वृषभ संक्रांति पर स्नान-दान का है विशेष महत्व, सूर्य पूजा से मिलता है शुभ फल

14 May, 2020 04:40 IST|Sakshi
सूर्य पूजा का महत्व

सूर्य करेंगे वृषभ राशि में प्रवेश

वृषभ संक्रांति का महत्व

वृषभ संक्रांति पर सूर्य पूजा

सूर्य हर महीने एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं और इसीको संक्रांति कहा जाता है। 12 राशियां होने से सालभर में 12 संक्रांति पर्व मनाए जाते हैं यानी अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार हर महीने के बीच में सूर्य राशि बदलता है। सूर्य के राशि बदलने से मौसम में भी बदलाव होने लगते हैं। इसके साथ ही हर संक्रांति पर पूजा-पाठ, व्रत-उपवास और दान किया जाता है। वहीं धनु और मीन संक्रांति के कारण मलमास और खरमास शुरू हो जाते हैं इसलिए एक महीने तक मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं।

इसी क्रम में 14 मई को सूर्य राशि बदलकर वृषभ में आ जाएगा। इस दिन वृष संक्रांति मनाई जाती है। संक्रांति पर्व पर स्नान, दान, व्रत और पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है। इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर तीर्थ स्नान कर के सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है लेकिन कोरोना के चलते नदियों में स्नान करने से बचना चाहिए और घर पर ही पानी में गंगाजल या अन्य पवित्र नदियों का जल मिलकार नहा लेना चाहिए। वृष संक्रांति पर पानी में तिल डालकर नहाने से बीमारियां दूर होती हैं और लंबी उम्र मिलती है। 


वृषभ सक्रांति का महत्व

हिंदू कैलेंडर के अनुसार 14 या 15 मई को वृष संक्रांति पर्व मनाया जाता है। सूर्य की चाल के अनुसार इसकी तारीख बदलती रहती है। इस दिन सूर्य अपनी उच्च राशि छोड़कर वृष में प्रवेश करता है। जो कि 12 में से दूसरे नंबर की राशि है। वृष संक्रांति ज्येष्ठ महीने में आती है। इस महीने में ही सूर्य रोहिणी नक्षत्र में आता है और नौ दिन तक गर्मी बढ़ाता है। जिसे नवतपा भी कहा जाता है। वृष संक्रांति में ही ग्रीष्म ऋतु अपने चरम पर रहती है। इसलिए इस दौरान अन्न और जल दान का विशेष महत्व है।
इस महीने में प्यासे को पानी पिलाने अथवा घर के बाहर प्याऊ लगाने से व्यक्ति को यज्ञ कराने के समतुल्य पुण्यफल मिलता है। इस दिन "ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का एक मनके जाप जरूर करना चाहिए।

वृषभ संक्रांति व्रत-पूजा

संक्रांति का व्रत लाभकारी माना गया है। इस दिन व्रत रखने से मनोकामना पूर्ण होती है और जीवन में यश वैभव प्राप्त होता है। इस दिन भगवान शिव के ऋषभ रूद्र स्वरूप और सूर्य भगवान की आराधना श्रेयष्कर मानी गई है।

वृषभ संक्रांति का मुहूर्त

14 मई 2020: वृषभ संक्रांति
पुण्यकाल: सुबह 10.37 बजे से शाम 5.33 बजे तक
पुण्यकाल की कुल अवधि: 6. 56 घंटे
महा पून्यकाल: 3.23 बजे से शाम 5.33 बजे तक

लॉकडाउन में ऐसे करें स्नान

इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने को शुभ माना गया है लेकिन इस समय कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन की स्थिति बनी हुई है। लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं। ऐसे में घर पर ही स्नान करने के दौरान जल में गंगा जल की कुछ बूंदे मिलाकर स्नान करें।


प्याऊ स्थापित करने से मिलता है पुण्य

ज्येष्ठ मास गर्मी का महीना होता है। सूर्य देव इस महीने अपने पूरे प्रभाव में होते हैं। ऐसे में जल का संकट उत्पन्न हो जाता है। वृषभ संक्रांति पर प्याऊ लगवाने और जल से भरे घड़े दान करने से कई गुना पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन जगह प्याऊ लगाने से जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

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