आज देवउठनी एकादशी पर ऐसे करें पूजा पाठ, बन रहा शुभ संयोग मिलेगा दोगुना लाभ

25 Nov, 2020 09:17 IST|मीता
सोशल मीडिया के सौजन्य से

आज 25 नवंबर को  है देवउठनी एकादशी 

देवउठनी एकादशी पर बन रहा शुभ संयोग

सनातन धर्म में प्रत्येक एकादशी का विशेष महत्व है, लेकिन कार्तिक मास (Kartik maas) की शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी (Devuthani ekadashi)  के नाम से जानते हैं। मान्यता है कि क्षीर सागर में चार महीने की निद्रा के बाद भगवान विष्णु (Lord Vishnu) इस दिन उठते हैं। इसी के साथ शुभ कार्यों की शुरुआत भी हो जाती है। इस बार देवउठनी एकादशी आज यानी 25 नवंबर बुधवार को पड़ रही है। आज योग निद्रा से जागेंगे भगवान विष्णु।

आइए जानते हैं देवउठनी एकादशी के महत्व और उससे जुड़ी कथा...

देवउठनी एकादशी को कई नाम से जानते हैं। इसे देवोत्थान एकादशी, देव उठनी ग्यारस, प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन तुलसी विवाह किया जाता है। लोग घरों में सजावट करते तुलसी जी का विवाह शालिग्राम से करते हैं।

क्या है मान्यता

पुराणों के अनुसार, भगवान विष्णु चार महीने तक क्षीर सागर में सोते हैं। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य वर्जित होता है। दीपावली के 11वें दिन पड़ने वाली एकादशी पर भगवान नींद से उठते हैं। इस दिन से ही शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। साथ ही इस दौरान किया गया कार्य विशेष फलदायी होता है।

तुलसी विवाह की परंपरा

देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह की भी परंपरा है। इस दिन भगवान शालिग्राम के साथ तुलसी जी का विवाह होता है। ऐसी मान्यता है कि जिस घर में बेटियां नहीं होती तो माता-पिता तुलसी विवाह करके कन्यादान का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।

पूजा का विशेष लाभ

देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से भगवान की विशेष कृपा बनी रहती है। मां लक्ष्मी आपके घर पर सदैव धन, संपदा और वैभव की वर्षा करती हैं। इसके अलावा शादी में आ रही परेशानी को दूर करने के लिए युवक-युवतियों को घर में तुलसी विवाह कराना चाहिए। इससे शादी में आ रही सभी समस्याएं दूर होती हैं।

देवउठनी एकादशी का महत्व

शास्त्रों में इस एकादशी का बड़ा महत्व बताया गया है। इसे देवोत्थान और देव प्रबोधिनी एकादशी के नाम से जाता है। देवउठनी एकादशी के बारे में मान्यता है कि भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा के बाद इसी तिथि पर जागते हैं। 

देवउठनी पर भगवान विष्णु के जागने के बाद सभी तरह के मांगलिक कार्य आरंभ हो जाते हैं। इस तिथि पर तुलसी विवाह भी किया जाता है। सभी एकादशियों में देवउठनी एकादशी व्रत को अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। इसी के साथ चतुर्मास भी समाप्त हो जाएगा। देवउठनी एकादशी के बाद विवाह कार्यक्रम फिर से आरंभ हो जाएंगे।

2020 में तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त


कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 25 नवंबर बुधवार के दिन रात 2 बजकर 43 मिनट से शुरू होगी। जबकि इस तिथि का समापन 26 नवंबर, गुरुवार की सुबह 05 बजकर 11 मिनट पर होगा। ऐसे में एकदशी तिथि 25 नवंबर को पूरे दिन रहेगी। इस एकादशी व्रत का पारण 26 नवंबर की सुबह 10 बजे तक किया जा सकेगा। 

शुभ योग में मनेगी देवउठनी एकादशी

हिन्दू पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि के दिन कई शुभ योग पड़ रहे हैं। एकादशी तिथि की शुरूआत सर्वाथसिद्धि योग से हो रही है। ज्योतिष विज्ञान में इस योग को अति शुभ और कल्याणकारी माना जाता है। इस दिन रवि योग और सिद्धि योग भी बन रहा है। रवि योग का संबंध सूर्यदेव से है। यह योग कई अशुभ योगों और ग्रहों के अशुभ प्रभावों को दूर करने वाला है। जबकि सिद्धि योग में किए गए कार्य सिद्ध होते हैं। 

व्रती को मिलेगा शुभ फल


देवउठनी एकादशी के दिन व्रत रखने वाले जातकों को व्रत का दोगुना फल मिलेगा। भगवान विष्णु जी उनकी मनोकामनाओं को पूर्ण करेंगे। यदि आप इस दिन कोई भूमि या वाहन खरीदना चाहते हैं तो इसके लिए यह बेहद ही उत्तम समय होगा। इसके साथ ही आप इस दिन कोई नया व्यापार भी शुरू कर सकते हैं। इन योगों का आपको बेहद लाभ मिलने वाला है।

देवउठनी एकादशी का पौराणिक महत्व


भगवान विष्णु के चार महीनों के लिए निद्रा में जाने के पीछे एक कथा है। जिसके अनुसार एक बार भगवान विष्णु से उनकी प्रिया लक्ष्मी जी ने आग्रह भाव में कहा-हे प्रभु! आप दिन-रात जागते हैं लेकिन,जब आप सोते हैं तो फिर कई वर्षों के लिए सो जाते हैं।ऐसे में समस्त प्रकृति का संतुलन बिगड़ जाता है। इसलिए आप नियम से ही विश्राम किया कीजिए। आपके ऐसा करने से मुझे भी कुछ समय आराम मिलेगा। लक्ष्मी जी की बात सुनकर नारायण मुस्कुराए और बोले-'देवी'! तुमने उचित कहा है। मेरे जागने से सभी देवों और खासकर तुम्हें मेरी सेवा में रहने के कारण विश्राम नहीं मिलता है। इसलिए आज से मैं हर वर्ष चार मास वर्षा ऋतु में शयन किया करूंगा। मेरी यह निद्रा अल्पनिद्रा और योगनिद्रा कहलाएगी जो मेरे भक्तों के लिए परम मंगलकारी रहेगी। इस दौरान जो भी भक्त मेरे शयन की भावना कर मेरी सेवा करेंगे,मैं उनके घर तुम्हारे सहित सदैव निवास करूंगा। 


 

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