सावन के अंतिम शनि प्रदोष व्रत पर ऐसे करेंगे पूजा तो मिलेगा शुभ फल

1 Aug, 2020 04:50 IST|मीता
सोशल मीडिया के सौजन्य से

1 अगस्त, शनिवार को है सावन का दूसरा और अंतिम प्रदोष व्रत

शनि प्रदोष पर ऐसे करेंगे पूजा तो भोलेनाथ के साथ प्रसन्न होंगे शनिदेव

शनि प्रदोष व्रत पूजा विधि व मुहूर्त 

आज श्रावण मास के शुक्लपक्ष की त्रयोदशी तिथि और शनिवार का दिन है। हर त्रयोदशी को प्रदोष व्रत होता है। इस बार सावन का दूसरा प्रदोष व्रत जो कि अंतिम भी है, आज शनिवार 01 अगस्त 2020 को है। 

हम जानते ही हैं कि प्रदोष के दिन भगवान शिव की विशेष पूजा होती है। शनिवार के दिन होने के कारण यह शनि प्रदोष व्रत कहलाता है। संतान की कामना से शनि प्रदोष के व्रत का विशेष महत्व होता है। 

त्रयोदशी तिथि का समय

सावन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ 31 जुलाई यानी आज देर रात 10 बजकर 42 मिनट से हो रहा है, जो 01 अगस्त को रात 09 बजकर 54 मिनट तक रहेगा।

शनि प्रदोष पूजा का मुहूर्त

इस बार पूजा का समय दो घंटे 06 मिनट का है। इस अवधि में ही आपको प्रदोष व्रत की पूजा विधि विधान से पूर्ण कर लेनी चाहिए। 01 अगस्त को शाम में 07 बजकर 12 मिनट से रात 09 बजकर 18 मिनट तक प्रदोष पूजा का मुहूर्त है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि की शांति एवं शिव जी को प्रसन्न करने के लिए शनि प्रदोष के दिन का अधिक महत्व है। आप भी शनि प्रदोष व्रत करना चाहते हैं तो आपको शाम के समय इस विधिपूर्वक शिवजी का पूजन करना चाहिए।

शनि प्रदोष पर ऐसे करें पूजा 

- शनि प्रदोष व्रत के दिन उपवास करने वाले को प्रात: जल्दी उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त होकर स्नान करके स्वच्छ धुले हुए वस्त्र धारण करके शिवजी का पूजन करना चाहिए।

- इस दिन पूरे मन से 'ॐ नम: शिवाय' मंत्र का जप करना चाहिए।

- प्रदोष व्रत की पूजा शाम 4.30 से शाम 7.00 बजे के बीच की जाती है। अत: त्रयोदशी के दिन प्रदोष काल में यानी सूर्यास्त से 3 घड़ी पूर्व शिवजी का पूजन करना चाहिए।

- उपवास करने वाले को चाहिए कि शाम को दुबारा स्नान कर स्वच्छ सफेद रंग वस्त्र धारण करके पूजा स्थल को साफ एवं शुद्ध कर लें।

- पांच रंगों से रंगोली बनाकर मंडप तैयार कर तथा पूजन की सामग्री एकत्रित करके लोटे में शुद्ध जल भरकर, कुश के आसन पर बैठें तथा विधि-विधान से शिवजी की पूजा-अर्चना करें। 'ॐ नम: शिवाय' मंत्र का जप करते हुए जल अर्पित करें। इस दिन निराहार रहें। इसके बाद दोनों हाथ जो‌ड़कर शिवजी का इस तरह ध्यान करें।

- हे त्रिनेत्रधारी, मस्तक पर चंद्रमा का आभूषण धारण करने वाले, करोड़ों चंद्रमा के समान कांतिवान, पिंगलवर्ण के जटाजूटधारी, नीले कंठ तथा अनेक रुद्राक्ष मालाओं से सुशोभित, त्रिशूलधारी, नागों के कुंडल पहने, व्याघ्र चर्म धारण किए हुए, वरदहस्त, रत्नजड़ित सिंहासन पर विराजमान शिवजी हमारे सारे कष्टों को दूर करके सुख-समृद्धि का आशीष दें। इस तरह शिवजी के स्वरूप का ध्यान करके मन ही मन प्रार्थना करें।

- तत्पश्चात शनि प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें और सुनाएं।

- कथा पढ़ने या सुनने के बाद समस्त हवन सामग्री मिला लें तथा 21 अथवा 108 बार निम्न मंत्र से आहुति दें।

मंत्र- 'ॐ ह्रीं क्लीं नम: शिवाय स्वाहा'।

- उसके बाद शिवजी की आरती करके प्रसाद बांटें। उसके बाद भोजन करें।

- ध्यान रहें कि भोजन में केवल मीठी चीजों का ही उपयोग करें। अगर घर पर यह पूजन संभव न हो तो व्रतधारी शिवजी के मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना करके इस दिन का लाभ ले सकते हैं। इसके साथ ही इस दिन शनि पूजन का भी अधिक महत्व होने के कारण किसी भी शनि मंदिर में जाकर शनि पूजन करके उन्हें प्रसन्न करें।
 

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