जानें कबसे शुरू हो रहा है अधिक मास, क्या है इसका महत्व व नियम

8 Sep, 2020 16:56 IST|मीता
सोशल मीडिया के सौजन्य से

कब से शुरू हो रहा है अधिक मास

अधिक मास का महत्व

पितृपक्ष चल रहा है और हर साल पितृपक्ष समाप्त होते ही अगले दिन से नवरात्रि शुरू हो जाती है पर इस बार ऐसा नहीं हो रहा है। इस बार पितृपक्ष समाप्त होने के एक महीने बाद नवरात्र शुरू होगा क्योंकि पितृपक्ष के तुरंत बाद इस बार अधिकमास शुरू हो जाएगा। अधिकमास को पुरुषोत्तम मास व मलमास भी कहा जाता है। 


कब से शुरू हो रहा है अधिकमास

अधिकमास 18 सितंबर से शुरू होगा जो 16 अक्टूबर तक चलेगा। इसी वजह से एक महीने बाद शुरू होगी नवरात्रि। 
मलमास में में भगवान विष्णु की पूजा होती है। मलमास में शादी विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि जैसे शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। शुभ कार्यों को मलमास में निषेध माना गया है।

आखिर क्यों और कैसे आता है अधिक मास  

पंचांग के अनुसार मलमास या अधिक मास का आधार सूर्य और चंद्रमा की चाल से है। सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है। चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। इन दोनों वर्षों के बीच 11 दिनों का अंतर होता है। यही अंतर तीन साल में एक महीने के बराबर होता है। इसी अंतर को दूर करने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास आता है। इसी को मलमास या अधिक मास कहा जाता है।

अधिक मास में क्या करें 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास में भगवान का स्मरण करना चाहिए। अधिक मास में किए गए दान आदि का कई गुणा पुण्य प्राप्त होता है। इस मास को आत्म की शुद्धि से भी जोड़कर देखा जाता है। अधिक मास में व्यक्ति को मन की शुद्धि के लिए भी प्रयास करने चाहिए। आत्म चिंतन करते मानव कल्याण की दिशा में विचार करने चाहिए। सृष्टि का आभार व्यक्त करते हुए अपने पूर्वजों का धन्यवाद करना चाहिए। ऐसा करने से जीवन में सकारात्मकता को बढ़ावा मिलता है।


अधिक मास का असर नवरात्रि पर 

अश्विन मास में मलमास लगना और एक महीने के अंतर पर दुर्गा पूजा आरंभ होना। ऐसा संयोग करीब 165 साल बाद होगा। इस साल दो आश्विन मास होंगे। आश्विन मास में श्राद्घ और नवरात्रि, दशहरा जैसे त्योहार होते हैं। अधिकमास के कारण दशहरा 26 अक्टूबर और दीपावली 14 नवंबर को मनाई जाएगी। 

इस बार चातुर्मास है पांच महीने का

चातुर्मास हमेशा चार महीने का होता है लेकिन इस बार अधिकमास के कारण चातुर्मास पांच महीने का है। लीप ईयर होने के कारण ही ऐसा हुआ है और खास बात ये है कि 165 साल बाद लीप ईयर और अधिकमास दोनों ही एक साल में आए हैं। चातुर्मास में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। केवल धार्मिक कार्य से जुड़े कार्य ही किए जा सकते हैं।

नवरात्र प्रारंभ 17 अक्टूबर से

17 अक्टूबर को मां शैलपुत्री पूजा घटस्थापना, 18 अक्टूबर को मां ब्रह्मचारिणी पूजा, 19 अक्टूबर को मांचंद्रघंटा पूजा, 20 अक्टूबर को मां कुष्मांडा पूजा, 21 अक्टूबर को मां स्कंदमाता पूजा, 22 अक्टूबर षष्ठी मां कात्यायनी पूजा, 23 अक्टूबर को मां कालरात्रि पूजा, 24 अक्टूबर को मां महागौरी दुर्गा, महा नवमी पूजा दुर्गा महा अष्टमी पूजा, 25 अक्टूबर को मां सिद्घिदात्री नवरात्रि पारणा विजय दशमी, 26 अक्टूबर को दुर्गा विसर्जन किया जाएगा।


 

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