World Toilet Day 2020: जानिए क्यों मनाया जाता है विश्व शौचालय दिवस, क्या है इसका उद्देश्य और इतिहास

19 Nov, 2020 12:22 IST|मो. जहांगीर आलम
फोटो : सौ. सोशल मीडिया

विश्व शौचालय दिवस 2020 का थीम

विश्व शौचालय दिवस मनाने का उद्देश्य​

हैदराबाद : आज विश्व शौचालय दिवस (World Toilet Day 2020) है। हर साल 19 नवंबर को विश्व शौचालय दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने की शुरुआत विश्व शौचालय संगठन (World Toilet Organisation) द्वारा साल 2001 में की गई थी। संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) द्वारा साल 2013 में इसे अधिकारिक तौर पर विश्व शौचालय दिवस घोषित किया गया।

शौचालय जीवन को बचाते हैं। क्योंकि ये कई तरह के बीमारियों के प्रसार को रोकने में मदद करते हैं। विश्व शौचालय दिवस वैश्विक स्वच्छता संकट से निपटने और प्रेरित करने वाला एक अहम दिवस है। 

विश्व शौचालय दिवस 2020 : थीम

इस बार इसकी थीम है ‘सस्टेनेबल सैनिटेशन एंड क्लाइमेट चेंज' है और साल 2019 में "लीविंग नो वन बिहाइंड" थी.

विश्व शौचालय दिवस मनाने का उद्देश्य

इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य विश्व में सभी लोगों को 2030 तक शौचालय की सुविधा उपलब्ध करवाना संयुक्त राष्ट्र के छह सतत विकास लक्ष्यों का हिस्सा है। संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों में सबको शुद्ध पेयजल और स्वच्छता की सुविधा उलब्ध कराने का लक्ष्य भी रखा गया है। इसके लिए एक विश्व शौचालय संगठन है। यह संगठन दुनिया भर में शौचालय की समस्या को खत्म करने और दुनिया भर में स्वच्छता के समाधान के लिए काम करते हैं। 

क्या पहले भी था शौचालय

कहा जाता है कि आज से करीब 5000 साल पहले सिंधु घाटी सभ्यता की खुदाई में भी टॉयलेट्स मिले हैं। खुदाई के दौरान फ्लश टॉयलेट और नॉन फ्लश टॉयलेट दोनों पाए गए हैं। नालियों का जाल भी बिछा हुआ मिला है जो कचरे को बाहर करने में काम आता था। 5000 साल पहले खुदाई में मिला यह एक ड्राई टॉयलेट है। जिस प्रकार आज कल के सम्प टॉयलेट्स होते हैं। यह देखने में बिल्कुल वेस्टर्न टॉयलेट की तरह होता था।

मुगल जब भारत में आए तब भी उन्होंने ऐसे ही टॉयलेट बनवाए। कई भारतीय राजाओं के रामहल में ऐसे शौचालय मिलते हैं। राजस्थान के बूंदी किले में भी शौचालय पाया गया था।

संग्रहालय में मौजूद हैं प्राचीन काल के शौचालय 

दिल्ली में सुलभ शौचालय का संग्रहालय का निर्माण कराया गया है। संग्राहलय में राजा महाराजाओं के समय के सिंहासन की तरह दिखने वाले टॉयलेट और हड़प्पा सभ्यता के दौरान मोहन जोदड़ो में इस्तेमाल किए वाले टॉयलेट सीट, सभी तरह के प्राचीन शौचालय रखे गए हैं। इन सभी खोजों से पता चलता है कि भारत के लोग प्राचीन काल से स्वच्छता का ध्यान रखते थे।

स्वच्छता पर ध्यान देना आवश्यक

शौचालय सिर्फ एक शौचालय नहीं है। यह एक जीवन रक्षक, गरिमा-रक्षक है। आप जो भी हैं, आप जहां भी हैं, स्वच्छता आपका अधिकार है। बिना स्वच्छता के कोई भी खुद को गरीबी से बाहर निकाल नहीं सकता है। हमें शौचालयों का विस्तार करना चाहिए और किसी को भी पीछे नहीं छोड़ना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, 4.2 अरब आबादी को आज भी ठीक से शौचायल उपलब्ध नहीं है और वह गंदगी में रहने को मजबूर है। 67.3 करोड़ आबादी खुले में शौच करने को मजबूर है। हर साल लगभग 432,000 डायरिया से होने वाली मौतें अपर्याप्त स्वच्छता के कारण होती हैं और यह आंतों के कीड़े, ट्रेकोमा और सिस्टोसोमियासिस सहित विभिन्न बीमारियों का एक प्रमुख कारण है.

- असुरक्षित पेयजल, स्वच्छता और हाथ की स्वच्छता के कारण हर साल लगभग 297,000 बच्चे डायरिया से मर जाते हैं.

- पानी और स्वच्छता संबंधी बीमारियों की उत्पादकता में कमी से जीडीपी के 5% तक विभिन्न देशों में खर्च होता है.

इसलिए, विश्व शौचालय दिवस स्वच्छता के बारे में जागरूकता बढ़ाता है और विश्व स्तर पर अच्छे स्वास्थ्य के लिए स्वच्छ शौचालय तक पहुंच बनाने पर ध्यान केंद्रित करता है। स्वच्छता एक मानव अधिकार है और गरीबी से बाहर आने के लिए स्वच्छता पर ध्यान देना आवश्यक है।
 

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