आज है आंवला नवमी का पावन पर्व, संतान प्राप्ति व मंगलकामना के लिए की जाती है विशेष पूजा

23 Nov, 2020 07:53 IST|मीता
सोशल मीडिया के सौजन्य से

अक्षय नवमी को ही कहते हैं आंवला नवमी

आंवला नवमी को होती है आंवले के वृक्ष की पूजा

हिंदू धर्म में कार्तिक मास का बड़ा महत्व है। इस पूरे महीने में स्नान-दान व दीपदान के साथ ही तुलसी पूजा (Tulasi Puja)  भी की जाती है। वहीं दिवाली (Diwali) के बाद तो त्योहारों की झड़ी सी लग जाती है। गोवर्धन पूजा, भाई दूज, छठ महापर्व फिर गोपाष्टमी (Gopashtami) के बाद आता है आंवला नवमी (Amla Navami) का पर्व जिसे अक्षय नवमी (Akshay Navami) भी कहते हैं। कार्तिक महीने के शुक्लपक्ष की नवमी को आंवला नवमी मनाई जाती है। 

माना जाता है कि अक्षय नवमी के दिन की गई पूजा व स्नान-दान का अक्षय फल मिलता है। शास्त्रों की मानें तो अक्षय नवमी का महत्व भी अक्षय तृतीया की तरह ही है और इस दिन किए गए धर्मार्थ कार्य का कई गुना फल मिलता है। 

इस दिन मनाई जाती है अक्षय नवमी 

कार्तिक शुक्लपक्ष की नवमी को अक्षय नवमी मनाई जाती है। देव उठनी एकादशी से दो दिन पहले ही आती है अक्षय नवमी । पौराणिक कथाएं कहती हैं कि अक्षय नवमी के दिन से ही सतयुग आरंभ हुआ था। ऐसे में इस दिन को सत्य युगाडी भी कहा जाता है। यह अक्षय तृतीया के समान ही फलदायक है। साथ ही यह भी कहा जाता है कि इस दिन त्रेतायुग भी शुरू हुआ था और इसे त्रेता युगाडी के नाम से भी जाना जाता है। किसी भी तरह के दान-पुण्य के लिए यह दिन अनुकूल और शुभ माना जाता है।

इस बार अक्षय नवमी आज यानी 23 नवंबर सोमवार को है। देश के कई हिस्सों में इसे आंवला नवमी भी कहा जाता है। मान्यता है कि कई देवताओं का निवास आंवले के पेड़ पर होता है। ऐसे में भक्त इनकी पूजा करते हैं। कहा जाता है कि जो भक्त इस दिन मथुरा-वृंदावन की परिक्रमा करते हैं उन्हें सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसका लाभ पाने के लिए भक्त अनुष्ठान करते हैं।

अक्षय नवमी का महत्व 

जैसे कि नाम से ही पता चलता है अक्षय नवमी का महत्व बहुत ज्यादा है और इस दिन किए गए स्नान-दान का विशेष फल मिलता है। इस पर्व को भक्तजन पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ मनाते हैं। इस दिन व्रत-पूजा व अनुष्ठान करने से व्यक्ति की इच्छाएं पूरी होती हैं। साथ ही मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। इस दिन दान देना बेहद ही शुभ माना जाता है। अक्षय नवमी को कुष्मंड नवमी भी कहा जाता है। कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने इस दिन दानव कुष्मंड का वध किया था और ब्रह्मांड में धर्म को बहाल किया था।


अक्षय नवमी तिथि व मुहूर्त 

नवमी तिथि 22 नवंबर रात 10:52 बजे से प्रारंभ होकर 23 नवंबर सोमवार रात्रि 12:33 बजे तक रहेगी। 
पूजा मुहूर्त सुबह 06:45 बजे से 11:54 बजे तक रहेगा जिसका कुल समय 5 घंटे 8 मिनट है। 

आंवले के पेड़ के नीचे भोजन करने का महत्व 

माना जाता है कि अक्षय नवमी या आंवला नवमी के दिन किया गया पुण्य कभी खत्म नहीं होता है। इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे बैठने और भोजन करने का बड़ा महत्व है। कहते हैं आंवला नवमी पर आंवले के पेड़ के नीचे भोजन करने से रोगों का नाश होता है और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। आंवले के वृक्ष के नीचे विद्वानों को भोजन कराया जाता है, तथा दक्षिणा भेंट कर खुद भी उसी वृक्ष के निकट बैठकर भोजन किया जाता है। इस दिन महिलाएं अक्षत, पुष्प, चंदन आदि से पूजा-अर्चना कर, आंवले के पेड़ पर पीला धागा लपेटकर वृक्ष की 108 परिक्रमा करती हैं।


आंवले के पेड़ में होता है विष्णु और शिव का वास 

पदम् पुराण के अनुसार अक्षय नवमी के दिन आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु एवं शिवजी का निवास होता है। इस दिन महिलाएं संतान की प्राप्ति और संतान की मंगलकामना के लिए आंवले के पेड़ की पूजा करती हैं। किसान खाद्य पदार्थों से निरंतर भंडार भरे रहने और भविष्य में अच्छी फसल के लिए इस दिन पूजा करते हैं। 

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इस दिन आंवले का वृक्ष घर में लगाना वास्तु की दृष्टि से शुभ माना जाता है। वैसे तो पूर्व की दिशा में बड़े वृक्षों को नहीं लगाना चाहिए किंतु आंवले के वृक्ष को इस दिशा में लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। इसे घर की उत्तर दिशा में भी लगाया जा सकता है।

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