चुनाव बाद बिहार में कोरोना विस्फोट की आशंका से इनकार नहीं, देखिये उमड़ती भीड़ का आलम

29 Oct, 2020 21:26 IST|विजय कुमार
तेजस्वी यादव के चॉपर के पास उमड़ी भीड़

पटना: बिहार में चुनावों के दौरान भीड़ और कोरोना वायरस के प्रति बेखौफ अंदाज हैरान करने वाला है। खासकर नेताओं के हेलिकॉप्टर के पास उमड़ती ग्रामीणों की भीड़ खतरे का संकेत है। महागठबंधन के सीएम पद के प्रत्‍याशी तेजस्‍वी यादव के हेलीकॉप्‍टर के पास उमड़ी भीड़ की तस्वीर आप देख सकते हैं। सोशल मीडिया पर आए विजुअल्‍स में उमड़ती भीड़ को कोरोना वायरस के खतरे के तौर पर देखा जा रहा है। हर नेता एक दूसरे पर गैरजिम्मेदाराना रवैये का आरोप लगा रहा है। जबकि अपनी जिम्मेदारियों के प्रति संजीदा होने की भावना किसी प्रत्याशी में नहीं दिखी। 

भले कोरोना वायरस का खतरा हो लेकिन नेताओं की हसरत यही होती है कि भीड़ अधिक से अधिक जुटे। अब अगर बिहार में संक्रमण अपना फन फैलाता है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? ये सवाल उठाने वाले भी नेता ही हैं और इनकी मंशा कोरोना के नाम पर लोगों का वोट बटोरने की ही है। अगर वाकई आम आवाम की चिंता होती तो नेता जनता से भीड़ नहीं जुटाने और गाइडलाइन्स का पालन करने की हिदायत देते। जबकि ऐसा करने वाला कोई नहीं दिखता। सोशल डिस्‍टेंसिग की गाइडलाइंस का साफ उल्‍लंघन होने के बावजूद भी प्रशासन मूकदर्शक है। चुनावी भीड़ में शामिल लोगों के चेहरे पर न तो मास्क होता है न आपसी दैहिक दूरी। 

चुनाव बाद बिहार में कोरोना विस्फोट 

आम लोगों की राय है कि बिहार में जिस तरह से कोरोना संक्रमण को लेकर गाइडलाइन्स की अनदेखी हो रही है। वैसे में चुनाव नतीजों के ठीक बाद सूबे में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले एकाएक बढ़ेंगे, जिसे विस्फोट की भी संज्ञा दी जा रही है। बिहार में अगली सरकार जिस भी पार्टी या नेता की बनती है, इतना जरूर है कि उनकी पहली चुनौती होगी बिहार में बढ़ी मरीजों की संख्या को संभालना। ये तो वक्त ही बताएगा कि अभी बड़े वादे करने वाले नेता अपनी जिम्मेदारियां सही तरीके से निभा पाएंगे या नहीं? 

तेजस्वी की सुरक्षा पर उठे सवाल

बिहार के पूर्व उप मुख्‍यमंत्री तेजस्‍वी को Y प्‍लस श्रेणी की सुरक्षा हासिल है। बावजूद भीड़ जुटने को लेकर उनकी पार्टी के लोग सरकार पर ही तोहमत लगाते हैं। चुनावी सभा खत्म करने के बाद तेजस्वी जब हेलिकॉप्टर से रवाना होने लगते हैं तो लोगों का हुजूम देखने के लिए उमड़ पड़ता है। इनमें कुछेक तो नेता के दर्शनों के लिए आते हैं। जबिक अधिंकाश हेलिकॉप्टर को करीब से देखने की मंशा से ही आते हैं। हालत ये हो जाती है कि तेजस्वी और पायलट को खुद बार बार भीड़ से हटने का अनुरोध करना होता है। इस बारे में चुनाव आयोग में शिकायत के बावजूद परिस्थितियां नहीं बदली है। 

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की सुरक्षा का सवाल अपनी जगह जायज है। एक तरफ सुरक्षा का संबंध भीड़ से है, तो कोरोना वायरस का संक्रमण भी तो इसी से जुड़ा मामला है। भीड़ जुटाने को लेकर चुनाव आयोग ने जो गाइडलाइन्स जारी किये हैं उनके पालन की जिम्मेदारी तो नेताओं पर भी है। अगर नेता अपनी जिम्मेदारियां समझ लेंगे तो जाहिर है भीड़ नहीं जुटने से लोगों की बीमारियों से और नेताओं को किसी तरह के हमले से सुरक्षा बनी रहेगी। 
 

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