कोरोना वायरस पीड़ित पेशेंट से जानें कोविड संक्रमण को कैसे करें हैंडल?

15 Sep, 2020 12:39 IST|Sakshi
प्रतीकात्मक फोटो

कोरोना मरीज की जानिए सलाह

संक्रमण के बाद कैसे बरतें एहतियात 

हैदराबाद: कोरोना वायरस से ग्रसित हो चुके लोगों में अधिकांश का मानना है कि संक्रमण के दौरान डर का अहसास होता है। खौफ उन तमाम आशंकाओं को लेकर आपके मन में घर करती है, जो हम आए दिन सोशल मीडिया पर देखते हैं। इनमें से कुछ में तो सच्चाई है, जबकि कई जानकारियां भ्रामक होती है। लिहाजा कोरोना संक्रमण के दौर में पहली सलाह है कि आप सबसे पहले आधी अधूरी और भ्रामक जानकारियों से खुद को अलग कर लें। 

लक्षण दिखते ही डॉक्टर को दिखाना पहली जिम्मेदारी

महामारी के इस दौर में कोरोना को हल्के में लेना कई मायनों में भारी पड़ सकता है। अगर बुखार, सर्दी जुकाम और सूखी खासी, बदन दर्द, पेट दर्द, अपच की स्थिति हो तो तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें। हां डॉक्टर के पास जाने से पहले आपको मानसिक तौर पर खुद को तैयार करना होगा कि आप संक्रमित हो सकते हैं। लिहाजा किसी मरीज की ही तरह आपको सामाजिक दूरी और महामारी की मर्यादा का पालन करना होगा। चिकित्सक की सलाह पर बिना देर किए कोरोना टेस्ट करवाएं। इस बात की परवाह न करें कि जांच के बाद अगर आप पॉजिटिव आते हैं तो आप सामाजिक तौर पर बहिष्कृत हो जाएंगे। जीने और स्वस्थ रहने के लिए कुछ दिनों तक लोगों से कट कर रहना पड़े तो इसमें कोई गुरेज नहीं। 

कोविड टेस्ट के दौरान बरते ये सावधानियां

कोरोना वायरस टेस्ट के लिए राज्य सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर टेस्ट सेंटर्स का ब्यौरा दिया जाता है। इनमें सरकारी और गैर सरकारी एजेंसियों के बारे में अलग अलग जानकारी दी जाती है। अगर आप अधिक रकम खर्च करते हैं तो हो सकता है सैंपल कलेक्शन के लिए घर में ही इंतजाम हो जाय। वहीं सरकारी व्यवस्था में जाने से पहले आपको मुकम्मल तैयारी करनी होती है। मास्क, फेस शील्ड, हैंड ग्लब्स और संभव हो सके तो पीपीई किट जरूर पहन लें। संभव है आपको कोरोना न हो औऱ खामख्वाह आप टेस्ट सेंटर से अपने घर संक्रमण लेकर आ जाएं। टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर परिवार के भरोसेमंद लोगों को अपनी स्थिति की जानकारी दें। 

पॉजिटिव आने पर कहां दिखाएं

अगर आपका टेस्ट कोरोना पॉजिटिव आ गया है, तो सबसे पहला सवाल आपके जेहन में आता है कि किस डॉक्टर को दिखाएं। बता दें कि अधिकांश राज्य सरकारों ने चिकित्सकों से ओपीडी में कोरोना पेशेंट के इलाज करने की हिदायत दी है। लिहाजा आप सावधानी बरतते हुए किसी भी बड़े अस्पताल या फिर चिकित्सक के पास इलाज के लिए पहुंच सकते हैं। इसके अलावा राज्य सरकारों ने टेलीकॉलिंग का इंतजाम किया है। हेल्प सेंटर में आप फोन करके चिकित्सक की डिमांड कर सकते हैं। सरकारी डॉक्टर आपको फोन पर ही दवाइयां सुझाएंगे। अगर डॉक्टर के पास जाना पड़े तो पहले ही उन्हें इत्तला कर दें ताकि वो अपनी तरफ से इंतजाम कर सकें। 

अगर आपको फेफड़े संबंधी परेशानी है तो छाती के स्पेशलिस्ट से दिखा सकते हैं। जबकि बाकी सामान्य दिक्कतों में जेनरल मेडिसीन से जुड़े डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर की सलाह के मुताबिक दवा का सेवन करें। अगर भर्ती होने की हिदायत मिलती है तो अपनी जेब के मुताबिक सरकारी या फिर कॉर्पोरेट अस्पताल का चयन कर सकते हैं। महामारी के इस दौर में कम खर्च में अस्पताल में भर्ती होना बड़ी चुनौती है। अधिकांश निजी अस्पताल बेड नहीं होने की मजबूरी बता सकते हैं। जबकि सरकारी व्यवस्था के तहत आपको एमरजेंसी में भर्ती करने से इनकार नहीं किया जा सकता है। लिहाजा बिना वक्त गंवाए आपको फैसला लेना है। 

कोरोना संक्रमण के दौरान क्या खाएं क्या न  खाएं

कोरोना संक्रमित मरीजों को खाने पीने में विशेष परहेज नहीं होता है। अधिकांश लोगों को न्यूमोनिया की शिकायत होती है। लिहाजा पॉजिटिव होने के बाद ठंडी चीजों से परहेज करें। अगर लिवर संबंधी परेशानी हो तो गरिष्ठ चीजें न खाएं। लगातार खांसी हो रही हो तो वैसी चीजों से परहेज करें जिससे कफ सूखता हो। घरेलू उपचार में वही लें जिससे कफ ढीला हो और खांसी के साथ ही वो शरीर से बाहर आ जाय। न्यूमोनिया या फिर खांसी को हल्के में कतई नहीं लें। लगातार खांसने से शरीर के भीतर संक्रमण का प्रसार होता है। ऐसी स्थिति में सबसे अधिक खतरा फेफड़ों को हो सकता है। फेफड़ों में अगर फंगस घर कर ले तो फाइब्रोसिस का खतरा बना रहता है। 

कोरोना संक्रमण के दौरान कैसे भांपे खतरा

कोरोना संक्रमितों में अधिकांश लोग घर में ही रहकर दवाइयां लेते हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप अपना ऑक्सीजन लेवल लगातार चेक करते रहें। अगर 95 से नीचे आए तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें। वहीं इस बारे में सबसे बेहतर उपाय डॉक्टर 6 मिनट वॉक टेस्ट बताते हैं। अगर आप सुदूरवर्ती इलाके में रहते हैं और आपके पास ऑक्सीमीटर नहीं है, तो आप छह मिनट तक सामान्य कदमों से चलें। फिर अगर आपकी सांस फूलती है और वो भी असामान्य तरीके से तो समझिए खतरा है, और आपको डॉक्टर के पास जाना है। ध्यान रहें लक्षण आने के तीसरे, छठे और नौवें दिन सावधानी अधिक बरतनी होती है। इस दौरान मोबाइल फोन से दूर रहें। शरीर को पूरा आराम दें व ढंडी हवा और चीजों से पूरी तरह परहेज करें। अगले लेख में हम आपको बताएंगे कि संक्रमण के चौदह दिनों के दौरान किस तरह की परिस्थितियों से मरीज को दो चार होना पड़ता है। इस दौरान कैसे हमें अपनी मनोदशा पर काबू रखनी है? 

- विजय कुमार

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