जानिए, क्या और क्यों है Google-USA विवाद? कौन हैं Judge अमित मेहता, जो इस मामले की करेंगे सुनवाई?

22 Oct, 2020 17:50 IST|सुषमाश्री
कौन हैं अमित मेहता, जो करेंगे अमेरिका और गूगल के बीच विवाद का फैसला

गूगल इंटरनेट कंपनी के खिलाफ अविश्वास

विस्तार से जानिए आखिर क्या है यह मामला

कंपनी, जो करती है गूगल की देखरेख

न्यूयॉर्क: भारतीय मूल के अमेरिकी जिला न्यायाधीश अमित मेहता को गूगल के खिलाफ न्याय विभाग का महत्वपूर्ण मुकदमा सौंपा गया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 22 दिसंबर 2014 को मेहता को कोलंबिया प्रांत के वास्ते अमेरिकी जिला न्यायालय के लिए नियुक्त किया था।

भारत के गुजरात में जन्मे, मेहता के पास 1993 में जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री है और उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया स्कूल ऑफ लॉ में कानून की पढ़ाई की।

लॉ स्कूल के बाद मेहता ने नौवीं सर्किट कोर्ट में क्लर्क का काम करने से पहले सैन फ्रांसिस्को की एक कानूनी फर्म में काम किया था। वर्ष 2002 में मेहता एक स्टाफ अटॉर्नी के रूप में ‘डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया पब्लिक डिफेंडर सर्विस' में कार्यरत हुए।

इंटरनेट कंपनी गूगल के खिलाफ अविश्वास

न्याय विभाग और 11 राज्यों के अटार्नी जनरल ने मंगलवार को कोलंबिया जिले के लिए अमेरिकी जिला अदालत में इंटरनेट कंपनी गूगल के खिलाफ अविश्वास (एंटीट्रस्ट) का मुकदमा दायर किया था। इस मामले में आरोप लगाया गया था कि इसने ऑनलाइन खोज और विज्ञापन में अपने वर्चस्व का इस्तेमाल प्रतिस्पर्धा को खत्म करने के लिए किया।

इसमें शामिल अन्य राज्य के अटॉर्नी जनरल कार्यालय अरकंसास, फ्लोरिडा, जॉर्जिया, इंडियाना, केंटकी, लुइसियाना, मिसिसिपी, मिसौरी, मोंटाना, दक्षिण कैरोलिना और टेक्सास का प्रतिनिधित्व करते हैं। न्याय विभाग ने कहा कि वर्षों से गूगल के पास अमेरिका में सर्च किये जाने वाले प्रश्नों का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा है और उसने सर्च तथा विज्ञापन में अपने एकाधिकार को बनाए रखने और बढ़ाने के लिए प्रतिस्पर्धा विरोधी रणनीति का उपयोग किया है।

आइए, विस्तार से जानें क्या है यह मामला

बता दें कि दुनिया की सबसे बड़ी इंटरनेट कंपनी गूगल के खिलाफ अमेरिकी न्याय विभाग और 11 अलग-अलग अमेरिकी राज्यों द्वारा देश के एंटीट्रस्ट कानून के कथित उल्लंघन के मामले में मुकदमा दायर किया गया है।

गूगल पर आरोप है कि वह ऑनलाइन खोज में प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता हितों को नुकसान पहुंचाने के लिए अपने प्रभुत्व का दुरुपयोग कर रही है। गूगल के खिलाफ मुकदमे को वॉशिंगटन डीसी की संघीय अदालत में दाखिल किया गया है। मुकदमा दाखिल करने के कयास लंबे अरसे से लगाए जा रहे थे।

माइक्रोसॉफ्ट के खिलाफ किया था ऐसा ही मुकदमा

करीब 20 साल पहले इसी तरह का मुकदमा सरकार ने माइक्रोसॉफ्ट के खिलाफ किया था। इस नए मुकदमे को ग्राहकों के हित में बताया जा रहा है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि यह मामला जमीनी स्तर पर प्रतिस्पर्धा को बचाने के लिए सरकार द्वारा उठाया गया जरूरी कदम है।

मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि गूगल ने ऑनलाइन सर्च और विज्ञापन में अपने प्रभुत्व का इस्तेमाल प्रतिस्पर्धा को खत्म करने और उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचाने में किया है। गूगल ने फिलहाल इस मुकदमे पर टिप्पणी से भी इनकार किया है।

कंपनी, जो करती है गूगल की देखरेख

मालूम हो कि गूगल, अमेरिकी कंपनी अल्फाबेट इंक के जरिये संचालित होती है। अल्फाबेट, गूगल को एक अनुभाग के रूप में संचालित करने के लिए ही बनाया गया है। इंटरनेट का सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाने वाला सर्च इंजन गूगल ही है। गूगल के माध्यम से ही यूजर्स आज किसी भी ऑनलाइन खोज को अंजाम देते हैं और इसका फायदा गूगल को होता है।

सर्च इंजन के रूप में गूगल को हर साल अरबों डॉलर का मुनाफा होता है। मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि गूगल फोन निर्माता कंपनी को यह सुनिश्चित करने के लिए पैसे देता है कि डिफॉल्ट सर्च इंजन उसका ही हो।

एकाधिकार को चुनौती

गूगल का कारोबार इतना सफल है कि 2019 में उसका राजस्व 162 अरब डॉलर था। गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट इंक का बाजार मूल्य 1,000 अरब डॉलर से अधिक है। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से पहले अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा दायर मुकदमे को राजनीतिक चाल कहा जा रहा है। विशेषज्ञ इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक चुनावी वादों का हिस्सा बता रहे हैं, क्योंकि उन्होंने अपने समर्थकों को अतीत में बार-बार आश्वासन दिया था कि वे बड़ी कंपनियों को जवाबदेह ठहराएंगे।

जिस तरह अब अमेरिका में गूगल के खिलाफ मुकदमा दायर किया गया है, उसी तरह पिछले दिनों विदेश में कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। उदाहरण के लिए 2019 में यूरोपीय संघ ने विभिन्न वेबसाइटों के माध्यम से अपने प्रतिद्वंद्वियों को विज्ञापन देने वाली कंपनियों की खोज में बाधा डालने के लिए गूगल पर जुर्माना लगाया था।

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