दिवाली पर ताश खेलने की परंपरा को भुनाने में जुटे 'ऑनलाइन गेम्स', सतर्क हुई सरकारें

11 Nov, 2020 17:22 IST|अंजू वशिष्ठ
ऑनलाइन ताश (फोटो सौ. सोशल मीडिया)

नई दिल्ली : दीवाली आ रही है। ऐसे में लोग एक ओर जहां लक्ष्मी के रूप में धन की पूजा करते हैं, वहीं इस धन को जुएं के खेल में इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इस बार कोरोना के कारण लोग एक दूसरे के घरों में ताश खेलने नहीं जा पाएगें। ऐसे में ऑनलाइन गेम्स वाले ऐप और वेबसाइट दिवाली पर ताश खेलने के ऑप्शन मुहैया करा कर मुनाफा कमाने की कोशिश में जुट गई हैं।

कोरोना वायरस महामारी की वजह से करीब एक साल से जहां परीक्षाएं, सम्मेलन समेत कई जरूरी गतिविधियां ऑनलाइन सिमट आई हैं। संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए सामाजिक दूरी के नियम के पालन पर जोर दिया जा रहा है। इसे देखते हुए ऑनलाइन गेम्स वाले ऐप और वेबसाइट दिवाली पर कई लोगों द्वारा खेले जाने वाले ताश और पत्ती की परंपरा को शामिल करा इसे 'भुनाने' में जुट गई हैं।

ऑनलाइन गेम के जरिये तीन पत्ती 
कोविड-19 ने लोगों के पारंपरिक रूप से मिलने जुलने, पार्टी करने के अवसर को छीन लिया है। संक्रमण के खतरे के चलते इस बार दिवाली पर ताश-पत्ती के साथ दोस्तों-मित्रों और परिवार के साथ टेबल पर बैठकर सांकेतिक जुआ खेलना और दांव लगाना संभव नहीं होगा। हालांकि, ऐसे लोगों को बाजी गेम्स, स्टिकपूल और पॉकेट-52 जैसे ऐप और वेबसाइट ने ऑनलाइन खेलने का विकल्प दिया है जिसमें लोग पोकर और दिवाली पर पारंपरिक रूप से तीन पत्ती खेल सकते हैं। 

ये ऐप लोगों को पोकर या बाकी ताश के खेल परिवार और दोस्तों और यहां तक पेशेवरों के साथ खेलने का विकल्प दे रहे हैं। पिछली दिवाली दो लाख हार चुके 29 वर्षीय व्यक्ति ने कहा कि ताश खेलने के लिए इस बार न्योता नहीं मिला ‘बड़ा झटका' है।

उन्होंने कहा, ‘‘ पिछली दिवाली से मैं खुद को समझा रहा हूं कि अगली दिवाली इस नुकसान की भरपाई कर लूंगा, लेकिन कोरोना वायरस की वजह से मेरे पहचान वाला कोई भी ताश पार्टी की मेजबानी नहीं कर रहा है। मैंने कई लोगों को संपर्क किया यहां तक खुद ताश पार्टी करने की सोची, लेकिन कहीं से सकारात्मक जवाब नहीं आया। हर कोई भयभीत है।'' 

ऑनलाइन गेम्स में जुएं को लेकर विवाद

संचार सेवा के विकसित होने के बाद अब शेयर या सट्टा ही नहीं बल्कि जुआ भी ऑनलाइन खेला जाने लगा है। स्मार्ट फोन इसमें महत्ती भूमिका निभा रहा है। यानि अब कहीं जगह नहीं मिले तो आपका स्मार्ट फोन आपको घर बैठे ही जुआ खेलवा दे रहा। जैसे-जैसे साधन और सुविधा बढ़ी जुए का स्वरूप भी बदला। इसी का नतीजा है कि ऑनलाइन जुए की सुविधा भी मिल रही है। 

कुछ ऐसे ऐप हैं जो हर किसी को उसकी जेब और पंसद के मुताबिक पेशकश कर रहे हैं। जिनमें मुफ्त में प्रवेश हासिल होने वाले टूर्नामेंट से लेकर पांच रुपये से 100 रुपये की शुरुआती कीमत पर खेल के टेबल पर बैठने का मौका, तीन लाख रुपये की दिवाली प्रतियोगिता पुरस्कार योजना में पंजीकृत कराने पर 50 रुपये का बोनस शामिल है।


हर तरह का जुआ है अपराध

भारतीय कानून के मुताबिक सार्वजिनक जगहों पर जुआ खेलने पर सजा का प्रावधान है। दिवाली पर लोग एक ओर जहां लक्ष्मी के रूप में धन की पूजा करते हैं। वहीं इस धन को जुएं के खेल में इस्तेमाल करते हैं। आपको बता दें कि पब्लिक गेम्बलिंग एक्ट 1876 के मुताबिक, घर में जुआ खेलना भी अपराध है। 

गैंबलिंग एक्ट की धारा 13 जमानतीय अपराध है। ऐसा करते हुए पकड़े जाने पर एक साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान। शर्त लगाकर जुआ और सट्टा खेलने वालों का इस धारा के तहत चालान किया जाता है। जबकि घर में सट्टा करवाने या जुए का अड्डा चलाने पर 3/4 के तहत चालान होता है। 

दिल्ली-एनसीआर समेत देशभर के कई शहरों में दिवाली के मौके पर धड़ल्ले से शॉर्ट-टर्म कैसीनो का प्रचलन जोर पकड़ने लगता है। कैसिनो मालिक डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए ग्राहकों को तलाशते हैं। जुएं के खेल में सबसे अधिक ताश के पत्तों का इस्तेमाल होता है। सभी को ताश का खेल जुएं के लिए अधिक रास आता है। हालांकि ये भी कानूनी अपराध है। 

इन राज्यों में है ऑनलाइन गेमिंग पर बैन
आंध्र प्रदेश गैम्बलिंग एक्ट 1974 में ऑनलाइन गैम्बलिंग को शामिल किया गया। ऑनलाइन गैम्बलिंग और बेटिंग को आंध्र प्रदेश (अमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस, 2020 के तहत अपराध माना गया है। इसी साल यानी 2020 में 25 सितंबर से आंध्रा में ऑनलाइन गेमिंग बेन अपराध की श्रेणी में लाया गया है। आंध्रा प्रदेश सीएम ने केंद्रीय मंत्री से गेमिंग, गैम्बलिंग और बेटिंग पर रोक लगाने की दिशा में कारगर कदम उठाने का अनुरोध भी किया है।  

तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, नागालैंड और ओडिशा ने भी ऑनलाइन गेम पर प्रतिबंध लगा दिया है, या उन्हें नियंत्रित करने या फैलने से रोकने के लिए नियमों को लागू किया है। मद्रास उच्च न्यायालय ने विराट कोहली, सौरव गांगुली और अन्य हस्तियों को इस तरह के खेलों को बढ़ावा देने के लिए पहले ही नोटिस दिया है।

तमिलनाडु के सीएम ने कुछ दिन पहले ही घोषणा की है कि उनकी सरकार सभी प्रकार के ऑनलाइन गेम पर प्रतिबंध लगाएगी, जो पैसे से खेले जाते हैं। इसमें रम्मी, पोकर जैसे और गेम्स, जो सट्टेबाजी से जुड़े हैं, पर प्रतिबंध लगाया जाएगा।

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कोरोना काल में मुनाफा कमाने में जुटे 'ऑनलाइन गेम्स'

वहीं ऑनलाइन गेम कंपनिया इसके जरिए मुनाफा कमाने की कोशिश में जुटी हुई हैं। बाजी गेम्स के सीईओ नवकिरण सिहं ने ‘पीटीआई-भाषा' से कहा, ‘‘ कोविड-19 महामारी की वजह से लोग घरों में रहने को मजबूर हुए हैं और इससे मनोरंजन के तरीके प्रभावित हुए हैं और लोग विकल्प तलाश रहे हैं। इससे इस क्षेत्र में वृद्धि देखने को मिली है और हमारा मानना है कि ये अब और बढ़ेगा... हम उम्मीद करते हैं और प्रोत्साहित करते हैं कि इस त्योहार लोग सामाजिक दूरी का अनुपालन करने हुए ऑनलाइन खेलों का आनंद लें। 

पॉकेट52 के सीईओ नीतेश साल्वी ने कहा जो भी पोकर खेलना जानता है वो हमारा टारगेट कस्टमर है। 

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