भौम प्रदोष व्रत पर बन रहा शुभ संयोग, यूं करेंगे पूजा तो प्रसन्न होंगे भोलेनाथ

14 Sep, 2020 22:00 IST|मीता
भौम प्रदोष व्रत

भौम प्रदोष का महत्व

भौम प्रदोष पर बन रहा शुभ संयोग

भगवान शिव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा प्राप्त करने में प्रदोष व्रत को बहुत ही उपयोगी और सहायक माना गया है। प्रदोष व्रत प्रत्येक मास की त्रयोदशी तिथि को होता है। इस महीने प्रदोष व्रत 15 सितंबर को रखा जाएगा। मंगलवार के दिन पड़ने के कारण यह भौम प्रदोष व्रत कहलाएगा। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। 

इस बार प्रदोष पर बन रहा शुभ संयोग 

इस बार प्रदोष पर विशेष संयोग बन रहा है। यह संयोग है भौम प्रदोष व्रत के दिन दो तिथियों के एक साथ होने का। दरअसल प्रदोष व्रत कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन रखा जाता है और अभी कृष्ण पक्ष चल रहा है।

 इस पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि पड़ती है यानि मंगलवार के दिन प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि दोनों एक साथ पड़ रही है। दोनों तिथियां भोलेनाथ शिव शंकर को प्रिय हैं। इसलिए धार्मिक दृष्टि से यह संयोग बहुत ही शुभ होता है। प्रदोष व्रत भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए रखा जाता है। 

भक्त को भगवान श्री भोलेनाथ पर अटूट श्रद्धा विश्वास हो, उन भक्तों को मंगलवार के दिन में पडने वाले प्रदोष व्रत का नियम पूर्वक पालन कर उपवास करना चाहिए। यह व्रत उपवासक को धर्म, मोक्ष से जोडने वाला और अर्थ, काम के बंधनों से मुक्त करने वाला होता है। इस व्रत में भगवान शिव की पूजन किया जाता है। भगवान शिव कि जो आराधना करने वाले व्यक्तियों की गरीबी, मृत्यु, दु:ख और ऋणों से मुक्ति मिलती है।


ये है प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व


जिस प्रकार प्रति माह में दो एकादशी तिथि होती हैं उसी तरह दो त्रयोदशी तिथियां भी होती हैं। त्रयोदशी तिथि को प्रदोष कहते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत महत्वपूर्ण होता है। इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती की पूजा का विधान है। कहा जाता है कि भगवान शिव प्रदोषकाल में कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं। इसलिए इस दिन भगवान शिव की विशेष आराधना की जाती है। उनकी पूजा से भक्तों को उनका आशीर्वाद मिलता है। भक्तों की सभी मनोकामनाओं भी पूर्ण होती हैं। 

ऐसे करें प्रदोष पर भोलेनाथ की पूजा 

- व्रत रखने वाले को सुबह जल्दी उठकर शौचादि से निवृत्त होकर स्नान करना चाहिए। 
- इसके बाद इस व्रत को करने का संकल्प लेना चाहिए। 
- अब स्वच्छ वस्त्र धारण करके भगवान शिव की प्रतिमा को गंगा जल से अभिषेक करना चाहिए। 
- इसके बाद उनकी पूजा करें।
- शिव आराधना में शिवजी को पुष्प अक्षत्, बेल पत्र, भांग, धतूरा, सफेद चंदन, गाय का दूध, धूप आदि अर्पित करें। 
- पूजा के समय ॐ नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। 
- इस दौरान शिव चालीसा का पाठ भी करें और अंत में शिव आरती करके अपनी पूजा को समाप्त करें। 
- भगवान शिव को अपनी इच्छानुसार भोग लगाएं अंत में पूजा का प्रसाद सभी में बांट दें।


प्रदोष व्रत पूजा समय 
धार्मिक मान्यता है कि (सूर्योदय और सूर्यास्त का समय) का पूजा के लिए शुभ माना जाता है। हालांकि ऐसा भी कहा जाता है कि प्रदोष व्रत में शाम की पूजा का विशेष महत्व होता है।  

प्रदोष व्रत के लाभ 
मनोकामना पूर्ति के लिए प्रदोष व्रत बेहद ही शुभ होता है। आस्था के अनुसार जो व्यक्ति प्रदोष व्रत को सच्चे मन से करता है भगवान शिव उस व्यक्ति की मनोकामना पूर्ण करते हैं। इसके साथ ही इस व्रत का फल व्यक्ति को तमाम कष्टों और दुखों से मुक्त करता है। इस व्रत को संतान कामना के लिए भी रखा जाता है।

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