आज सर्व पितृ अमावस्या पर ऐसे करेंगे पितरों का श्राद्ध तो आशीर्वाद देकर पितृ होंगे विदा

17 Sep, 2020 08:19 IST|मीता
अमावस्या

सर्व पितृ अमावस्या का महत्व

सर्व पितृ अमावस्या पर ऐसे करें पितरों का श्राद्ध

आज सर्व पितृ अमावस्या है। यह श्राद्ध का अंतिम दिन होता है। शास्त्रों में आश्विन माह कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मोक्षदायिनी अमावस्या और पितृ विसर्जनी अमावस्या कहा गया है। मान्यता के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि इस दिन मृत्यु लोक से आए हुए पितृजन वापस लौट जाते हैं तो इस दिन उनका अंतिम श्राद्ध पूरे विधि-विधान से करना चाहिए जिससे कि वे प्रसन्न होकर लौट सकें। 

अश्विन अमावस्या मुहूर्त

अमावस्या तिथि शुरू: 19:58:17 बजे से (सितंबर 16, 2020) 

अमावस्या तिथि समाप्त: 16:31:32 बजे (सितंबर 17, 2020)

शुभ होती है गुरुवार के दिन पितरों की विदाई 


मान्यता के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि गुरुवार का दिन पितरों के विसर्जन के लिए उत्तम माना जाता है। इस दिन पितरों को विदा करने से पितृ देव बहुत प्रसन्न होते हैं क्योंकि यह मोक्ष देने वाले भगवान विष्णु की पूजा का दिन माना जाता है। इस कारण सर्व पितृ अमावस्या के दिन पितरों का विसर्जन विधि-विधान से किया जाना चाहिए। 

यूं श्रद्धा से करें पितरों को विदा


जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास से नमन कर अपने पितरों को विदा करता है उसके पितृ देव उसके घर-परिवार में खुशियां भर देते हैं। जिस घर के पितृ प्रसन्न होते हैं पुत्र प्राप्ति और मांगलिक कार्यक्रम उन्हीं घरों में होते हैं। 

आज ऐसे करें पितरों का तर्पण


पितृ अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर बिना साबुन लगाए स्नान करें और फिर साफ-सुथरे कपड़े पहनें। पितरों के तर्पण के निमित्त सात्विक पकवान बनाएं और उनका श्राद्ध करें। शाम के समय सरसों के तेल के चार दीपक जलाएं। इन्हें घर की चौखट पर रख दें। 

पितरों से मांगे सुखी जीवन का वरदान


एक दीपक लें। एक लोटे में जल लें। अब अपने पितरों को याद करें और उनसे यह प्रार्थना करें कि पितृपक्ष समाप्त हो गया है इसलिए वह परिवार के सभी सदस्यों को आशीर्वाद देकर अपने लोक में वापस चले जाएं।

पीपल के वृक्ष के नीचे जलाएं 

पितरों के लिए दीपक
यह करने के पश्चात जल से भरा लोटा और दीपक को लेकर पीपल की पूजा करने जाएं। वहां भगवान विष्णु जी का स्मरण कर पेड़ के नीचे दीपक रखें जल चढ़ाते हुए पितरों के आशीर्वाद की कामना करें। पितृ विसर्जन विधि के दौरान किसी से भी बात ना करें। 

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