राजद के पास सबसे ज्यादा युवा विधायक

पटना: इसे विडंबना ही कहेंगे कि देश में आज सबसे ज्यादा युवा वोटर हैं, बावजूद इसके उनके द्वारा चुने जाने वाले ज्यादातर उम्मीदवार उनसे तीन गुना अधिक उम्र वाले होते हैं। एडीआर की रिपोर्ट की मानें तो हमारे युवा मतदाताओं के पास इसके अलावा कोई चारा नहीं होता।

युवा उम्मीदवारों की कमी

दरअसल, जो भी युवा उम्मीदवार होते हैं, उनकी पृष्ठभूमि राजनीतिक होती है इसलिए उन्हें प्रत्याशी बनने का मौका मिल जाता है। अन्यथा प्रत्याशी बनने के लिए किसी भी उम्मीदवार को लंबे राजनीतिक सफर से होकर गुजरना होता है। इस सफर में वे युवा से अधेड़ उम्र के हो चुके होते हैं।

युवा मतदाताओं के लिए मुहिम

बहरहाल, हम आपको बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार बड़ी संख्या में युवा वोटर अपने मताधिकार का प्रयोग करने वाले हैं। चुनाव आयोग ने 18 की उम्र पार कर चुके मतदाताओं को अधिक-से-अधिक संख्या में मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की मुहिम चलाई है। इंटरनेट पर भी नाम जोड़े जा रहे हैं। बड़ी संख्या में युवा मतदाता आगे आ भी रहे हैं, पर युवा वोटरों के सामने एक बड़ी समस्या अपने से दोगुना-तीन गुना अधिक उम्र वाले प्रतिनिधि चुनने की है।

युवा मतदाताओं की संख्या तीन करोड़ से ज्यादा

पहली जनवरी, 2020 को तैयार मतदाता सूची के मुताबिक प्रदेश में 18 से 39 साल के युवा मतदाताओं की संख्या तीन करोड़ 66 लाख 34 हजार से अधिक यानी कुल मतदाता सात करोड़ 18 लाख के करीब आधी है। दूसरी ओर मौजूदा विधानसभा में 25 से 30 साल के उम्र के महज पांच विधायक हैं, जबकि 31 से 40 की उम्र वाले विधायकों की संख्या 32 है।

अन्य युवाओं को नहीं मिल पाता टिकट

राजद के तेजस्वी यादव सबसे कम उम्र के विधायक हैं। वहीं, इन्हीं के दल के श्रीनारायण यादव की उम्र सबसे अधिक है। उम्र के मामले में कानूनी प्रावधानों के अनुसार कोई भी 25 वर्ष का युवक विधानसभा का चुनाव लड़ सकता है, लेकिन आबादी के अनुपात में राजनीतिक दलों से युवाओं को राजनीतिक हिस्सेदारी नहीं मिल रही है।

पृष्ठभूमि ही रखता है मायने

2015 के विधानसभा चुनाव में पांच युवा विधायक के पिता भी नेता आंदोलन व नारेबाजी में आगे रहने वाले युवा नेता विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार तलाशने के समय सामाजिक और दूसरे समीकरण की आड़ में पीछे छूट जाते हैं। जिन युवाओं को टिकट मिल भी गया तो उनमें अधिकतर की पृष्ठभूमि राजनीतिक घराने की रही होती है। 2015 के विधानसभा चुनाव में पांच युवा विधायकों में तेज प्रताप यादव, तेजस्वी यादव व राहुल तिवारी के पिता भी राजनेता रहे हैं।

एडीआर की रिपोर्ट

The Association for Democratic Reforms (ADR) एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार 2015 के चुनाव में कुल 3450 उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे, जिनमें 25 से 30 की उम्र वाले महज 357 उम्मीदवार रहे। 31 से 40 उम्र वाले उम्मीदवारों की संख्या 1063 रही। वहीं, 41 से 50 की उम्र वाले प्रत्याशियों की संख्या 1049 रही।

राजद के पास सबसे ज्यादा युवा विधायक

पार्टी आधार पर देखा जाए तो राजद में सबसे अधिक युवा विधायक जीत कर आए। 25 से 35 साल के उम्र वाले विधायकों की संख्या राजद में आठ रही। 36 से 45 साल के उम्र वाले विधायक राजद में 24 जीत कर आए। दूसरी ओर इसी उम्र ग्रुप में सबसे अधिक जदयू के 26 विधायक जीत कर सदन पहुंचे।

दलगत आंकड़ा

हालांकि, 25 से 35 साल के विधायकों की जदयू में संख्या एक ही रही। कांग्रेस के 27 विधायकों में चार की उम्र 25 से 35 साल के बीच रही है, जबकि 36 से 45 साल के विधायकों की संख्या छह रही। भाकपा माले के एक विधायक 36 से 45 साल के रहे। यही स्थिति लोजपा की भी है।

युवा विधायकों की संख्या महज 15

25 से 35 साल के युवा विधायकों की संख्या कुल 15 रही है। 36 से 45 साल के उम्र वाले विधायकों की संख्या 72 रही, जबकि 46 से 55 साल उम्र वाले विधायकों की संख्या 79, 56 से 65 साल उम्र वाले विधायकाें की संख्या 56 और 66 से 75 उम्र वाले विधायक 20 जीत कर आए। इसी प्रकार 76 से अधिक उम्र वाले विधायकों की संख्या एक है।

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