अधिक मास की अमावस्या पर यूं करें पूजा, भूलकर भी न करें ये काम

15 Oct, 2020 22:51 IST|मीता
अधिक मास अमावस्या

अधिक मास की अमावस्या का महत्व 

अमावस्या पर होगा अधिक मास समाप्त

हम सब जानते ही हैं कि हिन्दू धर्म में अमावस्या का विशेष महत्व होता है। खास तौर पर अधिक मास की अमावस्या का विशेष महत्व माना गया है। इस संबंध में मान्यता है कि अधिक मास के अंतिम दिन यानी आखिरी दिन अमावस्या को दान-धर्म करने से जीवन में कभी धन की कमी नहीं रहती है तथा इससे जीवन की कई परेशानियों और दुखों का निवारण हो जाता है। इस बार यह अमावस्या शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2020 को है। 

ऐसे करें अधिक मास अमावस्या पर पूजा 

- मान्यता है कि अधिक मास की अमावस्या के दिन पितरों को जल देने से उन्हें तृप्ति मिलती है।
- ऐसा माना गया है कि पीपल वृक्ष के मूल में भगवान विष्णु, तने में शिवजी तथा अग्रभाग में ब्रह्माजी का निवास होता है। अत: इस दिन पीपल के पूजन से सौभाग्य की वृद्धि होती है।

- अमावस्या के दिन पीपल की परिक्रमा करने का विधान है। उसके बाद गरीबों को भोजन कराया जाता हैं।

- महाभारत काल से ही अमावस्या पर तीर्थस्थलों पर पिंडदान करने का विशेष महत्व है।

- अमावस्या के दिन 108 बार तुलसी की परिक्रमा अवश्य करें।

- अधिक मास की अमावस्या के दिन सूर्य नारायण को जल देने से दरिद्रता दूर होती है।

- जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर है, वह जातक गाय को दही और चावल खिलाएं तो उन्हें मानसिक शांति प्राप्त होगी।

- पर्यावरण को सम्मान देने के लिए भी अधिकमास की अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष की पूजा करने का विधान माना गया है।

- इस दिन गंगा स्नान का भी विशेष महत्व है।

- जहां अमावस्या पर भूखे को भोजन कराने से शारीरिक परेशानियां दूर होती हैं, वहीं इस दिन सुहागिनों द्वारा अपने पति की दीर्घायु कामना के लिए व्रत रखने का भी विधान है। इस दिन शुक्रवार होने से धन की देवी मां लक्ष्मी का विशेष पूजन-अर्चन करना चाहिए। इस दिन अधिक मास का समापन भी होगा।

समाप्त होगा अधिक मास 

अधिक मास अमावस्या 16 अक्तूबर को है। इस दिन पुरूषोत्तम मास समाप्त हो जाएगा और फिर अगले दिन आश्विन शुक्ल की प्रतिपदा से शारदीय नवरात्रि शुरू हो जाएगी। अधिक मास 18 सितंबर से शुरू हुआ था। अधिक मास का महीना 3 साल में एक बार आता है। जिसके कारण यह अमावस्या बहुत ही खास है। अमावस्या पर कुछ कार्यों को नहीं करना चाहिए। दरअसल, इस दिन इन कार्यों को अशुभ माना जाता है। 

अधिक मास की अमावस्या पर नहीं करने चाहिए ये काम ....

- अमावस्या पर भूत-प्रेत, पितृ, पिशाच, निशाचर जीव-जंतु और दैत्य ज्यादा सक्रिय रहते हैं। इसकी वजह से हमारे चारों ओर नकारात्मक शक्तियां सक्रिय हो जाती है इसलिए अमावस्या की रात को किसी सुनसान जगह पर जाने से बचना चाहिए खासतौर पर श्मशान की तरफ तो कभी भूलकर भी नहीं जाना चाहिए।

-अमावस्या पर घर में लड़ाई-झगड़े से बचना चाहिए। अगर आप घर में अमावस्या पर परिवार के सदस्यों से वाद-विवाद करते हैं तो इस दिन पितरों की कृपा नहीं मिलती है इसलिए इस दिन घर में शांति का वातावरण बनाएं रखना चाहिए।

-अमावस्या पर पति-पत्नी के बीच शारीरिक संबंध नहीं बनना चाहिए। गरुण पुराण के अनुसार अमावस्या पर संबंध बनाने से पैदा होने वाली संतान जीवन में कभी भी सुखी नहीं रह पाती है।

- आपकी आदत रोज सुबह देर से उठने की है तो अमावस्या के दिन ऐसा न करें। इस दिन सुबह जल्दी उठना चाहिए और स्नान करने के बाद सूर्य देवता को जल चढ़ाएं।

-अमावस्या पर तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए साथ ही इस दिन किसी भी प्रकार का नशा भी नहीं करना चाहिए।


 

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