जानिए भारत में कब तक और कैसे आएगी रूसी वैक्सीन, ऐसा है विशेषज्ञों का दावा

13 Aug, 2020 12:52 IST|मो. जहांगीर आलम
फोटो : सौ. सोशल मीडिया

भारत में कब और कैसे पहुंचेगी रूसी वैक्सीन

भारतीय विशेषज्ञों की राय 

रूस के कोविड-19 के टीके पर संदेह 

नई दिल्ली :  भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस बीच देश में वैक्सीन को लॉन्च करने की कवायद भी तेज हो गई है। भारत में फिलहाल दो कंपनियों की वैक्सीन रेस में सबसे आगे बताई जा रही हैं। इनमें भारत बायोटेक और जायडस कैडिला शामिल हैं। 

इसके अलावा ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्रा जेनेका की संभावित वैक्सीन पर भारत के सेरम इंस्टीट्यूट ने दांव लगाया है। इन संभावित वैक्सीनों पर चर्चा के लिए आज सरकार का एक एक्सपर्ट पैनल बैठक करेगा। इसकी अध्यक्षता नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल करेंगे। बैठक में वैक्सीन के उत्पादन और उन्हें लोगों तक पहुंचाने के तरीकों पर चर्चा होगी। बताया गया है कि बैठक में रूस द्वारा तैयार की गई वैक्सीन स्पूतनिक-वी पर भी चर्चा हो सकती है 

रूस के कोविड-19 के टीके पर संदेह 

रूस के कोविड-19 का टीका विकसित करने पर संदेह को लेकर भारत समेत दुनिया के कई वैज्ञानिकों का कहना है कि समय की कमी को देखते हुए इसका समुचित ढंग से परीक्षण नहीं किया गया है और इसकी प्रभावशीलता साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हो सकते हैं।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मंगलवार को घोषणा की थी कि उनके देश ने कोरोना वायरस के खिलाफ दुनिया का पहला टीका विकसित कर लिया है जो कोविड-19 से निपटने में बहुत प्रभावी ढंग से काम करता है । इसके साथ ही उन्होंने खुलासा किया था कि उनकी बेटियों में से एक को यह टीका पहले ही दिया जा चुका है। इस देश को अक्तूबर तक बड़े पैमाने पर टीके का निर्माण शुरू होने की उम्मीद है और आवश्यक कर्मचारियों को पहली खुराक देने की योजना बना रहा है। हालांकि विज्ञान समुदाय के कई लोग इससे प्रभावित नहीं हैं।  

भारतीय विशेषज्ञों की राय 

पुणे में भारतीय विज्ञान संस्थान, शिक्षा और अनुसंधान से एक प्रतिरक्षाविज्ञानी विनीता बल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘जब तक लोगों के पास देखने के लिए क्लीनिकल परीक्षण और संख्या समेत आंकड़े नहीं हैं तो यह मानना मुश्किल है कि जून 2020 और अगस्त 2020 के बीच टीके की प्रभावशीलता पर सफलतापूर्वक अध्ययन किया गया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘क्या वे नियंत्रित मानव चुनौती अध्ययनों के बारे में बात कर रहे हैं? यदि हां, तो यह सबूत सुरक्षात्मक प्रभावकारिता की जांच करने के लिए भी उपयोगी है।’’

अमेरिका ने भी उठाया सवाल 

अमेरिका के माउंट सिनाई के इकान स्कूल ऑफ मेडिसिन में प्रोफेसर फ्लोरियन क्रेमर ने टीके की सुरक्षा पर सवाल उठाए। क्रेमर ने ट्वीटर पर कहा, ‘‘निश्चित नहीं है कि रूस क्या कर रहा है, लेकिन मैं निश्चित रूप से टीका नहीं लूंगा जिसका चरण तीन में परीक्षण नहीं किया गया है। कोई नहीं जानता कि क्या यह सुरक्षित है या यह काम करता है। वे एचसीडब्ल्यू (स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ता) और उनकी आबादी को जोखिम में डाल रहे है।’’

नई दिल्ली के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी से प्रतिरक्षाविज्ञानी सत्यजीत रथ ने क्रेमर से सहमति जताई है। उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि यह इसका उपयोग प्रारंभिक सूचना है, लेकिन यह इसकी प्रभावशीलता का सबूत नहीं है। इसकी प्रभावशीलता के वास्तविक प्रमाण के बिना वे टीके को उपयोग में ला रहे हैं।’’

वायरोलॉजिस्ट उपासना रे के अनुसार विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने टीके के निर्माताओं को निर्धारित दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए कहा है। रे ने कहा कि रूसी अधिकारियों के पास चरण एक और दो के परिणाम हो सकते हैं, लेकिन चरण तीन को पूरा करने में इतनी तेजी से विश्वास करना मुश्किल होगा जब तक कि आंकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध न हो।

टीके को लेकर डब्लूएचओ की राय 

डब्लूएचओ के अनुसार सिनोवैक, सिनोपार्म, फाइजर और बायोएनटेक, ऑस्ट्रलिया ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के साथ एस्ट्राजेनेका और मॉडर्न द्वारा बनाये गये कम से कम छह टीके विश्व स्तर पर तीसरे चरण के परीक्षणों तक पहुंच गए हैं। कम से कम सात भारतीय फार्मा कंपनियां कोरोना वायरस के खिलाफ एक टीका विकसित करने के लिए काम कर रही हैं। 

भारत में कब और कैसे पहुंचेगी रूसी वैक्सीन?

भारतीय बाजार में किसी भी दूसरे देश की कोरोना वैक्सीन लाने से पहले उसका फेज-2 और फेज-3 का क्लीनिकल ट्रायल होना जरूरी है। सफल परीक्षण के बाद ही हरी झंडी दी जाएगी। ये प्रक्रिया सभी देशों की वैक्सीन के साथ अपनाई जाएगी।  एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया का कहना है कि दुनिया के तीसरे सबसे ज्यादा प्रभावित देश भारत में भी इस वैक्सीन को उतारने से पहले सुरक्षा के लिहाज से इसके असर को आंका जाएगा। अगर रूस की वैक्सीन सफल होती है, तो बारीकी से ये देखना होगा कि ये सुरक्षित और प्रभावी है। इस वैक्सीन के कोई साइड इफेक्ट्स नहीं होने चाहिए। डॉ गुलेरिया ने कहा कि अगर ये वैक्सीन सही साबित होती है तो भारत के पास बड़ी मात्रा में इसके निर्माण की क्षमता है। 

भारत में अभी रूसी टीके के उत्पादन के लिए कोई समझौता नहीं 

भारत में अभी रूसी टीके के उत्पादन के लिए कोई समझौता नहीं हुआ है। वहीं, पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, वॉल्यूम के हिसाब से टीकों की दुनिया की सबसे बड़ी निर्माता कंपनी है, जो पहले से ही अपने टीकों का बड़े पैमाने पर उत्पादन करने के लिए डेवलपर्स के साथ गठजोड़ कर चुकी है। अन्य भारतीय कंपनियों ने भी इसी तरह के समझौते किए हैं। 
 

Load Comments
Hide Comments
More News
आंध्र-प्रदेश
मुख्य समाचार
.