आज चैती छठ पर यूं शुभ मुहूर्त में दें सांध्य कालीन अर्घ्य

30 Mar, 2020 13:20 IST|Sakshi
सोशल मी्डिया को सौजन्य से

सूर्य पूजा का विशेष पर्व है चैती छठ

यूं शुभ र्मुहूर्त में दें सांध्यकालीन अर्घ्य 

आस्था के महापर्व चैती छठ का बड़ा महत्व है। आपको बता दें कि साल में दो बार चैत्र और कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष में महापर्व छठ व्रत होता है जिसमें श्रद्धालु भगवान भास्कर की अराधना करते हैं। 
इस बार शनिवार 28 मार्च को नहाय खाय से चैती छठ की शुरुआत हो गई और रविवार को व्रतियों ने खरना किया। आज सोमवार, 30 मार्च को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाना है और मंगलवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रती पारण करेंगे। इस व्रत-उपासना में छठी मैया और भगवान भास्कर की पूजा आराधना की जाती है।

छठ महापर्व का महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार जो व्रती सच्ची श्रद्धा एवं भक्ति से छठी मैया की पूजा-अर्चना करता है। उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। साथ ही परिवार और बच्चों की रक्षा भी होती है। यह पर्व संतान प्राप्ति और परिवार की सुख-सलामती के लिए किया जाता है।

कबसे हुई छठ पूजा की शुरुआत 

छठ पूजा की शुरुआत को लेकर कई मान्यताएं हैं। इसमें एक त्रेता युग की कथा है। जब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने त्रेता युग में कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष की षष्ठी को अयोध्या में रामराज की स्थापना की तो इस अवसर पर प्रभु श्रीराम और माता सीता ने सूर्य देव की उपासना कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। उस समय से छठ पूजा मनाने की प्रथा चली आ रही है।

कर्ण ने भी की थी सूर्य देव की पूजा 

ऐसा कहा जाता है कि महाभारत काल में कर्ण ने सर्वप्रथम छठ पूजा की शुरुआत की थी। उन्होंने ही सबसे पहले सूर्य देव को अर्घ्य दिया था जिसे द्रौपदी ने भी अपनाया था। कर्ण की गिनती बड़े दानवीरों में होती है। उनके बारे में ऐसी मान्यता है कि सूर्य को अर्घ्य देने के बाद वह दान जरूर देते थे।

महाभारत में उनके वध का एक कारण उनका दानवीर होना भी रहा है। वहीं, द्रौपदी ने भी पांडवों की रक्षा और राजपाट के लिए छठ पूजा की थी। कालांतर में छठी मैया ने उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण की थीं।  

सांध्य कालीन अर्घ्य का शुभ मुहूर्त

सोमवार को चैत्र शुक्ल षष्ठी को सर्वार्थ सिद्धि योग में अस्ताचलगामी सूर्य देवता को पहला अर्घ्य दिया जाएगा। अर्घ्य देने का शुभ समय शाम को 5:58 बजे से 06:07 तक है। वहीं मंगलवार को सप्तमी 31 मार्च को भी द्विपुष्कर योग में उदीयमान सूर्य को दूध और जल से अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाएगा। 
ज्योतिषियों के अनुसार प्रात:कालीन अर्घ्य का शुभ समय सुबह 05  52 बजे से 06:15 बजे तक है। उगते सूर्य को अर्घ्य देकर आयु-आरोग्यता, यश, संपदा की कामना की जाएगी। सोमवार को चैत्र शुक्ल षष्ठी डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। 
इस बार छठ महापर्व ग्रह गोचरों के शुभ संयोग में मनाया जा रहा है। यह पर्व पारिवारिक सुख समृद्धि और मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए व्रती पूरे विधि-विधान से व्रत करती है।
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