मकर संक्रांति पर बन रहा विशेष योग, यूं करेंगे पूजा तो सूर्य के साथ प्रसन्न होंगे शनि, मिलेगा शुभ फल

11 Jan, 2021 13:59 IST|मीता
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मकर संक्रांति का महत्व व पूजा 

मकर संक्रांति पर सूर्य के साथ करें शनि पूजा

मकर संक्रांति पर बन रहा पंचग्रही योग

हम सब यह तो जानते ही हैं कि मकर संक्रांति (Makar sankranti) का त्यौहार अब बस आने ही वाला है और इसकी तैयारियां भी हर कहीं चल रही है। इस बार मकर संक्रांति का पावन पर्व 14 जनवरी, गुरुवार को मनाया जाएगा। सूर्य (Lord surya) का किसी राशि विशेष पर भ्रमण करने को संक्रांति कहा जाता है। वहीं सूर्य जिस राशि में प्रवेश करते हैं उस संक्रांति को भी उसी राशि के नाम से जाना जाता है। सूर्य हर माह राशि परिवर्तन करते हैं इसीलिए साल में कुल बारह संक्रांतियां आती है।

वहीं देखा जाए तो दो संक्रांतियां महत्वपूर्ण होती है एक तो मकर संक्रांति जब सूर्य उत्तरायण होते हैं और दूसरी कर्क संक्रांति जब सूर्य दक्षिणायन होते हैं। मकर संक्रांति पर सूर्य उत्तरायण होते हैं इसलिए इसे शुभ माना जाता है और इस दिन स्नान-दान का काफी महत्व होता है।

इस बार मकर संक्रांति पर बन रहा पंचग्रही योग

मकर संक्रांति इस बार 14 जनवरी को है और इस दिन चंद्रमा मकर राशि में रहेगा। इस दिन श्रवण नक्षत्र रहेगा। इस बार मकर संक्रांति पर ग्रहों का विशेष संयोग बन रहा है। इस दिन मकर राशि में पंच ग्रही योग बन रहा है जो कई वर्षों के बाद बन रहा है। इस पंच ग्रही योग के कारण इस वर्ष की मकर संक्रांति विशेष मानी जा रही है। मकर संक्रांति पर मकर राशि में सूर्य के साथ गुरु, शनि, बुध और चंद्रमा एक साथ विराजमान रहेंगे।


ये है मकर संक्रांति का ज्योतिष से संबंध

- सूर्य और शनि का संबंध इस पर्व से जुड़ा है इसीलिए ज्योतिष में इस पर्व का महत्व बढ़ जाता है।

- सूर्य इस दिन अपने पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हैं। इसे पिता के पुत्र के घर आने के रूप में देखा जाता है। दोनों का आपस में रिश्ता कटु है फिर भी इस दिन सूर्य शनि के घर आते हैं इसीलिए इसकी महत्ता है।

- आमतौर पर शुक्र का उदय भी लगभग इसी समय होता है इसलिए यहां से शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। वहीं इसी दिन से उत्तरायण भी होता है तो इस दिन का काफी महत्व है।

- माना जाता है कि अगर कुंडली में सूर्य या शनि की स्थिति ख़राब हो तो इस पर्व पर विशेष तरह की पूजा से उसे ठीक किया जा सकता है।

- कहते हैं कि जिस परिवार में रोग-कलह तथा अशांति हो वहां पर रसोई घर में ग्रहों के विशेष नवान्न से पूजा करके लाभ लिया जा सकता है।

मकर संक्रांति पर सूर्य के साथ करें शनिदेव की पूजा 

इस बार मकर संक्रांति पर बन रहे हैं ग्रहों के संयोग के कारण शनि देव की पूजा का विशेष फल इस दिन प्राप्त किया जा सकता है। शनिदेव की पूजा और शनि का दान शनि की अशुभता को कम करने में सहायक साबित हो सकता है। पौराणिक कथा के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनिदेव के घर आते हैं इसलिए इस दिन शनिदेव की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।

साढ़ेसाती और ढैय्या से मिलेगी राहत

मकर राशि में शनि का गोचर है। यह तो हम जानते ही हैं कि शनि 7 जनवरी 2021 को अस्त हो चुके हैं। शनि के अस्त होने से शनि का प्रभाव कम हो जाता है। मकर राशि को छोड़कर शेष अन्य राशियां जिन पर शनि की दृष्टि है उन्हें  इस समय आराम मिल सकता है। मिथुन और तुला राशि पर शनि की ढैय्या और धनु, मकर और कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है इसलिए इन राशियों के जातकों को मकर संक्रांति पर शनि पूजा करने से लाभ मिलता है।

शुभ फल पाने के लिए मकर संक्रांति पर करें ये काम ....

- इस दिन पहली होरा में स्नान करें, सूर्य को अर्घ्य दें।

- श्रीमदभागवत के एक अध्याय का पाठ करें या गीता का पाठ करें

- नए अन्न, कम्बल और घी का दान करें।

- इस दिन भोजन में नए अन्न की खिचड़ी बनायें।

- भोजन भगवान को समर्पित करके प्रसाद रूप से ग्रहण करें।

जानें आखिर इस दिन सूर्य से लाभ पाने के लिए क्या करें ...

- शुभ फल पाने के लिए लाल फूल और अक्षत डाल कर सूर्य को अर्घ्य दें।

मकर संक्रांति के दिन सूर्य के बीज मंत्र का जाप करें

- मंत्र होगा - "ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः"

- लाल वस्त्र, तांबे के बर्तन तथा गेंहू का दान करें।

- इस दिन संध्याकाल में अन्न का सेवन न करें।

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जानें शनि से लाभ पाने के लिए क्या करें ...

- तिल और अक्षत डाल कर सूर्य को अर्घ्य दें।

- शनि देव के मंत्र का जाप करें।

- मंत्र होगा - "ॐ प्रां प्री प्रौं सः शनैश्चराय नमः"

- घी, काला कम्बल और लोहे का दान करें।

- दिन में अन्न का सेवन न करें।

मकर संक्रांति शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर प्रात: 8.30 से शाम 5.46 बजे तक है।

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