भगवान जगन्नाथ को ऐसे करेंगे प्रसन्न तो मिलेगा शुभाशीर्वाद, करें ये खास उपाय

23 Jun, 2020 03:30 IST|Sakshi
भगवान जगन्नाथ को ऐसे करें प्रसन्न

भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का महत्व 

23 जून को है जगन्नाथ रथयात्रा 

भगवान जगन्नाथ को ऐसे करें प्रसन्न

भगवान जगन्नाथ जगत के नाथ है और हर कोई उनके आगे शीश नवाता है। भगवान जगन्नाथ की लीला भूमि उड़ीसा की पुरी है जिसको पुरुषोत्तम पुरी भी कहा जाता है। उड़ीसा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की काष्ठ की अर्धनिर्मित मूर्तियां स्थापित हैं जिनका निर्माण राजा इन्द्रद्युम्न ने कराया था।

आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को जगन्नाथपुरी में भगवान जगन्नाथ जी की रथयात्रा निकलती है। रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ वर्ष में एक बार जनसामान्य के बीच यानी अपने भक्तों के बीच आते हैं, उनकी सुध स्वयं बाहर निकलकर लेते हैं तो जाहिर सी बात है कि भक्तों के लिए इस दिन का बड़ा महत्व होता है। 

इस बार जगन्नाथ रथयात्रा 23 जून, मंगलवार को है। भगवान जगन्नाथ अपने मंदिर से निकलकर रथयात्रा में गुंडिचा मंदिर जाते हैं और वहीं दशमी तिथि तक रहते हैं और फिर उल्टी रथयात्रा निकलती है जिसमें वे फिर अपने मंदिर पहंचते हैं।  वैसे जितने दिन भगवान जगन्नाथ अपनी मौसी के घर यानी गुंडिचा मंदिर में रहते हैं तब तक विशेष रूप से उनकी पूजा और प्रार्थना करना विशेष फलदायी होता है। 

इस बार कोरोना के चलते भगवान की रथयात्रा में भक्तजन भाग नहीं ले सकेंगे तो कोई बात नहीं आप अपने घर पर ही भगवान जगन्नाथ की उपासना कर सकते हैं, उन्हें भोग लगा सकते हैं और उनके मंत्रों का जाप कर सकते हैं। 

जानें आखिर भगवान जगन्नाथ को क्या प्रिय है 

- भगवान जगन्नाथ विष्णु के अवतार माने गए हैं इसलिए उनकी पूजा में भी पीले पुष्प ही शामिल करें। गेंदे के फूल भगवान को बेहद प्रिय हैं। गेंदे की माला से उनका श्रृंगार कर उन पर उसी फूल से पुष्पांजिल करें।

- भगवान जगन्नाथ जी की आरती कभी एक दीप से नहीं की जाती। उनकी आरती में पांच दीप यानी पंचप्रदीप शामिल होने चाहिए। दीप जला कर "एतस्मै नीराजन दीपमालाएं नमः" कह कर आचमनी जल छिड़के और पुष्प लेकर "एष नीराजन दीपमालाएं ॐ नमः नारायणाय नमः" मंत्र उच्चारण करें।

- भगवान को धूप दीप जब भी दें उसमें कपूर का प्रयोग जरूर करें क्योंकि प्रभु को कपूर के धूप की सुगंध बेहद प्रिय होती है। सूर्यास्त से पहले एक बार आरती जरूर करें और फिर शाम को संध्या आरती करें। दोनों ही आरती में कपूर के धूप जरूर जलाएं।

- जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा में मिलने वाला महाप्रसाद दो तरह का होता है। एक सूखा प्रसाद और दूसरा गीला प्रसाद। सूखे प्रसाद में नारियल, लड्डू या सूखी मिठाई होती है जबकि गीले में मिक्स चावल, साग-भाजा और सब्जी होती है। साथ ही मालपुआ भी होता है। तो आप घर में भी प्रभु को यह पकवान भोग लगा सकते हैं।

इन विशेष उपायों से प्रसन्न होंगे भगवान जगन्नाथ 

संतान प्राप्ति का उपाय-

- पति पत्नी पीले वस्त्र धारण करके भगवान जगन्नाथ की पूजा करें।

- भगवान जगन्नाथ को मालपुए का भोग लगायें।

- इसके बाद संतान गोपाल मंत्र का जाप करें और संतान प्राप्ति की प्रार्थना करें।

- एक ही मालपुए के दो हिस्से करें , आधा आधा पति पत्नी खाएं।

परिवार के लोगों में प्रेम बढ़ाने का उपाय-

- भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र के चित्र या मूर्ति की स्थापना करें।

- उनको फूलों से सजाएँ और उनके समक्ष घी का दीपक जलाएं।

- इसके बाद सभी लोग मिलकर "हरि बोल - हरि बोल" का कीर्तन करें।

- फिर साथ में मिलकर प्रसाद ग्रहण करें।

ग्रह पीड़ा से मुक्ति पाने का उपाय-

- पीले वस्त्र धारण करके भगवान जगन्नाथ का पूजन करें।

- उनको चन्दन लगायें, विभिन्न भोग प्रसाद और तुलसीदल अर्पित करें।

- इसके बाद गजेंद्र मोक्ष का पाठ करें, या गीता के ग्यारहवें अध्याय का पाठ करें।

- भोग प्रसाद खुद भी खाएं और दूसरों को भी खिलाएं।

- जो कोई भी इस प्रसाद को खायेगा, उसकी बाधाओं का नाश होगा। वैसे भी कहते ही हैं जगन्नाथ के भात, जगत पसारे हाथ। 

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