सूर्यदेव की विशेष पूजा का पर्व है मोरयाई छठ, जानें इसका महत्व व पूजा-विधि

23 Aug, 2020 18:37 IST|मीता
मोरयाई छठ पूजा का महत्व

मोरयाई छठ का महत्व 

मोरयाई छठ पर ऐसे करें सूर्य पूजा 

भादो माह की शुक्लपक्ष की षष्ठी को मोरयाई छठ का पर्व मनाया जाता है। इस दिन विशेष रूप से भगवान सूर्य की पूजा की जाती है। इस दिन सूर्य उपासना व व्रत रखने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

इस बार मोरयाई छठ व्रत 24 अगस्त, सोमवार को रखा जाएगा। इसे सूर्य षष्ठी व्रत या मोर छठ के नाम से भी जाना जाता है।

भविष्योत्तर पुराण के अनुसार, प्रत्येक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को भगवान सूर्य के निमित्त व्रत करना चाहिए। इनमें भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी का विशेष महत्व है। इस दिन गंगा स्नान, सूर्योपासना, जप एवं व्रत किया जाता है।

इस दिन सूर्य पूजन, गंगा स्नान एवं दर्शन तथा पंचगव्य सेवन से अश्वमेध के समान फल प्राप्त होता है। इस दिन व्रत को अलोना (नमक रहित) भोजन दिन में एक बार ही ग्रहण करना चाहिए। सूर्य पूजा में लाल पुष्प, गुलाल, लाल कपड़ा, लाल रंग की मिठाई आदि का विशेष महत्व है।

इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है, लेकिन अगर किसी कारणवश गंगा स्नान संभव न हो तो घर पर ही नहाने के पानी में कुछेक मात्रा में गंगा जल डालकर स्नान किया जा सकता है। सूर्य उदय होते ही भगवान सूर्यदेव की उपासना की जाती है।

ऐसे करें सूर्यदेवता को प्रसन्न ...

- इस दिन सूर्य देव के विभिन्न नाम तथा सूर्य मंत्रों का जप अवश्य करना चाहिए

- श्रद्धापूर्वक व्रत रखें

- सुबह सूर्य देव के उदय होते ही सूर्योपासना करें. ध्यान रखें जब तक सूर्य देव प्रत्यक्ष दिखाई न दें तब तक सूर्योपासना न करें।

- इस दिन पंचगव्य का सेवन अवश्य करना चाहिए

- सूर्य मंत्रों का जाप करें ...

- ऊं घृ‍णिं सूर्य्य: आदित्य:

- ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा..

सूर्य को अर्घ्य देते समय इस मन्त्र का जाप करें

- एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते. अनुकम्पय मां देवी गृहाणार्घ्यं दिवाकर

माना जाता है कि यह व्रत करने वालों पर सूर्य देव प्रसन्न होकर उन्हें सभी तरह के सुख, ऐश्वर्य तथा अश्वमेध यज्ञ का फल देते हैं। मोरयाई छठ पर सूर्य देव उपरोक्त विधिनुसार पूजन करने से शीघ्र प्रसन्न होकर शुभाशीष प्रदान करते हैं।


 

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